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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पानी का उपयोग कर बनाया हाइड्रोजन ईंधन
Thu, 18 Feb 2021 06:35 AM IST
नोएडा ब्यूरो
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Feb 2021 06:35 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आईआईटी के वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन गैस का प्रयोग ईंधन के तौर पर करने की तकनीक विकसित की है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के तौर पर पानी का उपयोग कर हाइड्रोजन ईंधन अलग करने की यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है। आईआईटी कैंपस में ही हाइड्रोजन प्रोडक्शन पायलट प्लांट में ईंधन बनाकर तैयार किया गया है। इस तकनीक से मिला ईंधन न केवल सस्ता है, बल्कि ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन का प्रयोग पर्यावरण के अनुकूल भी है।
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आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग और फिजिक्स डिपार्टमेंट के वैज्ञानिकों की करीब 13 साल की मेहनत अब जाकर पूरी हुई है। वर्ष 2007 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था। टीम में प्रो. श्रीदेवी उपाध्यायुला, प्रो. अशोक एन भास्करवार, प्रो. अनुपम शुक्ला और प्रो. सास्वता भट्टाचार्य समेत छात्र भी शामिल हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवाश्म ईंधन के विकल्प के तौर पर हाइड्रोजन गैस का प्रयोग उत्सर्जन को कम करने में मददगार साबित होगा। ऐसे में आने वाले समय में हाइड्रोजन के बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक उत्पादन से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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सल्फर आयोडीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन तकनीक का प्रयोग
वैज्ञानिकों ने इसमें सल्फर आयोडीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन तकनीक का प्रयोग किया है। आमतौर पर पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अलग करने के लिए 2000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की जरूरत होती है। हालांकि यहां पर सल्फर आयोडीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन प्रोसेस का प्रयोग किया गया है। इसमें आयोडीन और सल्फर का इस्तेमाल कर पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में लगभग 150 डिग्री सेल्सियस पर अलग करते हैं। यही नहीं आयोडीन और सल्फर को रिसाइकल भी किया जा सकेगा। ऐसे में अब एक उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में गाड़ी पेट्रोल-डीजल नहीं, बल्कि पानी से चलेगी और ये बेहद सस्ता भी होगा।
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तकनीक में कुल नौ चरण, छह में कामयाबी मिली
वैज्ञानिकों की टीम के मुताबिक, इस तकनीक में कुल नौ चरण होंगे। इसमें से छह चरणों में कामयाबी मिल चुकी है। वैज्ञानिकों ने लैब में हाइड्रोजन ईंधन बनाने के बाद उसका टेस्ट भी कर लिया है।
भविष्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी
दुनियाभर में ईंधन की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके साथ ही ग्रीन हाउस गैसों का विसर्जन भी बढ़ा है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि वैकल्पिक ईंधन के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए, जोकि सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल हो। हाइड्रोजन ईंधन सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल है। ये पेट्रोलियम ईंधन का बेहतर विकल्प साबित होगा। इससे ग्रीन हाउस गैस कम रिलीज होगी। एलपीजी सिलिंडर की तरह हाइड्रोजन ईंधन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भविष्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकेंगी। इसमें ओएनजीसी एनर्जी सेंटर की ओर से आर्थिक सहयोग मिला है। कुल मिलाकर यह फ्यूचर फ्यूल है।
-वैज्ञानिक व प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्यायुला