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Hindi News ›   Delhi ›   Husband has no right to forcibly have sex with his wife

बीच बहस : अदालत में न्याय मित्र की दलील- पति को पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाने का अधिकार नहीं

Sat, 22 Jan 2022 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 22 Jan 2022 06:14 AM IST
सार

अदालत ने कहा- जबरन संबंध को अपराध की श्रेणी में लाना जरूरी।

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Husband has no right to forcibly have sex with his wife
demo pic... - फोटो : Social Media

विस्तार

विवाह के मामले में दोनों पक्षों में वैवाहिक संबंधों की अपेक्षाएं हो सकती हैं, लेकिन ऐसी अपेक्षा का परिणाम पति द्वारा पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध बनाने का अधिकार नहीं है। जबरन संबंध को अपराध की श्रेणी में लाना जरूरी है। अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा।

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न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष न्याय मित्र रेबेका जॉन ने कहा उम्मीद गलत नहीं है। दोनों पक्षों की अपेक्षाएं हो सकती हैं। हालांकि, उम्मीद का नतीजा यह नहीं हो सकता है कि पति पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाए।
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पीठ ने बृहस्पतिवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी। यह धारा दुष्कर्म के अपराध से एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध बनाने से छूट देती है। अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि विवाह में यौन संबंधों की अपेक्षा से पति अपनी पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध नहीं बना सकता है। उन्होंने कहा यह उम्मीद के बारे में नहीं है। यह उस व्यक्ति के बारे में है जो अपनी पत्नी पर अपने अधिकार का प्रयोग करता है।
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न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा कि विवाहित पक्षों और अविवाहित पक्षों के बीच मौजूद यौन समीकरण के बीच गुणात्मक अंतर है। उन्होंने कहा कि जहां विवाहित पक्षों को यौन संबंधों की अपेक्षा करने का अधिकार हो सकता है। वहीं, अविवाहित पक्षकारों के साथ ऐसा कोई अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति शंकर ने कहा कि इस तरह के अधिकार को देखते हुए यदि विधायिका ने उन दो स्थितियों की बराबरी नहीं करने का फैसला किया, जिनके भीतर पार्टियों को रखा गया है। ऐसे में क्या न्यायालय अपवाद 2 की संवैधानिकता की जांच कर सकता है कि ऐसा कोई अंतर नहीं है। इस पर जॉन ने जवाब दिया उम्मीद गलत नहीं है।


दंपती को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश
उच्च न्यायालय ने अंतर धार्मिक विवाह करने वाले दंपती को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को युवती को उसके पति को सौंपने व सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश पति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी को उसके माता-पिता ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। 

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