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होली 2022: भद्रा का साया हटते ही दिल्ली में हुआ होलिका दहन, दिन भर राजधानी के अलग-अलग इलाकों में हुआ पूजन
Thu, 17 Mar 2022 10:18 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 17 Mar 2022 10:18 PM IST
सार
दिल्ली के कई इलाकों में शाम होते ही होलिका दहन हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां पर प्रदोषकाल की परंपरा रही है वहां होलिका दहन शाम छह बजकर 33 मिनट से शाम छह बजकर 45 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ समय था। ऐसे में कई परिवारों ने इस समय को बेहतर मानते हुए होलिका दहन किया है।
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दिल्ली में होलिका दहन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भद्रा काल का साया हटते ही दिल्ली के लोगों ने बृहस्पतिवार रात होलिका दहन किया। उससे पहले दिन में राजधानी के अलग अलग इलाकों में होलिका पूजन होता दिखाई दिया। घर से रोली, चावल, गुजिया और जल के साथ होलिका तक पहुंचीं महिलाओं ने पहले पूजन किया और फिर भोग इत्यादि लगाने के बाद अपने घर पर जाकर पकवान इत्यादि बनाए।
रात में भद्रा काल समाप्त होने के बाद राजधानी में होलिका दहन शुरू हुआ। पूर्वी से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिणी जिलों में होलिका दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगकर होली पर्व की बधाईयां दी। शुक्रवार को होली के साथ साथ राजधानी में शब-ए-बारात भी है। यह संयोग सालों बाद कभी-कभार ही देखने को मिलता है। इसलिए दिल्ली पुलिस ने भी होली और शब-ए-बारात पर हुड़दंग न मचाते हुए लोगों से शांति-सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।
बीते दो वर्षों से होली पर्व के बाद ही कोरोना के मामले बढ़े हैं। ऐसे में सरकार ने लोगों से अपील की है कि कोरोना के मामले नियंत्रण में आने के बाद भी लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी है। बाजारों में भीड़ से दूरी बनाए रखना है। साथ ही घरों में रहकर होली पर्व मनाया जाए। ताकि हर किसी का संक्रमण से बचाव हो सके। इसके अलावा मौसम में बदलाव भी लोगों को बीमार कर सकता है।
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडलिस्ट और दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी पंडित अंबरीष कुमार शास्त्री ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर एक बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हुई। यह शुक्रवार दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में पूर्णिमा होने से होलिका पर्व मनाया जाता है लेकिन इस बार भद्रा काल भी है।
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रात में भद्रा काल समाप्त होने के बाद राजधानी में होलिका दहन शुरू हुआ। पूर्वी से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिणी जिलों में होलिका दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगकर होली पर्व की बधाईयां दी। शुक्रवार को होली के साथ साथ राजधानी में शब-ए-बारात भी है। यह संयोग सालों बाद कभी-कभार ही देखने को मिलता है। इसलिए दिल्ली पुलिस ने भी होली और शब-ए-बारात पर हुड़दंग न मचाते हुए लोगों से शांति-सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।
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बीते दो वर्षों से होली पर्व के बाद ही कोरोना के मामले बढ़े हैं। ऐसे में सरकार ने लोगों से अपील की है कि कोरोना के मामले नियंत्रण में आने के बाद भी लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी है। बाजारों में भीड़ से दूरी बनाए रखना है। साथ ही घरों में रहकर होली पर्व मनाया जाए। ताकि हर किसी का संक्रमण से बचाव हो सके। इसके अलावा मौसम में बदलाव भी लोगों को बीमार कर सकता है।
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडलिस्ट और दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी पंडित अंबरीष कुमार शास्त्री ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर एक बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हुई। यह शुक्रवार दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में पूर्णिमा होने से होलिका पर्व मनाया जाता है लेकिन इस बार भद्रा काल भी है।
आमतौर पर होली और भद्रा काल का संयोग काफी दुर्लभ होता है लेकिन इस बार भद्रा काल दोपहर एक बजकर 30 मिनट से मध्य रात्रि एक बजकर 13 मिनट तक था। धर्म सिन्धु के अनुसार होलिका दहन को भद्रा में टालकर किया जाता है लेकिन भद्रा का समय यदि निशीथकाल के बाद चला जाता है तो होलिका दहन (भद्रा के मुख को छोड़कर) भद्रा पुच्छकाल या प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ बताया गया है। इसलिए होलिका दहन रात्रि नौ बजकर दो मिनट से 10 बजकर 14 मिनट के बीच राजधानी के अलग अलग इलाकों में किया गया।
कहीं दिन छिपते ही हुआ होलिका दहन
शास्त्री के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में शाम होते ही होलिका दहन हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां पर प्रदोषकाल की परंपरा रही है वहां होलिका दहन शाम छह बजकर 33 मिनट से शाम छह बजकर 45 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ समय था। ऐसे में कई परिवारों ने इस समय को बेहतर मानते हुए होलिका दहन किया है।
होली और शब-ए-बारात पर होता है हुड़दंग
दिल्ली में हर साल होली और शब-ए-बारात दोनों पर हुड़दंग की घटनाएं सामने आती हैं। इस बार यह दोनों एक ही दिन होने वाले हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन भी काफी सचेत है और लोगों से शांति और आपसी भाईचारे की अपील करते हुए घर में रहकर त्योहार मनाने की सलाह दे रही है। साथ ही इबादत के लिए भी पूरी रात घर से बाहर नहीं रहने की अपील की जा रही है। इबादत के त्योहार को शांतिपूर्वक ढंग से बनाएं, सड़कों पर निकलकर स्टंटबाजी ना करें।
कहीं दिन छिपते ही हुआ होलिका दहन
शास्त्री के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में शाम होते ही होलिका दहन हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां पर प्रदोषकाल की परंपरा रही है वहां होलिका दहन शाम छह बजकर 33 मिनट से शाम छह बजकर 45 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ समय था। ऐसे में कई परिवारों ने इस समय को बेहतर मानते हुए होलिका दहन किया है।
होली और शब-ए-बारात पर होता है हुड़दंग
दिल्ली में हर साल होली और शब-ए-बारात दोनों पर हुड़दंग की घटनाएं सामने आती हैं। इस बार यह दोनों एक ही दिन होने वाले हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन भी काफी सचेत है और लोगों से शांति और आपसी भाईचारे की अपील करते हुए घर में रहकर त्योहार मनाने की सलाह दे रही है। साथ ही इबादत के लिए भी पूरी रात घर से बाहर नहीं रहने की अपील की जा रही है। इबादत के त्योहार को शांतिपूर्वक ढंग से बनाएं, सड़कों पर निकलकर स्टंटबाजी ना करें।