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हिंदी दिवस : तकनीक के पंखों से भरी नई उड़ान, जानकार बोले- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का होगा जमाना
Wed, 14 Sep 2022 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 14 Sep 2022 06:11 AM IST
सार
Hindi Divas: हिंदी में बोले गए शब्द आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा रहे हैं। इसका माध्यम बनी है तकनीक, जिसके पंखों पर सवार होकर हिंदी ने नई उड़ान भरी है। मजेदार बात ये है कि इसके लिए संगठित तौर पर किसी ने कोई संजीदा कोशिश भी नहीं की। हिंदी के बड़े बाजार को देखते हुए तकनीक ने अपने को अपग्रेड किया है।
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विस्तार
आप बेशक पढ़ना-लिखना नहीं जानते हों, आपकी अंग्रेजी अच्छी हो या खराब, बोलचाल की हिंदी से आप अपनी आवाज पूरी दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। हिंदी में बोले गए शब्द आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा रहे हैं। इसका माध्यम बनी है तकनीक, जिसके पंखों पर सवार होकर हिंदी ने नई उड़ान भरी है। मजेदार बात ये है कि इसके लिए संगठित तौर पर किसी ने कोई संजीदा कोशिश भी नहीं की। हिंदी के बड़े बाजार को देखते हुए तकनीक ने अपने को अपग्रेड किया है।
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इसका फायदा सेवा प्रदाताओं के साथ उपभोक्ताओं को भी मिला है, तभी लिखना न जानते हुए भी बोलकर हिंदीभाषी अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) से संवाद के लिए जरूरी तमाम सुविधाओं के एकीकरण ने हिंदी की राह में भाषाई अड़चनों को दूर कर दिया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जमाना हिंदी का होगा। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के निदेशक (भारतीय भाषाएं एवं सुगम्यता) बालेंदु शर्मा दाधीच का कहना है कि हिंदी के इस्तेमाल के प्रोत्साहन में पहली क्रांति यूनीकोड से आई। वर्ष 2000 में विंडोज और एक्सपी से भारत में इस दिशा में कदम आगे बढ़े। इससे अंग्रेजी का प्रभुत्व कम होने लगा और जिनके लिए हिंदी में काम करना मुश्किल था उनके लिए कीबोर्ड और अलग-अलग फॉन्ट का भी पदार्पण हुआ। इससे अंग्रेजी में लिखकर हिंदी में अपनी बातों को रखने का मौका मिला। हिंदी के लिए एनकोडिंग के जरिये यूनीकोड ने ऐसे नियम पेश किए, जिससे काम करना सुलभ हो गया।
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यूनीकोड के बाद टाइपिंग और टेक्सट के लिए इन स्क्रिप्ट लागू किया गया। बाद में कई और कंपनियों ने इसे लागू किया। हिंदी न सीख पाने वालों के लिए अंग्रेजी में टाइप करने की सुविधा नई प्रणाली (ट्रांसलिटरेशन) से लिपि को बदलने की सुविधा मुहैया की गई। कंपनी ने इसके बाद इंडिक-1, 2, 3 सहित कई और टूल्स को पेश किया। इससे कंप्यूटर और स्मार्ट फोन के जरिये 12 भारतीय भाषाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने हिंदी को आम लोगों के जीवन के साथ जोड़ दिया है। इससे छोटी और बड़ी कई जरूरतें बेहद कम वक्त में पूरी की जा सकती हैं।
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का होगा जमाना
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी डैक) में आर्टिफिशियल इंटेिलजेंस के प्रमुख अजय कुमार के मुताबिक, पहले भी ई-औषधि, ई-पासपोर्ट, निर्वाचन आयोग सहित कई विभागों और दफ्तरों में हिंदी के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जमाना होगा। कंठस्थ को सी डैक ने विकसित किया है। इससे अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद करने की सुविधा है। सी डैक के हिंदी कार्यान्वयन अधिकारी प्रभाकर पांडेय का कहना है कि श्रुतलेखन सहित कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। अब ई-मेल एड्रेस और वेबसाइट भी हिंदी में बनाई जा रही हैं ताकि हिंदी को अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
ई-कॉमर्स के जरिये खरीदारी हुई आसान
कौटिल्य फेलोशिप नेटवर्क के संस्थापक अजय चतुर्वेदी का कहना है कि तकनीक की बदौलत हिंदी की पहुुंच बढ़ी है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, देश में करीब 54 फीसदी लोग हिंदी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में तकनीकी सुविधाओं के विकास से हिंदी की पहुंच के साथ-साथ स्वीकार्यता भी बढ़ी है। किचन के लिए महिलाएं अगर कुछ खरीदारी करती हैं तो उन्हें रिटेल स्टोर तक जाने की जरूरत नहीं है।
महज हिंदी में बोलकर राशन के जरूरी सामान के लिए ऑर्डर कर सकती हैं। महज चंद मिनटों के अंदर उन्हें घर पर सभी उत्पादों की डिलीवरी कर दी जाएगी। भाषाई बाधा के दूर होने से खरीदार और विक्रेताओं के लिए भी सहूलियतें बढ़ीं। देश-विदेश के किसी शहर में अपनों से बातचीत हो या हिंदी का इस्तेमाल बेहद आसान हो गया है।