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दिल्ली: हाईकोर्ट ने यातायात उल्लंघन की निगरानी के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढांचे की मांग संबंधी याचिका पर मांगा जवाब

Tue, 21 Dec 2021 09:00 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Tue, 21 Dec 2021 09:00 PM IST
सार

सोनाली करवासरा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019 के कुशल कार्यान्वयन में कई खामियां हैं।

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High Court seeks response on plea seeking adequate technical infrastructure to monitor traffic violations
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत यातायात उल्लंघन की निगरानी के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढांचे की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार के अलावा सड़क परिवहन मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 मार्च 2022 तय की है। सोनाली करवासरा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019 के कुशल कार्यान्वयन में कई खामियां हैं, जिससे यातायात उल्लंघन का पता लगाने के लिए अधिकारियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पुरानी तकनीकों के कारण यातायात उल्लंघन होने पर आम जनता पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।
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व्यक्तिगत रूप से पेश याचिकाकर्ता ने कहा वे अधिनियम को लागू किए जाने और इसके बारे में लाए गए परिवर्तनों के लिए तैयार हैं, लेकिन अधिनियम के तहत भारी जुर्माना लगाया जाता है, इसलिए तकनीक को उस स्तर तक अपग्रेट करने की आवश्यकता है। अन्यथा लोग ठगा हुआ महसूस करते हैं।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि यातायात नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिए बुनियादी ढांचा और देश में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक का मानकीकरण नहीं किया गया। इसके कारण कई उदाहरण सामने आए हैं। इसमें दोषपूर्ण उपकरण और तकनीक के कारण यातायात पुलिस द्वारा निर्दोषों पर भारी जुर्माना जारी किया गया। याचिका के अनुसार स्पीड लिमिट के उल्लंघन का पता लगाने वाली तकनीक, नशे में गाड़ी चलाने वाली सांस विश्लेषण तकनीक और रेड-लाइट उल्लंघन तकनीक बदलते समय के अनुसार नहीं हैं, जो पहले से उपयोग में हैं और किसी भी मानक की कमी से ग्रस्त हैं। इसके बजाय भारत में यातायात के लिए अपग्रेड तकनीक की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता ने एक घटना का उल्लेख किया, जहां एक व्यक्ति को एक लाल बत्ती जंप करने के लिए चार बार चालान किया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा यह गलत है कि एक कार पांच सेकंड के भीतर एक लाल बत्ती को चार बार पार कर सकती है। हालांकि, इस चालान के लिए उक्त व्यक्ति के पास चालान का भुगतान करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि इसे अदालत में चुनौती देने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा, यह तर्क दिया जाता है कि मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019 के कुशल कार्यान्वयन के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप यातायात उल्लंघनों की निगरानी में उपयोग की जाने वाली तकनीक के मानकीकरण और उचित दिशानिर्देशों और नियमों को सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

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