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Hindi News ›   Delhi ›   high court says Living as husband and wife is not the basis of agreement in the rape case

हाईकोर्ट ने कहा- पति-पत्नी के रूप में रहना दुष्कर्म मामले में समझौते पर आधार नहीं

Wed, 03 Feb 2021 08:10 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 03 Feb 2021 08:10 AM IST
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high court says Living as husband and wife is not the basis of agreement in the rape case
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप में समझौते को इस आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वे पति-पत्नी के रूप में रहने लगे है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए दुष्कर्म के मामले में समझौते के तर्क को खारिज कर दिया। 
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अदालत ने कहा कि ऐसा करने से समाज पर गलत संदेश जाएगा। सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने पीड़िता से शिवा बन कर दोस्ती की और विवाह का झांसा देकर पांच वर्ष तक उससे शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसने आर्य समाज मंदिर के नाम से फर्जी तरीके से विवाह प्रमाणपत्र बनाया व उसमें अपना नाम अख्तर लिखवाया। 
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अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उसके पास शिवा और अख्तर के नाम से दो आधार कार्ड है जिनमें से एक फर्जी है। इसके अलावा पीड़िता ने अदालत के समक्ष धारा 164 के बयानों में अपनी शिकायत का समर्थन किया है।
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अदालत ने कहा कि यह दिवानी मामला या पति-पत्नी के बीच विवाद का मामला नहीं है। बलात्कार और जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों का  असर समाज पर पड़ता है। इन अपराधों को केवल निजी या दीवानी विवाद नहीं माना जा सकता बल्कि इसका प्रभाव समाज पर पड़ेगा। 

अदालत ने कहा  जो अपराध समाज की भलाई को गंभीर रूप से खतरे में डालते हैं ऐसे अपराधी  को इस आधार पर छोड़ना सुरक्षित नहीं है कि उसने और पीड़ित ने इस विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाया है।

यह मामला प्रेम नगर थाना क्षेत्र क है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी अख्तर के खिलाफ धारा 419, 467, 471, 474, 376, 354 व 506 के तहत मामला दर्ज किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने विवाह के नाम पर शारीरिक संबंध बनाए फिर फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए विवाह किया दर्शाया और उसके बाद पैसे मांगने लगा।

पीड़िता व आरोपी ने याचिका दायर कर तर्क रखा कि अब दोनों में समझोता हो गया है और वे पति-पत्नी के रूप में रह गए है। ऐसे में दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाए।
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