{"_id":"611861538ebc3edfb875b42e","slug":"high-court-said-it-is-the-responsibility-of-the-trial-court-to-give-compensation-in-cases-of-sexual-abuse-of-girls","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कहा- बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में मुआवजा देना ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कहा- बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में मुआवजा देना ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी
Sun, 15 Aug 2021 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विजय सिंघल, नई दिल्ली
विजय सिंघल, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 15 Aug 2021 06:05 AM IST
सार
- कहा ट्रायल कोर्ट की डयूटी कि वह पीड़ितो को दे तय स्कीम के तहत मुआवजा
- परिवार के लापता होने का तर्क खारिज, पुलिस को पीड़ित परिवार का पता लगाने का निर्देश
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
हाईकोर्ट ने बच्चियों के यौन शोषण व अन्य दुष्कर्म मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मुआवजा न देने संबंधी ट्रायल कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की कई पीड़ित मुआवजा स्कीम है लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा। अदालत ने सभी अदालत को हर परिस्थितियों में विचार कर उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
अदालत दुष्कर्म के दो मामलों में संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने एक मामला में पीड़ित बच्ची व उसके परिवार का पता लगाकर उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि परिवार का पता नहीं चल पा रहा।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने एक महिला से दुष्कर्म मामले में आरोपी रणजीत नायक की अपील को खारिज करते हुए पाया कि संबंधित अदालत ने पीड़िता को मुआवजा प्रदान करने के लिए आदेश नहीं दिया। आरोपी को अदालत ने 10 वर्ष कैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति ओहरी ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय व नालसा द्वारा तय दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट की हर ऐसे मामले में डयूटी है कि वह तय स्कीम के तहत पीड़िता व उसके परिवार के पुनर्वास के लिए उचित मुआवजा प्रदान करे। इस मामले में तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट अपनी डयूटी में फेल रही है। उन्होंने यौन शोषण मामलों में दिल्ली पीड़िता मुआवजा स्कीम 2018 के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए। अदालत ने दिल्ली राज्य लीगल सर्विस अथारिटी को चार सप्ताह में उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के यौन शोषण मामले में आरोपी राकेश उर्फ दीवान की अपील खारिज करते हुए उसे मिली आजीवन कारावास की सजा को बहाल रखा है। अदालत ने इस मामले में भी पाया कि बच्ची व उसके परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला। अदालत ने पाया कि पुलिस ने तर्क रखा कि बच्ची व उसका परिवार किसी अन्य स्थान पर चला गया है ऐसे में मुआवजा नहीं दिया जा सका।
उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए डीएलएसए की जिम्मेदारी है कि तय नियमों का पालन करते हुए पीड़ित को मुआवजा प्रदान करे।
अदालत ने मामले के जांच अधिकारी व संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे हर हाल में पीड़िता व उसके परिवार का पता लगाए। अदालत ने दिल्ली राज्य लीगल सर्विस अथारिटी को पीड़ित परिवार को तय स्कीम के तहत मुआवजा प्रदान करे।