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छह वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक कृत्य मामले में महिला प्रोफेसर को अग्रिम जमानत

Wed, 04 Aug 2021 12:19 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:19 AM IST
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high court grants anticipatory bail to woman professor accused POCSO
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने छह वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक कृत्य व पोक्सो अधिनियम तहत आरोपी एवं राजधानी के एक कॉलेज में सहायक महिला प्रोफेसर को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। यह एक दुर्लभ मामला है जिसमें अप्राकृतिक कृत्य में महिला को आरोपी बनाया गया है।
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न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी महिला पुलिस की जांच में शामिल हुई और वह एक कामकाजी महिला है। इसके अलावा उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं किया जाना है। ऐसे में हिरासत लेकर में पूछताछ की जरूरत नहीं है। वहीं सह आरोपी को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है।
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अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि बच्चे को आई चोट संबंधी चिकित्सा दस्तावेज सही नहीं हैं। कई दस्तावेज शिकायतकर्ता के केस का समर्थन नहीं करते और उनमें कई शब्द जोड़े गए हैं। अदालत ने शिकायतकर्ता को भविष्य में इस तरह का कार्य न करने की चेतावनी दी है।
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अदालत ने आरोपी महिला प्रोफेसर की अग्रिम जमानत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह पीड़ित बच्चे के घर के तीन किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगी। इसके अलावा न तो वह बच्चे से संपर्क करेंगी व ही उससे स्कूल या केयर सेंटर में मिलने का प्रयास करेगी। इसके अलावा अदालत की इजाजत बिना देेश से बाहर नहीं जाएगी।
बच्चे की मां की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कई मौकों पर उसके बच्चे का यौन उत्पीड़न किया था। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके अलग रह रहे डीयू के प्रोफेसर पति का आरोपी महिला के साथ अफेयर चल रहा था, जो बार-बार उसके घर जाती थी और उसके पति के सामने बच्चे के साथ दुर्व्यवहार करती थी।
जांच के दौरान बच्चे की चिकित्सकीय जांच की गई थी और मजिस्ट्रेट के समक्ष भी बयान दर्ज करवाए गए जहां उसने शिकायत की पुष्टि की थी। शिकायत के अनुसार यह सिलसिला तीन वर्ष से चल रहा था। वहीं याची की ओर से पेश अधिवक्ता ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता महिला का अपने पति से झगड़ा चल रहा है। पति ने वर्ष 2019 में तलाक की याचिका दायर कर रखी है।
उन्होंने कहा महिला ने मात्र आपसी दुश्मनी के चलते अपने नाबालिग बेटे को मोहरा बनाकर फर्जी प्राथमिकी दर्ज करवा दी। इसके अलावा उसने कभी भी मेडिकल के मूल दस्तावेज पेश नहीं किए और फर्जी बनवाए हैं। उन्होंने कहा महिला को मात्र संदेह है कि उनकी मुवक्किला व उनके पति के बीच प्रेम संबंध है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी महिला पर गंभीर आरोप है और वह साक्ष्यों को नष्ट करने के अलावा साक्ष्यों से छेड़छाड़ व पीड़ित को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा वह जांच में भी सहयोग नहीं कर रही।
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