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अंकों के मूल्यांकन के लिए तैयार फार्मूला सार्वजनिक करने की मांग खारिज

Wed, 30 Jun 2021 11:04 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jun 2021 11:04 PM IST
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high court dismisses petition seeking disclosure of formula of marking
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों को दसवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के लिए तैयार किए गए अंकों के फार्मूले को सार्वजनिक करने और वेबसाइट पर डालने की मांग को लेकर दायर याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने रिजल्ट आने से कुछ समय पहले कोर्ट आने पर याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि परिणामों पर इस समय पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
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न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की अवकाशकालीन पीठ ने याचिका को पब्लिसिटी स्टंट करार देते हुए कहा कि आपको व्यवसायिक याचिकाकर्ता की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए था। याचिका ने अदालत से अंकों को निर्धारित करने का फार्मूला सार्वजनिक करने व स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर डालने की मांग की थी।
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पीठ ने कहा कि इस मामले में दायर आपकी याचिका लंबित है और अदालत ने याचिका पर अगस्त माह में सुनवाई तय की है। आपको पता था कि रिजल्ट पहले आना है लेकिन अंतरिम स्थगन के लिए एक आवेदन दायर नहीं किया। अब आप अवकाश के दौरान एक मौका लेने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आप आखिरी समय में आएंगे और सब कुछ रुक जाएगा। आप इसे मौके के खेल के रूप में ले रहे हैं। मुकदमेबाजी मौके का खेल नहीं है। अदालत ने कहा मामलों का फैसला पक्षकारों को सुनने के बाद किया जाता है।
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अदालत ने कहा यदि आपको लगता है कि किसी मामले में बुरा परिणाम है, तो आप विशेष उदाहरण के साथ अदालत आ सकते हैं। मात्र आशंका के आधार पर पूरे सिस्टम को नहीं रोका जा सकता।
खंडपीठ ने कहा कि आपने जनहित याचिका दायर की है आप साधारण वादी की तरह व्यवहार न करें, आपको अपना स्तर उठाना होगा। यदि आप जनहित का आह्वान कर रहे हैं तो आपको बहुत उच्च स्तर बनाए रखना होगा।
पीठ के रवैये को देखते हुए गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की ओर से पेश अधिवक्ता खगेश झा ने याचिका को वापस लेने की इजाजत मांगी जिसे पीठ ने स्वीकार कर उसे वापस ली हुई मानते हुए खारिज कर दिया।
याची ने आग्रह किया था कि रिजल्ट निकाले जाने से पहले ही अगर अंक निर्धारण से संबंधित दस्तावेज एवं नीति को सार्वजनिक कर दिया जाता है तो सभी छात्र अपने अंक निर्धारण के तरीके को समझ सकेंगे और अपनी शिकायत को लेकर संबंधित अधिकारी के पास जा सकेंगे। इससेेेे अंक निर्धारण में पारदर्शिता भी आएगी।
याचिका में कहा गया कि अंकों का निर्धारण करने के लिए बोर्ड द्वारा नीति इस तरह से बनाई गई है कि सीबीएसई पिछले तीन वर्षों से स्कूल के प्रदर्शन को आधार बनाएगी न कि छात्रों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को।
इससे पहले उन्होंने दसवीं बोर्ड के मूल्यांकन का नीति को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने अंक निर्धारण का जिम्मा स्कूलों पर छोड़ दिया है। बोर्ड भी छात्रों का मूल्यांकन नहीं कर स्कूलों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इससे आर्थिक एवं सामाजिक स्तर के छात्रों के साथ भेदभाव होता है। यह सब स्कूलों के मनमानी पर छोड़ दिया है। उसकी शिकायत निवारण नीति भी त्रुटि पूर्ण है।
याचिका में तर्क रखा गया है कि पिछली कक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर कक्षा 10 के छात्र के अंकों का आकलन करने की सीबीएसई नीति असंवैधानिक और भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए), 21 और 21 ए के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

कोविड-19 के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल को 10वीं कक्षा की होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। तय किया गया था कि सीबीएसई द्वारा विकसित किए जाने वाले वस्तुनिष्ठ मापदंड के आधार पर परिणाम तैयार किए जाएंगे।
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