{"_id":"6108fee76486f90cc171ddbc","slug":"high-court-dismisses-a-pil-seeking-direction-to-stop-the-use-of-evm-imposed-fine-10000-rupees-on-petitioner","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली 'प्रचार हित याचिका' खारिज, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 10 हजार का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली 'प्रचार हित याचिका' खारिज, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 10 हजार का जुर्माना
Tue, 03 Aug 2021 02:01 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 03 Aug 2021 02:01 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि वकील सीआर जया सुकिन की याचिका प्रचार हित याचिका (पीआईएल) है, जो अफवाहों और निराधार आरोपों एवं अनुमानों पर आधारित है।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल बंद करने और देश में आगामी चुनावों में फिर से मत पत्रों (बैलट पेपर) का प्रयोग करने का निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को प्रचार पाने के लिए दायर बताते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि वकील सीआर जया सुकिन की याचिका प्रचार हित याचिका (पीआईएल) है, जो अफवाहों और निराधार आरोपों एवं अनुमानों पर आधारित है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता ने ईवीएम के कामकाज पर ठोस रूप से कुछ भी तर्क नहीं दिये। ऐसे में हमें याचिका पर सुनवाई करने का कोई कारण नहीं दिखता।
विज्ञापन
पीठ ने कहा याचिका चार दस्तावेजों पर आधारित थी, जिनमें से एक कोई खबर थी और अन्य उच्चतम न्यायालय के समक्ष उसके ज्ञापन एवं याचिका से संबंधित थे। याची को खुद ईवीएम के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता ने खबर पढ़ी और ईवीएम और उसके काम-काज को देखे बिना याचिका दाखिल कर दी। जबकि इसे निर्वाचन आयोग के साथ-साथ संसद की भी स्वीकृति प्राप्त है।
विज्ञापन
फिलहाल अदालत ने याची को पूरे मुद्दे पर शोध करने और उचित तर्कों के साथ नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी, लेकिन बिना कोई ठोस आधार पर तर्को के याचिका दायर करने पर उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया। अदालत ने याची को जुर्माने की राशि चार सप्ताह में दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास जमा करवाने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि देश की कई अदालतें पहले ही इस पर गौर कर चुकी हैं और मुद्दे पर फैसला दे चुकी हैं। अभी तक ईवीएम के खिलाफ किसी भी अदालत ने आदेश नहीं दिया है। ऐसे में याचिका खारिज कर याची पर जुर्माना लगाया जाय।