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बेघर हुए लोगों के रहने की तत्काल व्यवस्था करने का निर्देश

Mon, 07 Jun 2021 11:49 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 11:49 PM IST
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high court directs to arrange make shift stays for affected by demolition
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को धोबी घाट के पास बनी झुग्गियां तोड़े जाने से बेघर हुए परिवारों के ठहरने के लिए समुचित प्रबंध करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा है कि करीब दो दशक से इन झुग्गियों में रहने का दावा करने वाले लोगों को महामारी के दौरान सड़क पर तिरपाल के नीचे रहने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है।
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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बेघर हुए परिवारों के लिए रहने, खाने और अन्य मौलिक सुविधाओं की तत्काल प्रबंध करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भले ही अभी यह तय होना बाकी है कि डीडीए की नीतियों के तहत याचिकाकर्ता संगठन के सदस्यों का पुनर्वास किया जाना है या नहीं। बावजूद इसके उनको सड़कों पर जीवन व्यतीत करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।
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अदालत ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को बेघर हुए सभी परिवारों के रहने-खाने व अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुविधाओं पर आने वाले खर्च की भरपाई बाद में डीडीए करेगा। उन्होंने धोबी घाट झुग्गी अधिकार मंच की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जुलाई तय की है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रभावित लोग करीब दो दशक से यहां रह रहे हैं, लेकिन महामारी के दौरान डीडीए ने उनकी झुग्गियां हटा दीं। उन्होंने कहा सभी बेघर होकर किसी तरह सड़क पर तिरपाल का टेंट लगाकर जीवन जीने को मजबूर हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान डीडीए ने याचिकाकर्ता के पुनर्वास से इनकार करते हुए कहा कि डीडीए की नीति के तहत सिर्फ उन लोगों का पुनर्वास किया जा सकता है जो जनवरी 2006 से पहले झुग्गियां बनाकर रह रहे थे। याचिकाकर्ता संगठन के एक सभी सदस्य संबंधित जमीन पर जनवरी 2006 के बाद से रह रहे हैं।

वहीं याचिकाकर्ता ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की 2015 की पुनर्वास नीति का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी 2015 से पहले राजधानी में कहीं भी झुग्गियां बनाकर रह रहे लोगों को पुनर्वास किए बगैर नहीं हटाया जा सकता।
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