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चांदनी चौक से लटकी तारें हटाने का एजेंसियों व कंपनियों को निर्देश

Wed, 13 Jan 2021 12:05 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2021 12:05 AM IST
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high court direct agencies and mobile service provider to remove hanging cables
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने नार्थ एमसीडी, एमटीएनएल, बीएसईएस व मोबाइल प्रदाता कंपनियों को चांदनी चौक के पुनर्विकास में बाधा बनी लटक रही सभी तारों व केबल को हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मुद्दे पर पहले से जारी आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जताई है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि उनके आदेश का पालन नहीं किया गया तो सभी के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने नार्थ एमसीडी, एमटीएनएल, बीएसईएस व मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इलाके में लटक रही तारों व केबल को तुरंत हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।
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अदालत ने नियुक्त नोडल अधिकारी की ओर से पेश वकील के तर्क सुनने के बाद यह आदेश दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि इलाके का निरीक्षण करने के बाद पाया गया कि एमटीएनएल योजना के पूरा करने में सहयोग नहीं कर रहा। इस संबंध में बार-बार निर्देश के बावजूद भी फीडर खंभों को शिफ्ट किया जाना बाकी है।
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शाहजहांनाबाद पुनर्विकास निगम (एसआरडीसी) के मुख्य नोडल अधिकारी व नोडल अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता नौशाद अहमद खान ने बताया कि लटकते तारों और केबल को हटाना जरूरी है और तारों को हटाने के लिए विभिन्न एजेंसियों को निर्देश दिया जाए। अदालत ने इसके तर्क सुनने के बाद कहा कि यदि उन लटकते तारों को हटा दिया जाता है तो चांदनी चौक का आधा हिस्सा बिना बिजली के हो जाएगा।
अधिवक्ता खान ने अदालत को बताया कि ‘चांदनी चौक परियोजना का पुनर्विकास’ इस वर्ष के लिए दिल्ली के लिए गणतंत्र दिवस की झांकी का विषय हो सकता है और एजेंसियां समय सीमा का पालन नहीं कर रहीं। उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों साइड के फुटपाथों पर लटकते तार बिजली के नहीं बल्कि इंटरनेट केबल या डीटीएच केबल हैं।

नोडल अधिकारियों ने मोबाइल सेवा प्रदाताओं और केबल ऑपरेटरों द्वारा लटकते तारों को 7 जनवरी तक पूरे इलाके से हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उत्तरी एमसीडी और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों और सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के तहत अनाधिकृत निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था।
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