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सर्कस के जानवरों की स्थिति का पता लगाने का एडब्ल्यूबी को निर्देश
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सर्कस में रखे गए जानवरों की स्थिति पता लगाने के लिये एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण फौरन करने का निर्देश मंगलवार को पशु कल्याण बोर्ड को दिया। पीठ ने जानवरों को नजदीकी प्राणि उद्यानों में भेजे जाने पर भी विचार करने को कहा। कोविड-19 महामारी के दौरान सर्कस के दिवालिया हो जाने से जानवरों की हालत खराब होने को लेकर दायर याचिका पर पीठ ने यह निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबी) को सर्कस अधिकारियों से इस बारे में विशेष रूप से पूछताछ करनी चाहिए कि क्या वे जानवरों की देखभाल कर पाने की स्थिति में हैं या उनके पुनर्वास के लिए नजदीकी प्राणि उद्यान में भेजे जाने की जरूरत है।
पीठ ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया कि इस बारे में किए गए सर्वेक्षण की स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है। यह याचिका फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन की ओर से दायर की गई है।
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याचिका में जानवरों से निर्ममता की रोकथाम अधिनियम की धारा 21 और 27 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। ये धाराएं सर्कस से जुड़े कार्यों के लिये जानवरों को प्रदर्शित किए जाने और उनके प्रशिक्षण से संबद्ध हैं। पीठ ने इस पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के जरिए केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबी) को सर्कस अधिकारियों से इस बारे में विशेष रूप से पूछताछ करनी चाहिए कि क्या वे जानवरों की देखभाल कर पाने की स्थिति में हैं या उनके पुनर्वास के लिए नजदीकी प्राणि उद्यान में भेजे जाने की जरूरत है।
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पीठ ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया कि इस बारे में किए गए सर्वेक्षण की स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है। यह याचिका फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन की ओर से दायर की गई है।
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याचिका में जानवरों से निर्ममता की रोकथाम अधिनियम की धारा 21 और 27 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। ये धाराएं सर्कस से जुड़े कार्यों के लिये जानवरों को प्रदर्शित किए जाने और उनके प्रशिक्षण से संबद्ध हैं। पीठ ने इस पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के जरिए केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।