फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Heard of POCSO, but only 17% of people are fully aware of its provisions.

Delhi News: पॉक्सो का नाम सुना, प्रावधानों की पूरी जानकारी सिर्फ 17 फीसदी लोगों को

Wed, 07 Oct 2026 10:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 10:31 PM IST
विज्ञापन
Heard of POCSO, but only 17% of people are fully aware of its provisions.
-दुष्कर्म और गलत स्पर्श की जानकारी, लेकिन बिना छुए होने वाले यौन शोषण से अनजान ज्यादातर लोग
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पॉक्सो कानून का नाम भले ही अधिकांश लोगों ने सुन रखा हो, लेकिन इसके प्रावधानों की पूरी जानकारी महज 17 फीसदी लोगों को है। समाधान अभियान के एक अध्ययन में सामने आया है कि लोग दुष्कर्म और गलत स्पर्श जैसे मामलों को यौन शोषण के रूप में पहचान लेते हैं, लेकिन बिना शारीरिक संपर्क के होने वाले यौन शोषण को लेकर जागरूकता काफी कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जानकारी की यह कमी बच्चों को समय पर सुरक्षा और मदद मिलने में बाधा बन सकती है।

अध्ययन में पाया गया कि लोगों को पॉक्सो के तहत आने वाले चारों तरह के यौन अपराधों की पूरी जानकारी नहीं है। खासतौर पर बिना स्पर्श वाले यौन शोषण की पहचान को लेकर जागरूकता कमजोर रही। संस्था का कहना है कि ऐसे मामलों को समझने और पहचानने के लिए बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय को भी कानून की जानकारी देना जरूरी है।
विज्ञापन

बच्चों के व्यवहार में बदलाव को न करें नजरअंदाज
समाधान अभियान के अनुसार, छोटे बच्चे कई बार यह समझ नहीं पाते कि उनके साथ हो रहा व्यवहार गलत है। कई मामलों में आरोपी परिचित या भरोसे के दायरे का व्यक्ति भी हो सकता है। ऐसे में बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, किसी व्यक्ति से डरना, असामान्य चुप्पी या किसी जगह जाने से इनकार जैसे संकेतों पर संवेदनशीलता से ध्यान देना चाहिए। हालांकि, ये संकेत अपने आप में शोषण का प्रमाण नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

200 बच्चों के पुनर्वास में मदद
संस्था के मुताबिक, अब तक करीब 200 बच्चों के पुनर्वास और पॉक्सो मामलों में सहायता की गई है। बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग के साथ शिक्षा और चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई गई। उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में 360 डिग्री पुनर्वास सहायता के तहत छह बाल-अनुकूल केंद्र स्थापित किए गए हैं।

संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष अर्चना अग्निहोत्री ने कहा कि समुदाय स्तर पर लगातार जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। ‘चुप्पी तोड़; अब तो बोल’ अभियान के जरिए भी बाल यौन शोषण की रोकथाम और जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। डीसीपीसीआर अध्यक्ष ओम प्रकाश व्यास ने बाल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed