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सरकार ने यूट्यूबर को ब्लैक लिस्ट कर भारत आने से रोका, पत्नी ने दी चुनौती
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नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल एडवर्ड राइस की पत्नी यूट्यूब व्लॉगर मनीषा मलिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार द्वारा पति के भारत लौटने पर रोक लगाने व उन्हें ब्लैक लिस्ट करने के निर्णय को चुनौती दी है। याची मनीषा मलिक ने ब्लैक लिस्टिंग के आदेश को गैरकानूनी बताते हुए रद्द करने का आग्रह किया है।
आरोप है कि याची के पति को टूरिस्ट वीजा मिला था और वे भारत में बिजनेस करते हुए पाए गए। अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दायर याचिका उन्होंने अपने पति कार्ल एडवर्ड राइस को वीजा से वंचित करने व ब्लैक लिस्टिंग करने के निर्णय को अनुचित व मनमाना बताते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय के कारण उनके पति 10 सितंबर 2020 से न्यूजीलैंड से भारत नहीं लौट पाए हैं।
उन्होेंने कहा कार्ल 2013 से भारत आ रहे हैं और उनके खिलाफ वीजा उल्लंघन का एक भी मामला नहीं है।
याची ने जीवन व गरिमा के अधिकार का उल्लंघन
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसे अपने पति के साथ रहने से वंचित करके भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके जीवन और गरिमा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है। याचिका में कहा गया है कि राइस के पास न्यूजीलैंड और नीदरलैंड की दोहरी नागरिकता है। वे 2013 से भारत का दौरा कर रहे हैं और उन्होंने सभी कानूनों के साथ-साथ वीजा की शर्तों का सख्ती से पालन किया है।
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याची ने कहा उनसे शादी के बाद राइस को एक्स-2 वीजा दिया गया था, जो एक भारतीय नागरिक के विदेशी जीवनसाथी-बच्चों के लिए है और यह पांच मई 2024 को समाप्त होना है। एक्स-2 वीजा के लिए एक शर्त के अनुपालन के तहत याचिकाकर्ता के पति या पत्नी को हर 180 दिनों में भारत से बाहर जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा इसी शर्त के तहत उनके पति राइस संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को सूचित कर 10 सितंबर 2020 को भारत से चले गए। वह 10 अक्तूबर 2020 से भारत नहीं लौट पाए हैं क्योंकि वीजा के आवेदन को अथॉरिटी ने खारिज कर दिया।
बिना कारण बताए वीजा न देने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि वे वीजा के लिए भटक रहे हैं, न तो कार्ल एडवर्ड राइस या स्वयं याची को कोई कारण बताया गया है कि किस आधार पर उनके पति के वीजा जारी करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया है। याचिकाकर्ता के पति को केवल मौखिक रूप से सूचित किया कि उसे ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। इसलिए उसे भारत में आने की अनुमति नहीं है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि ब्लैक लिस्टिंग के आधार पर गैर-संचार, याचिकाकर्ता के साथ-साथ राइस के विभिन्न आवेदनों के जवाब में केंद्र व संबंधित अथॉरिटी ने निरंतर चुप्पी बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए एक विवाहिता को अलगाव में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें न तो नोटिस दिया गया न ही कभी पति को वीजा शर्तों के किसी भी उल्लंघन का संकेत दिया गया। ऐसे में बिना कारण पति को वीजा न देने का निर्णय शक्तियों का एक मनमाना दुरुपयोग है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 दोनों का उल्लंघन है।
गृह मंत्रालय ने रखा पक्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में शुक्रवार को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कार्ल राइस को वीजा नियमों व शर्तों के उल्लंघन करने पर अगले साल तक भारत में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। वह टूरिस्ट वीजा पर कारोबार करते तथा वीजा शर्तों के अन्य उल्लंघन करते पाए गए थे।
पत्नी ने की पक्ष रखने की मांग
याचिका में अदालत से वीजा रद्द करने और राइस को ब्लैक लिस्ट करने का निर्णय रद्द कर सरकार को राइस को भारतीय वीजा जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 16 जुलाई को होने की संभावना है। कार्ल राइस जो कार्ल रॉक के नाम से मशहूर हैं, नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में सक्रिय भागीदार थे।
कार्ल की पत्नी ने पति को ब्लैक लिस्ट किए जाने के मामले में अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की है। इस याचिका में केंद्र सरकार, एफआरआरओ के साथ ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को भी पक्षकार बनाया है।
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आरोप है कि याची के पति को टूरिस्ट वीजा मिला था और वे भारत में बिजनेस करते हुए पाए गए। अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दायर याचिका उन्होंने अपने पति कार्ल एडवर्ड राइस को वीजा से वंचित करने व ब्लैक लिस्टिंग करने के निर्णय को अनुचित व मनमाना बताते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय के कारण उनके पति 10 सितंबर 2020 से न्यूजीलैंड से भारत नहीं लौट पाए हैं।
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उन्होेंने कहा कार्ल 2013 से भारत आ रहे हैं और उनके खिलाफ वीजा उल्लंघन का एक भी मामला नहीं है।
याची ने जीवन व गरिमा के अधिकार का उल्लंघन
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसे अपने पति के साथ रहने से वंचित करके भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके जीवन और गरिमा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है। याचिका में कहा गया है कि राइस के पास न्यूजीलैंड और नीदरलैंड की दोहरी नागरिकता है। वे 2013 से भारत का दौरा कर रहे हैं और उन्होंने सभी कानूनों के साथ-साथ वीजा की शर्तों का सख्ती से पालन किया है।
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याची ने कहा उनसे शादी के बाद राइस को एक्स-2 वीजा दिया गया था, जो एक भारतीय नागरिक के विदेशी जीवनसाथी-बच्चों के लिए है और यह पांच मई 2024 को समाप्त होना है। एक्स-2 वीजा के लिए एक शर्त के अनुपालन के तहत याचिकाकर्ता के पति या पत्नी को हर 180 दिनों में भारत से बाहर जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा इसी शर्त के तहत उनके पति राइस संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को सूचित कर 10 सितंबर 2020 को भारत से चले गए। वह 10 अक्तूबर 2020 से भारत नहीं लौट पाए हैं क्योंकि वीजा के आवेदन को अथॉरिटी ने खारिज कर दिया।
बिना कारण बताए वीजा न देने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि वे वीजा के लिए भटक रहे हैं, न तो कार्ल एडवर्ड राइस या स्वयं याची को कोई कारण बताया गया है कि किस आधार पर उनके पति के वीजा जारी करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया है। याचिकाकर्ता के पति को केवल मौखिक रूप से सूचित किया कि उसे ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। इसलिए उसे भारत में आने की अनुमति नहीं है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि ब्लैक लिस्टिंग के आधार पर गैर-संचार, याचिकाकर्ता के साथ-साथ राइस के विभिन्न आवेदनों के जवाब में केंद्र व संबंधित अथॉरिटी ने निरंतर चुप्पी बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए एक विवाहिता को अलगाव में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें न तो नोटिस दिया गया न ही कभी पति को वीजा शर्तों के किसी भी उल्लंघन का संकेत दिया गया। ऐसे में बिना कारण पति को वीजा न देने का निर्णय शक्तियों का एक मनमाना दुरुपयोग है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 दोनों का उल्लंघन है।
गृह मंत्रालय ने रखा पक्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में शुक्रवार को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कार्ल राइस को वीजा नियमों व शर्तों के उल्लंघन करने पर अगले साल तक भारत में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। वह टूरिस्ट वीजा पर कारोबार करते तथा वीजा शर्तों के अन्य उल्लंघन करते पाए गए थे।
पत्नी ने की पक्ष रखने की मांग
याचिका में अदालत से वीजा रद्द करने और राइस को ब्लैक लिस्ट करने का निर्णय रद्द कर सरकार को राइस को भारतीय वीजा जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 16 जुलाई को होने की संभावना है। कार्ल राइस जो कार्ल रॉक के नाम से मशहूर हैं, नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में सक्रिय भागीदार थे।
कार्ल की पत्नी ने पति को ब्लैक लिस्ट किए जाने के मामले में अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की है। इस याचिका में केंद्र सरकार, एफआरआरओ के साथ ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को भी पक्षकार बनाया है।