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Hindi News ›   Delhi ›   Fraudster's number will no longer be on Google, Delhi Police is making special software

Counter The Crime : गूगल पर अब नहीं होगा जालसाज का नंबर, दिल्ली पुलिस बना रही है विशेष सॉफ्टवेयर

Mon, 10 Jul 2023 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 10 Jul 2023 05:37 AM IST
सार

उन्होंने गूगल पर अस्पताल का नंबर सर्च किया। गूगल पर मिले नंबर पर उन्होंने कॉल किया तो फोन उठाने वाले ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताते हुए उन्हें रिमोट एक्सेस मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने को कहा। 

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Fraudster's number will no longer be on Google, Delhi Police is making special software
Google Apple

विस्तार

तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त लोक अभियोजक केपी सिंह तबीयत खराब होने पर पत्नी को संजय नगर, गाजियाबाद, यशोदा अस्पताल में भर्ती कराना चाहते थे। उन्होंने गूगल पर अस्पताल का नंबर सर्च किया। गूगल पर मिले नंबर पर उन्होंने कॉल किया तो फोन उठाने वाले ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताते हुए उन्हें रिमोट एक्सेस मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने को कहा। 

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इसके अलावा 10 रुपये का भुगतान करने को कहा। एप्लीकेशन डाउनलोड करते ही उनके खाते से 99909 रुपये कट गए। 11 अप्रैल, 23 को मामला दर्जकर उत्तरी जिले के साइबर थाना प्रभारी पवन तोमर की देखरेख में एसआई रंजीत चौधरी की टीम ने इस मामले को सुलझाते हुए एक दिन पहले साइबर जालसाज शाहिद अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।
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अभियोजक केपी सिंह ही नहीं बल्कि देश में लाखों लोग इस तरह की ठगी का शिकार हो रहे हैं। जालसाज अपने मोबाइल नंबरों को गूगल पर डाल देते हैं। ये सरकारी संस्थाओं, बैंक, अस्पताल, होटल और पर्यटक स्थलों आदि की फर्जी वेबसाइट बनाकर उन पर अपना मोबाइल नंबर डाल देते हैं। ये इस तरह सेटिंग करते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति गूगल पर किसी का नंबर सर्च करता है तो इनका नंबर सबसे ऊपर आता हैं। इसके बाद पीडि़त ठगी का शिकार हो जाता है। मगर गूगल पर जालसाज का मोबाइल नंबर अब नहीं होगा। 
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गूगल के जरिये ठगी का शिकार हो रहे लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ऐसा साफ्टवेयर बना रही है कि वह गूगल पर जालसाज के मोबाइल नंबर को तुरंत पकड़ लेगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि साफ्टवेयर तैयार हो गया। अभी ट्रायल चल रहा है। इस साफ्टवेयर से बैंक आदि के फर्जी यूआरएल का पता लग जाएगा। सुरक्षा अधिकारी इसे दिल्ली पुलिस का बड़ा कदम बता रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने लॉन्च किया था हेल्पलाइन नंबर 155260 
गृहमंत्रालय ने साइबर जालसाजों पर नजर रखने के लिए एक अप्रैल, 2021 को हेल्पलाइन नंबर 155260 लॉन्च की थी। इसके रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म को गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई 4सी) स्थापित किया गया। ये साइबर जालसाज पर नजर रखते हैं। गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले एक महीने में करीब डेढ़ लाख जालसाज के मोबाइल नंबरों को ब्लॉक किया जा चुका है। गृहमंत्रालय के इस अधिकारी ने बताया कि अभी जालसाजी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों को ही ब्लॉक किया जाता है। दिल्ली पुलिस समेत अन्य एजेंसियां जिस मोबाइल नंबर को देती हैं उसे ही ब्लॉक किया जाता है। अगर कोई नंबर गलत ब्लॉक हो जाता है तो उसे सुरक्षा एजेंसियों के पास वापस भेजकर फिर से चेक करवाया जाता है।

खुद हट जाएगा नंबर
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साफ्टवेयर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि जालसाज का नंबर गूगल से तुरंत हट जाएगा और उस नंबर की पहचान कर पुलिस अधिकारियों को बता देगा। बताया जा रहा है कि ट्रायल सफल होने पर इस सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा। इससे ऑनलाइन ठगी की वारदात पर लगाम लगेगी। दिल्ली पुलिस अधिकारी ने ट्रायल स्टेज पर होने के कारण इस सॉफ्वेयर के बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।


पुलिस के नाम पर जालसाजी हुई बंद
अभी जालसाजी पुलिस अधिकारियों का नाम लेकर व पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करते थे। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ बड़ा कदम उठाया। अब दिल्ली पुलिस के सरकारी नंबर से फोन करने पर ट्रू कॉलर पर हरा नगर आएगा। वही जालसाज का लाल रंग आएगा।

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