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फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा, एक आरोपी गिरफ्तार
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नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग और मध्य जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित चूड़ी वालान में फर्जी अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश किया है। मौके से एक आरोपी इमरान खान को गिरफ्तार किया, जबकि मुख्य आरोपी जुल्फिकार अली फरार है। आरोपी सिप सर्वर के जरिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) के भारतीय सर्वर को बाईपास कर अंतरराष्ट्रीय कॉल करवा रहे थे।
एक्सचेंज से एक करोड़ से अधिक के उपकरण बरामद हुए हैं। मुख्य आरोपी के चीन की यात्रा के भी प्रमाण मिले हैं। हालांकि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि वह चीन क्यों गया। जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले सवा दो माह के दौरान आरोपी दूरसंचार विभाग को 70 करोड़ से अधिक की चपत लगा चुके हैं।
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने सोमवार को बताया कि दूर संचार विभाग की टीम ने मध्य जिला पुलिस को फर्जी एक्सचेंज संचालित होने की शिकायत की थी। आईटीएस ऑफिसर अंकित शुक्ला ने बताया था कि चावड़ी बाजार इलाके में इस तरह का सेटअप लगे होने की जानकारी मिली है। स्पेशल स्टाफ और साइबर सेल को जांच में पता चला कि जुल्फिकार अली नामक शख्स चूड़ी वालान इलाके में 26 नवंबर 2020 से अदीबा इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा है।
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दूर संचार विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो आरोपी फरार हो गया। इस दौरान पता चला कि जुल्फिकार का रिश्तेदार यूसुफ उस बिल्डिंग की देखरेख करता है, जिसमें टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा था। जुल्फिकार का भांजा इमरान टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चलाने की बात कबूली।
ऐसे चल रहा था गोरखधंधा
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कॉल्स के लिए दूर संचार विभाग के सर्वर के जरिये ही कॉल की जा सकती है, लेकिन आरोपियों ने जुगाड़ के जरिए ऐसा सेटअप लगाया, जिनकी मदद से सरकारी सर्वर को बाईपास कर विदेशों से ट्रंक कॉल के लिए कॉल करवाई जा सकती थी। आरोपी अपने दो नंबरों से सिप सर्वर के जरिए एक समय में 5000 हजार कॉल करवा सकते थे। दोनों सिप सर्वर की वजह से हर दिन दूर संचार विभाग को एक करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हो रहा था।
यूं पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
डीओटी की टीम ने सर्वर के इस्तेमाल और राजस्व का मिलान किया तो उसमें भारी अंतर आया। तहकीकात की गई तो पता चला कि पुरानी दिल्ली में सरकारी सर्वर को बाईपास कर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स करवाई जा रही है। आरोपियों के दोनों नंबरों से करीब डेढ़-डेढ़ लाख कॉल्स रोजाना हो रही थीं। आरोपी विदेशों की कॉल्स के लिए चार्ज का महज 10 फीसदी ही लेते थे। ऐसे में सरकार को इससे घाटा और आरोपियों को मोटा मुनाफा हो रहा था।
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एक्सचेंज से एक करोड़ से अधिक के उपकरण बरामद हुए हैं। मुख्य आरोपी के चीन की यात्रा के भी प्रमाण मिले हैं। हालांकि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि वह चीन क्यों गया। जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले सवा दो माह के दौरान आरोपी दूरसंचार विभाग को 70 करोड़ से अधिक की चपत लगा चुके हैं।
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मध्य जिला पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने सोमवार को बताया कि दूर संचार विभाग की टीम ने मध्य जिला पुलिस को फर्जी एक्सचेंज संचालित होने की शिकायत की थी। आईटीएस ऑफिसर अंकित शुक्ला ने बताया था कि चावड़ी बाजार इलाके में इस तरह का सेटअप लगे होने की जानकारी मिली है। स्पेशल स्टाफ और साइबर सेल को जांच में पता चला कि जुल्फिकार अली नामक शख्स चूड़ी वालान इलाके में 26 नवंबर 2020 से अदीबा इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा है।
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दूर संचार विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो आरोपी फरार हो गया। इस दौरान पता चला कि जुल्फिकार का रिश्तेदार यूसुफ उस बिल्डिंग की देखरेख करता है, जिसमें टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा था। जुल्फिकार का भांजा इमरान टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चलाने की बात कबूली।
ऐसे चल रहा था गोरखधंधा
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कॉल्स के लिए दूर संचार विभाग के सर्वर के जरिये ही कॉल की जा सकती है, लेकिन आरोपियों ने जुगाड़ के जरिए ऐसा सेटअप लगाया, जिनकी मदद से सरकारी सर्वर को बाईपास कर विदेशों से ट्रंक कॉल के लिए कॉल करवाई जा सकती थी। आरोपी अपने दो नंबरों से सिप सर्वर के जरिए एक समय में 5000 हजार कॉल करवा सकते थे। दोनों सिप सर्वर की वजह से हर दिन दूर संचार विभाग को एक करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हो रहा था।
यूं पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
डीओटी की टीम ने सर्वर के इस्तेमाल और राजस्व का मिलान किया तो उसमें भारी अंतर आया। तहकीकात की गई तो पता चला कि पुरानी दिल्ली में सरकारी सर्वर को बाईपास कर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स करवाई जा रही है। आरोपियों के दोनों नंबरों से करीब डेढ़-डेढ़ लाख कॉल्स रोजाना हो रही थीं। आरोपी विदेशों की कॉल्स के लिए चार्ज का महज 10 फीसदी ही लेते थे। ऐसे में सरकार को इससे घाटा और आरोपियों को मोटा मुनाफा हो रहा था।