फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Experts warn- Encroachment on Yamuna's floodplain should end

Yamuna Flood : विशेषज्ञों ने चेताया- यमुना के बाढ़ क्षेत्र पर खत्म हो अतिक्रमण, जल-प्रबंधन की कारगर नीति जरूरी

Wed, 19 Jul 2023 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 19 Jul 2023 05:17 AM IST
सार

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के प्रो. राम कुमार के मुताबिक, नदी मुख्य चैनल तो है ही, इससे एकदम सटा रिपेरीयन जोन, जहां पानी तो नहीं होता, लेकिन नमी पूरी रहती है। सक्रिय बाढ़ क्षेत्र, जहां बाढ़ कम आए या ज्यादा, पानी पहुंचना ही है।  पुराना बाढ़ क्षेत्र वह हिस्सा, जहां ज्यादा बाढ़ आने पर पानी पहुंच जाता है और बांध क्षेत्र भी इसमें शामिल है। इनमें से किसी एक या दूसरे में छेड़छाड़ नदी की सेहत पर असर डालती है।

विज्ञापन
Experts warn- Encroachment on Yamuna's floodplain should end
demo pic... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुना की बाढ़ ने दिल्ली में अपने दायरे को परिभाषित किया है। विशेषज्ञ इसे दिल्ली के लिए बड़ा सबक बता रहे हैं। उनका मानना है कि यमुना ने अपने बाढ़ क्षेत्र के साथ इसमें मौजूद नम भूमियों की पहचान की है। जहां तक पानी गया, वह यमुना का अपना घर है। बाढ़ उतरने के क्रम में इस वक्त दिखने वाले स्थानीय पौधे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि पौधरोपण अवैज्ञानिक नहीं होना चाहिए। बाढ़ ने दिल्ली को अलर्ट किया है कि बारिश के पानी के प्रबंधन की कारगर रणनीति जरूरी है।

विज्ञापन


बाढ़ की चेतावनी, अब और हुआ अतिक्रमण तो दिल्ली की खैर नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन उसी क्षेत्र को नदी मान लिया जाता है, जिससे होकर पानी निकलता है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के प्रो. राम कुमार के मुताबिक, नदी मुख्य चैनल तो है ही, इससे एकदम सटा रिपेरीयन जोन, जहां पानी तो नहीं होता, लेकिन नमी पूरी रहती है। सक्रिय बाढ़ क्षेत्र, जहां बाढ़ कम आए या ज्यादा, पानी पहुंचना ही है।  पुराना बाढ़ क्षेत्र वह हिस्सा, जहां ज्यादा बाढ़ आने पर पानी पहुंच जाता है और बांध क्षेत्र भी इसमें शामिल है। इनमें से किसी एक या दूसरे में छेड़छाड़ नदी की सेहत पर असर डालती है।
विज्ञापन


सिटीजन फ्रंट फॉर वाटर के संयोजक एसए नकवी बताते हैं कि यमुना का पानी जहां तक गया है, वह यमुना का अपना घर है। दिल्ली में फिलहाल इसका दायरा 97 वर्ग किमी है। यह दिल्ली के कुल क्षेत्रफल का सात फीसदी है। इसमें से 16 वर्ग किमी में होकर पानी गुजरता है, जबकि 81 वर्ग किमी में बाकी सारे क्षेत्र आ जाते हैं। इसमें में बड़े हिस्से पर सरकारी व गैर-सरकारी अतिक्रमण हुआ है। फिर भी जितना बचा है वह दिल्ली काे बचाने के लिए पर्याप्त है। इस बार की बाढ़ का सबक यह भी है कि अगर अब किसी तरह की छेड़छाड़ की गई तो आने वाला वक्त दिल्ली के लिए शुभ नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पौधरोपण के नाम पर बाहर के पौधों की भरमार, बाढ़ ने डुबोया
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. फैयाज खुदसर बताते हैं कि पौधरोपण के विज्ञान के हिसाब से यमुना के रिपेरीयन जोन व सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में बड़े पौधे नहीं लगने चाहिए। इनमें काम मूंज, कुश, झाऊ, नरकुल, पटेरा, पार्स पेलम और पार्स पेलेडियम का है। नम भूमियों के साथ मिलकर यह नदी की किडनी का काम करते हैं। बड़े पेड़ पक्षियों के बसेरे के लिए इक्का-दुक्का ही लगने चाहिए. इनकी सही जगह पुराना बाढ़ क्षेत्र व बांध है।

बाढ़ आने से पहले वजीराबाद से कालिंदी कुंज के बीच का सर्वे करने वाले व यमुना संसद के तकनीकी विशेषज्ञ संजय सिंह बताते हैं कि यमुना के फ्लड प्लेन में अवैज्ञानिक तरीके से पौधरोपण हुआ था। रिपेरीयन जोन तक में चिनार, चेरीब्लॉसम समेत दूसरे कई तरह के बाहरी पौधे दिखे, जबकि सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में पीपल, अर्जुन, बांस व जामुन की भरमार है। लगाने का तरीका भी ऐसा कि उनका बचना बहुत मुश्किल है। उन पौधों का तो कोई नामो-निशान नहीं, जो यहां लगने चाहिए। बाढ़ उतरने के क्रम में अब यमुना में स्थानीय पौधे ही बचे दिख रहे हैं। बाहर के पौधों को बाढ़ बहा ले गई।


बारिश के पानी का प्रबंधन जरूरी
विशेषज्ञों की मानें तो इस बार बाढ़ के दौरान चार दिन तक दिल्ली में बारिश नहीं हुई। अगर कुदरत मेहरबान न होता तो यमुना में गिरने वाले नाले बंद होने से दिल्ली में कहर ढा देते। हर तरफ पानी भरा रहता। एसए नकवी की मानें तो दिल्ली ने अंदर की झीलों व तालाबों को तो खत्म ही कर दिया है, बरसाती नाले भी गायब हैं। 201 में से 44 नाले तो दस्तावेज में भी नहीं मिल रहे हैं। कुदरत इस बार ठीक था, लेकिन हर बार ऐसा मुमकिन नहीं है। ऐसे में बारिश के पानी के प्रबंधन पर दिल्ली को अलर्ट हो जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed