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सांसों का संकट : दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ हर तरफ जंग, इस मोर्च पर आरडब्ल्यूए भी संग 

Wed, 17 Nov 2021 05:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 17 Nov 2021 05:05 AM IST
सार

गली मोहल्लों में पानी का किया जा रहा है छिड़काव। कूड़ा जलने से रोकने के लिए रखी जा रही है नजर। निजी वाहनों के बदले सार्वजनिक वाहनों का अधिक उपयोग करने के लिए किया जा रहा है जागरूक।

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Everywhere war against pollution in Delhi RWA also with efforts
सांस लेना दूभर... - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदूषण से बिगड़े राजधानी के हालात को सुधारने के लिए दिल्ली की विभिन्न आरडब्ल्यूए ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। गली मोहल्लों में पानी के छिड़काव के साथ पौधे लगाने का काम किया जा रहा है। एडवाइजरी कर लोगों को निजी वाहनों से बदले सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। कुछ सोसाइटियों ने इस पर अमल करना शुरू भी कर दिया है। 

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नई दिल्ली स्थित दिल्ली इंपेरियल जोन की राजधानी नागरिक कल्याण समिति  के अध्यक्ष प्रीतम धारीवाल ने कहा कि अक्तूबर से ही दिल्ली की हवा बिगड़ना शुरू हो गई थी। इसको देखते हुए आरडब्ल्यूए ने पिछले माह से नई दिल्ली की सड़कों पर पीपल के पौधे लगाना शुरू कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि आरडब्ल्यूए की ओर से 100 पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। 
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इसमें से मंदिर मार्ग, उद्यान मार्ग, आरके आश्रम मार्ग व भगत सिंह मार्ग पर 70 पौधे लगा दिए गए हैं। शेष 70 पौधे भी नई दिल्ली क्षेत्र में लगाए जाएंगे। धारीवाल ने बताया कि रिहायशी इलाकों में लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने इलाकों में झाड़ू लगाने से पहले पानी का छिड़काव जरूर करें। 
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पूर्वी दिल्ली में ऑड-इवन के लिए किया जा रहा जागरूक
पूर्वी दिल्ली में रिहायशी इलाकों में प्रदूषण को कम करने के लिए गाड़ियों के उपयोग कम करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। ईस्ट दिल्ली ज्वाइंट आरडब्ल्यूए फेडरेशन अध्यक्ष बीएस वोहरा ने बताया कि लोगों से अपील की जा रही है कि वे कम से कम गाड़ी का उपोयग करें। यदि सरकार अभी ऑड-इवन लागू नहीं कर रही है तो लोग इसका अभी से अनुपालन करना शुरू कर दें। इस कड़ी में लोगों से अपील की जा रही है कि सप्ताह में कम से कम गाड़ियों को प्रयोग करें। यदि संभव हो तो निजी वाहनों के बदले सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करें।

2500 आरडब्ल्यूए को जारी की गई है एडवाइजरी
दिल्ली की 2500 आरडब्ल्यूए की संस्था यूनाइटेड रेजिडेंट ज्वाइंट एक्शन (ऊर्जा)  के अध्यक्ष अतुल गोयल ने बताया कि सभी आरडब्ल्यूए को एडवाइजरी जारी की गई है। आरडब्ल्यूए अध्यक्षों से अपने-अपने इलाकों में निर्माण गतिविधियों को नजर रखने के लिए कहा गया है। साथ ही स्थानीय नेताओं से संपर्क कर सड़कों की सफाई को लेकर उनकी जिम्मेदारी  को याद दिलाने की सलाह दी गई है। क्योंकि, कई सड़कों पर धूल की मोटी परत जम चुकी है, जिनकी सफाई होनी जरूरी है।

दिल्ली में वाहनों से अधिक प्रदूषण होता है। इस पर सबसे पहले रोक लगनी चाहिए। पानी छिड़कने से सिर्फ अस्थायी समाधान हो सकता है जबकि दिल्ली को स्थायी समाधान की जरूरत है। यदि गाड़ियों की संख्या पर लगाम लग जाए तो दिल्ली के प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
-बी एस वोहरा, ईस्ट दिल्ली आरडब्ल्यूए फ्रंट
.आरडब्ल्यूए को स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कहा गया है। सर्दी बढ़ने पर सोसायटी के सुरक्षा कर्मचारियों को हीटर देने की भी व्यवस्था होगी, जिससे वे सर्दी से बचने के लिए आग का इस्तेमाल नहीं करें। 
-अतुल गोयल, अध्यक्ष, यूनाइेटेड रेजिडेंट ज्वाइंट एक्शन (ऊर्जा) 
-पानी के छिड़काव के लिए सभी आरडब्ल्यूए को पाइप दिए गए हैं। सुबह-शाम झाड़ू लगाने से पहले पानी का छिड़काव किया जा रहा है। खुले में कचरा जलने से रोकने के लिए भी निगरानी की जा रही है। 
-प्रीतम धारीवाल,  अध्यक्ष, राजधानी नागरिक कल्याण समिति

प्रदूषण पर कसा एनडीएमसी का शिकंजा, 50-50 हजार का जुर्माना  

वायु प्रदूषण की गंभीर होते हालात पर शिकंजा कसने के लिए नई दिल्ली पालिका परिषद(एनडीएमसी)ने निर्माण गतिवधियों पर पाबंदी को लागू कर दिया है। एनडीएमसी की ओर से इसके तहत नई दिल्ली क्षेत्र में चार जगहों पर चल रहे निर्माण को रोकते हुए उनपर जुर्माना किया गया है। परिषद की टीम लगातार हालात पर नजर रख रही है ताकि नियमों का उल्लंघन न हो सके। 

पालिका परिषद की टीम की तरफ से सोमवार को चार जगहों पर चल रही निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया। इसके तहत वाणिज्य भवन, उत्तराखंड सदन, कौशल भवन सहित मानसिंह रोड पर भी एक साइट पर चल रहे निर्माण को रोक दिया गया है। धूल कणों से प्रदूषण न हो इसलिए एनडीएमसी की तरफ से कार्रवाई की जा रही है। एनडीएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक चार जगहों पर निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया है।नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी)के आदेश के तहत 50-50 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। सरकार की ओर से निर्माण गतिविधियों पर रोक के बावजूद चल रहे निर्माण को रोकने के लिए एनडीएमसी की तरफ से कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। 

रोजाना 250 किलोमीटर के दायरे में की जा रही है सड़कों की सफाई 
प्रदूषण के कारण बढ़ते संकट को देखते हुए नई दिल्ली पालिका परिषद(एनडीएमसी)ने सख्ती बढ़ा दी है। धूल प्रदूषण को रोकने के लिए दिन-रात के वक्त शिफ्ट में चार मैकेनिकल रोड स्वीपर से सड़कों की सफाई की जा रही है। धूल को रोकने के लिए 18 स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके। एनडीएमसी के दायरे में रोजाना करीब 250 किलोमीटर में प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए साफ सफाई की जा रही है। 

रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान -तीन दिसंबर तक 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार को वायु गुणवत्ता निगरानी आयोग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ संयुक्त बैठक की। बैठक में दिल्ली की ओर से पड़ोसी राज्यों को दिल्ली मॉडल पर काम करने की सलाह दी गई है। वहीं, प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने दिल्ली में रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान का दूसरा चरण 19 नवंबर से तीन दिसंबर तक चलाने का निर्णय लिया है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली की तरफ से बैठक दिल्ली-एनसीआर सभी जगह वर्क फ्रॉम होम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही उद्योगों को भी बंद करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को एक साथ नियंत्रित किया जा सके। बैठक में दूसरे राज्यों ने भी अपनी-अपनी बात रखी है। अब आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार है, जिसके आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने निर्णय पर उम्मीद जताते हुए कहा कि संयुक्त बैठक से एक संयुक्त कार्य योजना निकल कर आएगी, जिसे सभी राज्य मिलकर लागू करेंगे। इससे प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकेगा।

 केंद्र के एक ही हलफनामे में दो तथ्य से असमंजस 
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दो तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। एक तथ्य यह कह रहा है कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में चार फीसदी पराली का योगदान है। वहीं, दूसरा तथ्य पराली का योगदान 35 से 40 फीसदी बता रहा है। दोनों ही तथ्य सही नहीं हो सकते हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से तथ्यों को सार्वजनिक तौर पर साफ करने का निवेदन किया है। 

सफर के आंकड़ों से अलग हैं केंद्र के आंकड़े
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि केंद्र की संस्था सफर ने चार नवंबर से 14 नवंबर तक का डाटा सार्वजनिक किया है। सफर के मुताबिक, चार नवंबर को दिवाली के दिन पराली का योगदान 25 फीसदी था। पांच नवंबर को 36 फीसदी, छह नवंबर को 41 फीसदी, सात नवंबर को 48 फीसदी, आठ नवंबर को 30 फीसदी, नौ व 10 नवंबर को 27 फीसदी, 11 नवंबर को 26 फीसदी, 12 नवंबर को 35 फीसदी, 13 नवंबर को 31 फीसदी और 14 नवंबर को 12 फीसदी आंकड़ा था। यदि चार नवंबर से 14 नवंबर के डाटा का औसत निकालते हैं तो यह लगभग 31 फीसदी होता है। यह डाटा केंद्र सरकार का है जबकि कोर्ट के अंदर सौंपा गया डाटा भी केंद्र का ही है। 

तीन दिसंबर तक चलेगा रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान
प्रदूषण नियंत्रण के लिए गत 18 अक्तूबर से शुरू हुआ रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान तीन दिसंबर तक चलेगा। दूसरे चरण के तहत इसकी अवधि को बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण के तहत 18 नवंबर तक यह अभियान खत्म हो रहा था। पहले की तरह ही लगभग 100 चौराहों पर 2500 सिविल डिफेंस वालेंटियर लोगों को जागरूक करने के लिए काम करेंगे। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में प्रत्येक वाहन चालक 10 से 12 चौराहों से गुजरता है और प्रतिदिन करीब 30 मिनट तक ईंधन जलाता है, जिसका उसके लिए कोई उपयोग नहीं है। 

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