{"_id":"62707a15fb5b5b72051247e8","slug":"du-had-become-a-witness-to-lord-mountbattens-ishqar-e-ishq-he-said-this-interesting-thing-on-convocation-in-1948","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 साल : लॉर्ड माउंटबेटन के इजहार-ए-इश्क का गवाह बना था डीयू, दीक्षांत में कही थी ये दिलचस्प बात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 साल : लॉर्ड माउंटबेटन के इजहार-ए-इश्क का गवाह बना था डीयू, दीक्षांत में कही थी ये दिलचस्प बात
Tue, 03 May 2022 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 03 May 2022 06:10 AM IST
सार
1948 में विशेष दीक्षांत समारोह में माउंटबेटन ने कहा था...यह मेरी मैरिज लाइफ की भी सिल्वर जुबली है। डीयू की रजत जयंती 1947 में होनी थी, लेकिन विभाजन की त्रासदी में विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह नहीं मनाया गया। अगले वर्ष 1948 में विशेष समारोह आयोजित हुआ। इसमें भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन अपनी पत्नी एडविना एशले के साथ शामिल हुए थे।
विज्ञापन
7 मार्च 1948 को सिल्वर जुबली समारोह में मौजूद लोग और साथ में (दाएं) कुलपति का वर्तमान कार्यालय...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत-पाक विभाजन के बाद 1948 में दिल्ली विश्वविद्यालय का विशेष दीक्षांत समारोह चल रहा था। बतौर आखिरी ब्रिटिश वायसराय लार्ड माउंटबेटन भी इसमें शामिल हुए थे। बातों-बातों में उन्होंने अपनी जिंदगी का दिलचस्प वाकया साझा किया।
विज्ञापन
बकौल माउंटबेटन, यह उनकी मैरिज लाइफ की भी सिल्वर जुबली है। जिस साल से डीयू की स्थापना हुई थी, उसी साल 1922 में उनकी एडविना एशले से शादी हुई थी। इससे एक साल पहले वाइस रेगल लॉज में ही एडविना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था। यह वही वाइस रेगल लॉज है, जिसमें इस वक्त डीयू कुलपति का दफ्तर है।
विज्ञापन
डीयू की रजत जयंती 1947 में होनी थी, लेकिन विभाजन की त्रासदी में विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह नहीं मनाया गया। अगले वर्ष 1948 में विशेष समारोह आयोजित हुआ। इसमें भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन अपनी पत्नी एडविना एशले के साथ शामिल हुए थे।
विज्ञापन
वहीं, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन और शांति स्वरूप भटनागर भी शामिल थे। समारोह को लॉर्ड माउंटबेटन की मैरिज लाइफ की रजत जयंती के तौर पर भी याद रखा जाता है। इसकी स्वीकारोक्ति खुद माउंटबेटन ने ही की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की शिक्षिका डॉक्टर अमृत कौर बसरा ने बताया कि 1921 में वायस रेगल लॉज में बाल रूम पार्टी चल रही थी।
इसमें एडविना एशले और लेफ्टीनेंट लुई माउंटबेटन शामिल हुए थे। माउंटबेटन ने यहीं पर शादी का प्रस्ताव रखा। बताया जाता है कि एडविना उस वक्त अपनी मौसी से मिलने गई हुई थीं। दोनों के रिश्तों से उनकी मौसी का एतराज था। 1922 में दोनों की लंदन में शादी हो गई। तब किसी को यह नहीं पता था कि माउंटबेटन देश के वायसराय बनेंगे और एडविना भारत की प्रथम महिला।