महंगाई की मार : घरेलू गैस ने बिगाड़ दिया जायका और रसोई का बजट
- आपदा में जेब हो रही ढीली, आम लोगों की मुसीबतें बढ़ीं
- रसोई गैस ने किचन का बजट बिगाड़ा, पेट्रोल-डीजल के कारण बटुआ खाली
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विस्तार
आपदा में दिनोंदिन बढ़ती महंगाई ने लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। बढ़ती महंगाई के कारण निम्न व मध्यम वर्ग के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत ने कामकाजी वर्ग की बेचैनी बढ़ा दी है तो रसोई गैस के दाम में बढ़ोत्तरी की वजह से महिलाओं के किचन का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले साल के लॉकडाउन शुरू होने के बाद तो अभी तक रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी भी लोगों को नहीं मिल रही है। यहीं नहीं कोरोना संक्रमण की वजह से दिल्ली में कई घरों में लोग बीमारी से परेशान है। इस वजह से मेडिसिन पर खर्च का अलग दबाव बना हुआ है।
रसोई गैस से सब्सिडी गायब
पहले रसोई गैस की कीमतें तो बढ़ती थीं, लेकिन बैंक अकाउंट में थोड़ी-बहुत सब्सिडी वापस आने से लोगों को कुछ राहत थी। लेकिन पिछले साल से सब्सिडी भी बैंक अकाउंट में वापस नहीं आ रही है और साथ ही रसोई गैस के दाम भी 809 रुपये तक प्रति रसोई गैस सिलिंडर बढ़ गया है। इसी तरह पाइप नेचुरल गैस का भाव भी बढ़ते जा रहा है।
संयुक्त परिवार पर छह सौ का अधिक बोझ
संयुक्त परिवार में अगर दो रसोई गैस सिलिंडर हर महीने खर्च होता है तो करीब पांच से छह सौ रुपये अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। इसी तरह अगर एक परिवार में एक से डेढ़ सिलिंडर प्रतिमाह इस्तेमाल होता है तो तीन-चार सौ रुपया अधिक बोझ बढ़ रहा है। अगर इसमें तड़का लगाने वाले सरसों तेल या रिफाइंड तेल को जोड़ से तो कम से कम एक हजार रुपया सिर्फ रसोई गैस व तेल में अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
पेट्रोल की बढ़ते भाव से मुसीबतें बढ़ीं
पेट्रोल के भाव ने भी कामकाजी लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। लॉकडाउन के समय को छोड़ दे तो इससे पहले पेट्रोल की बढ़ती कीमत की वजह से कामकाजी लोगों के पॉकेट को ढीला कर रहा है। डीजल हो या पेट्रोल पिछले एक साल में 70 रुपये से बढ़कर 91 रुपये प्रति लिटर तक बढ़ गया है। महंगाई भत्ता तो कोरोना काल में मिल नहीं रहा है और महंगाई बढ़ने से लोगों की जेब ढीली हो रही है।
अतिरिक्त बोझ बढ़ गया
अगर कोई 100 किलोमीटर प्रतिदिन कार से सफर करता है तो उसे दिल्ली की ट्रैफिक में कम से कम 4 लीटर पेट्रोल की जरूरत होती है। इसी तरह कोई बाइक से चलता है तो 100 किलोमीटर के लिए प्रतिदिन 2 लीटर पेट्रोल की आवश्यकता होती है। पिछले साल पेट्रोल की कीमत 70 रुपये थी तो अब बढ़कर 90 रुपये के पार चली गई है। कार वालों को प्रतिदिन 80 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है तो बाइक सवार को 40 रुपये। ऐसे में प्रति महीने की बात करें तो कार सवार को करीब ढाई हजार और बाइक सवार को डेढ़ हजार के करीब अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
इनकी भी सुनें... व्यवसाय बंद, खर्च में बढ़ोतरी
रसोई गैस की कीमत तो दिनोंदिन बढ़ ही रही है साथ ही सब्सिडी भी नहीं मिल पा रही है। पहले तो कीमत में बढ़ोत्तरी होती थी, लेकिन यह दिलासा रहता था कि बतौर सब्सिडी बैंक एकाउंट में कुछ पैसा वापस आ जाएगा। लेकिन पिछले एक साल से तो रसोई गैस कंपनी वाले सब्सिडी भी देना बंद कर दिए है। ऐसे में किचन का बजट संभालना बेहद मुश्किल होता है। सभी खाद्य सामग्री महंगी होने की वजह से मध्यम वर्ग का किचेन का बजट पांच हजार की जगह 10 हजार तक पहुंच गया है। जबकि व्यवसाय भी इनदिनों बंद है। कोरोना संक्रमण की वजह से वैसे ही मेडिसिन में खर्च अधिक हो रहा है।
वंदना चावला
रोजगार खत्म हो रहा है, व्यापार पर बंदिश लगी हुई है। आर्थिक रूप से सभी की कम टूटी हुई है। लेकिन महंगाई में कमी नहीं है। बच्चों की पढ़ाई खर्च से लेकर रसोई खर्च तक महंगा होते जा रहा है। लेकिन इस तरफ ध्यान इनदिनों किसी का नहीं है। रसोई गैस में तो मानों आग लगी हुई है, ऊपर से सब्सिडी खत्म कर दिया गया है। महंगाई की वजह से सभी वर्ग की परेशानी बढ़ी है। सरकार को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। लॉकडाउन में तो जमा-पूंजी लोगों का खत्म हो रहा है।
विनिता शर्मा
बेहतर है कि साइकिल ही चलाई जाए। पेट्रोल व डीजल की कीमत में आग लगी हुई है। हर दिन पेट्रोल पंप पर पहुंचने के बाद पता चलता है कि कीमत बढ़ गई है। लॉकडाउन व कोरोना संक्रमण के दौर में यातायात भत्ता तो बढ़ता नहीं है और कीमतें दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। महानगरी में तो एक जगह से दूसरे जगह पहुंचने के लिए साइकिल का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता। मेट्रो का किराया हो या ऑटो व कैब का सभी महंगे है। मुंबई की तरह लोकल ट्रेन भी फ्रीक्वेंसी भी नहीं है कि सस्ती सवारी की जा सके। निजी वाहन के इस्तेमाल करने पर महीने का चार हजार रुपया अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
अक्षय वर्मा