फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   disha ravi granted bail court said creation of a whatsapp group or being editor of an innocuous toolkit was not an offence

दिशा रवि को मिली जमानत, कोर्ट ने माना, वॉट्सऐप बनाना और उसमें राय व्यक्त करना या टूलकिट का संपादक होना कोई अपराध नहीं

Wed, 24 Feb 2021 01:07 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 24 Feb 2021 01:07 AM IST
विज्ञापन
disha ravi granted bail court said creation of a whatsapp group or being editor of an innocuous toolkit was not an offence
दिशा रवि (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

अदालत ने स्पष्ट किया कि वॉट्सऐप बनाना और उसमें राय व्यक्त करना या टूलकिट का संपादक होना कोई अपराध नहीं है। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए जलवायु कार्यकर्ता रवि दिशा को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिशा के खिलाफ ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है कि उसने भारत के खिलाफ कोई अभियान चलाया। अदालत ने पुलिस के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि दिशा के खालिस्तानी अर्थात अलगाववादियों से संपर्क हैं। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं पाया गया कि उसने अलगाववादी विचार की सदस्यता ली है।

विज्ञापन


पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा ने अपने फैसले में बचाव पक्ष के उस तर्क पर सहमति जताई कि किसानों के ट्रैक्टर परेड के लिए पुलिस ने ही इजाजत दी थी। अदालत ने कहा कि ऐसे में सह-अभियुक्त शांतनु के विरोध मार्च में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचने में कुछ भी गलत नहीं है। अदालत ने दिशा को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व दो अन्य जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया। देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन


अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि जमानत राशि घटाकर 50 हजार रुपये की जाए। दिशा को 13 फरवरी को किसान टूलकिट मामले में बंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था।अदालत ने कहा कि पुलिस ऐसा कोई भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाई कि दिशा को जेल में रखा जा सके। अदालत ने कहा कि उसका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में वह जमानत पाने की हकदार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने दिल्ली पुलिस के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि दिशा रवि खालिस्तान समर्थकों के साथ मिलकर टूलकिट तैयार कर रही थी और वह भारत को बदनाम करने और किसानों के प्रदर्शन की आड़ में देश में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश का हिस्सा थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ग्रेटा थुनबर्ग को टूलकिट को अग्रेषित करने के अलावा, यह बताने में विफल रहा कि याची दिशा ने अलगाववादियों का समर्थन कैसे किया। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त और उसके सह-षड्यंत्रकारियों के भयावह मंसूबों के अनुसार किसी भी भारतीय दूतावास में कोई हिंसा हुई।

अदालत ने कहा कि योग और चाय के अलावा, इस विवाद का समर्थन करने के लिए मेरे ध्यान में कोई सबूत नहीं लाया गया है। अदालत ने कहा सह-अभियुक्त शांतनु के विरोध मार्च में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचने में कुछ भी गलत नहीं है। फिर भी, उसकी पहचान छुपाने की कोशिश अनावश्यक विवादों से दूर रहने के लिए एक उत्सुक प्रयास से ज्यादा कुछ नहीं लगता है। इसके अलावा चूंकि उक्त टूलकिट या पीजेएफ के साथ लिंक आपत्तिजनक नहीं पाया गया है, इसलिए उसे टूलकिट व पीजेएफ से जोड़ने वाले सबूतों को नष्ट करने के लिए सिर्फ वॉट्सऐप चैट को डिलीट करना भी निरर्थक हो जाता है। अदालत ने कहा कि हिंसा के मामलों में काफी लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन एक भी दिशा का लिंक साबित नहीं हुआ है।


वहीं दिशा की एक दिन की रिमांड अवधि खत्म होने पर अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने चार दिन का पुलिस रिमांड बढ़ाने का आग्रह किया। अदालत ने जमानत पर फैसला आने तक रिमांड बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि फैसला आने के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed