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Delhi News: भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा मानने की मांग, एनएचआरसी को लिखा पत्र
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हीट एक्शन प्लान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की सिफारिश करने का भी किया अनुरोध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के विभिन्न इलाकों के निवासियों ने पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस इंडिया के साथ मिलकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा मानने की मांग की है। साथ ही, गर्मी से बचाव के लिए तैयार किए जाने वाले हीट एक्शन प्लान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की सिफारिश करने का भी अनुरोध किया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, निवासियों और ग्रीनपीस इंडिया ने एनएचआरसी को एक औपचारिक पत्र और नागरिकों द्वारा तैयार की गई हीट रजिस्ट्री सौंपी है। इस रजिस्ट्री में लोगों के अनुभवों के साथ मेडिकल बिल, बिजली बिल और आय से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं, जिनसे यह दिखाया गया है कि भीषण गर्मी का असर लोगों की सेहत, आजीविका, आय और सम्मान पर किस तरह पड़ रहा है। बयान के मुताबिक, सुंदर नगरी, सीआर पार्क, द्वारका और जामिया नगर के निवासी, स्ट्रीट वेंडर, गिग वर्कर, घर से काम करने वाले लोग, छात्र और बुजुर्ग मई महीने से हर सप्ताह हीट रजिस्ट्री तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह दर्ज करना है कि बढ़ते तापमान का उनके दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। पत्र में कहा गया है कि आयोग के सामने भीषण गर्मी से होने वाले मानवीय नुकसान और अधिकारों के हनन के प्रत्यक्ष प्रमाण रखे गए हैं। निवासियों ने एनएचआरसी से अपील की है कि वह भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा मानते हुए इस दिशा में जरूरी कदम उठाएं। इंडियन हॉकर अलायंस के राष्ट्रीय समन्वयक मोहित वलेचा ने कहा कि भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर पड़ता है। गर्मी के कारण लोगों की आवाजाही कम हो जाती है, जिससे स्ट्रीट वेंडरों की कमाई और आजीविका प्रभावित होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के विभिन्न इलाकों के निवासियों ने पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस इंडिया के साथ मिलकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा मानने की मांग की है। साथ ही, गर्मी से बचाव के लिए तैयार किए जाने वाले हीट एक्शन प्लान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की सिफारिश करने का भी अनुरोध किया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, निवासियों और ग्रीनपीस इंडिया ने एनएचआरसी को एक औपचारिक पत्र और नागरिकों द्वारा तैयार की गई हीट रजिस्ट्री सौंपी है। इस रजिस्ट्री में लोगों के अनुभवों के साथ मेडिकल बिल, बिजली बिल और आय से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं, जिनसे यह दिखाया गया है कि भीषण गर्मी का असर लोगों की सेहत, आजीविका, आय और सम्मान पर किस तरह पड़ रहा है। बयान के मुताबिक, सुंदर नगरी, सीआर पार्क, द्वारका और जामिया नगर के निवासी, स्ट्रीट वेंडर, गिग वर्कर, घर से काम करने वाले लोग, छात्र और बुजुर्ग मई महीने से हर सप्ताह हीट रजिस्ट्री तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह दर्ज करना है कि बढ़ते तापमान का उनके दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। पत्र में कहा गया है कि आयोग के सामने भीषण गर्मी से होने वाले मानवीय नुकसान और अधिकारों के हनन के प्रत्यक्ष प्रमाण रखे गए हैं। निवासियों ने एनएचआरसी से अपील की है कि वह भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा मानते हुए इस दिशा में जरूरी कदम उठाएं। इंडियन हॉकर अलायंस के राष्ट्रीय समन्वयक मोहित वलेचा ने कहा कि भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर पड़ता है। गर्मी के कारण लोगों की आवाजाही कम हो जाती है, जिससे स्ट्रीट वेंडरों की कमाई और आजीविका प्रभावित होती है।
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