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दिल्ली दंगा: पुलिस ने अपनी सिफारिश पर वकीलों की नियुक्ति को ठहराया सही
Tue, 12 Jan 2021 09:23 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 12 Jan 2021 09:23 PM IST
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दिल्ली पुलिस
- फोटो : Social Media
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उत्तरी-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले के संबंध में सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता समेत कुछ वकीलों को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) के तौर पर नियुक्त किए जाने का निर्णय ठीक है। उपराज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा दिया निर्णय दिल्ली सरकार के लिए बाध्यकारी है। पुलिस ने यह जानकारी हाईकोर्ट को दी है। अदालत ने मामले को जनहित मानते हुए सुनवाई उपयुक्त खंडपीठ के पास भेज दिया।
उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की नियुक्ति संबंधी आदेश को न मानते हुए दिल्ली पुलिस की सिफारिश पर वकीलों की मंजूरी दी थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष पुलिस ने यह जवाब दंगा मामले में एसपीपी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली दिल्ली अभियोजक कल्याण संघ (डीपीडब्ल्यूए) की याचिका पर दिया है। आप सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील गौतम नारायण ने अदालत को बताया कि शुरुआत में दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस द्वारा भेजी गई एसपीपी की सूची खारिज कर दी थी और अपनी सूची भेजी थी।
नारायण ने अदालत को बताया कि बाद में उपराज्यपाल ने मामले में हस्तक्षेप किया और उन्होंने दिल्ली सरकार की सूची से असहमति जताई, जिसके बाद मामले को राष्ट्रपति के समक्ष भेजा गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने पुलिस की सूची को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने केवल एसपीपी की नियुक्ति के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इनकी नियुक्ति नहीं की है। न्यायमूर्ति सिंह ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका को जनहित याचिका मानते हुए उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को इसे उपयुक्त पीठ के समक्ष 15 मार्च के लिए सूचीबद्ध किए जाने का निर्देश दिया।
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पिछले साल नौ नवंबर को उच्च न्यायालय ने डीपीडब्ल्यूए की याचिका को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर उनका रुख साफ करने को कहा था। डीपीडब्ल्यूए ने अपनी याचिका में पुलिस के अनुसार एसपीपी की नियुक्ति किए जाने को चुनौती दी थी।
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उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की नियुक्ति संबंधी आदेश को न मानते हुए दिल्ली पुलिस की सिफारिश पर वकीलों की मंजूरी दी थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष पुलिस ने यह जवाब दंगा मामले में एसपीपी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली दिल्ली अभियोजक कल्याण संघ (डीपीडब्ल्यूए) की याचिका पर दिया है। आप सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील गौतम नारायण ने अदालत को बताया कि शुरुआत में दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस द्वारा भेजी गई एसपीपी की सूची खारिज कर दी थी और अपनी सूची भेजी थी।
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नारायण ने अदालत को बताया कि बाद में उपराज्यपाल ने मामले में हस्तक्षेप किया और उन्होंने दिल्ली सरकार की सूची से असहमति जताई, जिसके बाद मामले को राष्ट्रपति के समक्ष भेजा गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने पुलिस की सूची को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने केवल एसपीपी की नियुक्ति के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इनकी नियुक्ति नहीं की है। न्यायमूर्ति सिंह ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका को जनहित याचिका मानते हुए उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को इसे उपयुक्त पीठ के समक्ष 15 मार्च के लिए सूचीबद्ध किए जाने का निर्देश दिया।
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पिछले साल नौ नवंबर को उच्च न्यायालय ने डीपीडब्ल्यूए की याचिका को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर उनका रुख साफ करने को कहा था। डीपीडब्ल्यूए ने अपनी याचिका में पुलिस के अनुसार एसपीपी की नियुक्ति किए जाने को चुनौती दी थी।