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दिल्ली: कुछ ही अस्पतालों में मिल रहा झुलसे लोगों को इलाज, 2017 से हर साल 500 मामले हो रहे दर्ज

Mon, 22 Nov 2021 09:41 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 22 Nov 2021 09:41 AM IST
सार

केंद्र सरकार के सफदरजंग, एम्स और आरएमएल अस्पताल के अलावा दिल्ली सरकार के लोकनायक और थोड़ी बहुत जीटीबी अस्पताल में ही बर्न मामलों को लेकर चिकित्सीय व्यवस्थाएं हैं। एम्स में इसी साल बर्न एवं प्लास्टिक विभाग को एक ब्लॉक अलग से मिला है।

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Delhi: Only a few hospitals are giving treatment for burn people, since 2017 500 cases are being registered every year.
एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल

विस्तार

आग में झुलसे लोगों को तत्काल चिकित्सीय सहायता मिलनी जरूरी है। अस्पतालों में अग्निशमन सेवाओं पर भी जोर दिया जा रहा है, लेकिन हर अस्पताल में झुलसे लोगों का उपचार संभव नहीं है। राजधानी के कुछ ही अस्पतालों में ऐसे पीड़ितों को इलाज मिल रहा है। साल 2017 से हर साल 500 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

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केंद्र सरकार के सफदरजंग, एम्स और आरएमएल अस्पताल के अलावा दिल्ली सरकार के लोकनायक और थोड़ी बहुत जीटीबी अस्पताल में ही बर्न मामलों को लेकर चिकित्सीय व्यवस्थाएं हैं। एम्स में इसी साल बर्न एवं प्लास्टिक विभाग को एक ब्लॉक अलग से मिला है। इस मामले को लेकर दिल्ली अग्निशमन विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल गर्ग ने पिछले महीने ही दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि हाल ही में नरेला इलाके में आग की एक घटना हुई थी, जिसमें झुलसे लोगों को राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया, परंतु यहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को गंगाराम अस्पताल रेफर करना पड़ा। बर्न यूनिट न होने की वजह से डॉक्टरों ने आगे का उपचार देने से इनकार कर दिया। पत्र में यहां तक लिखा है कि सभी प्राइवेट अस्पताल में यह सेवा होनी चाहिए और वहां स्पेशल डॉक्टर और नर्स भी प्रशिक्षित होनी चाहिए।
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ये है आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 में 549 लोग झुलसे थे, जिनमें से 79 की मौत हुई। 2018 में 553 में से 95 लोगों की मौत हो गई। साल 2019 में 843 झुलसे लोगों में से 100 मौतें दर्ज की गईं। 2020 में 421 में से 41 की मौत हुई। इसी साल जनवरी से 19 नवंबर तक 327 लोग आग की चपेट में आए हैं, जिनमें से 70 लोगों की मौत हो चुकी हैं।

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सर्वाधिक बर्न यूनिट सफदरजंग में
लोकनायक अस्पताल के एमएस डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि उनके यहां 30 बिस्तरों की व्यवस्था के साथ आईसीयू भी उपलब्ध है। आरएमएल अस्पताल के अनुसार, उनके यहां 26 बिस्तरों की व्यवस्था है। सफदरजंग अस्पताल में सर्वाधिक 64 बिस्तरों की बर्न यूनिट है। प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि बर्न यूनिट खोलने के लिए स्टाफ से लेकर कई तरह की व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है। साथ ही अलग-अलग विभाग की एनओसी भी चाहिए। इन्हीं सब अड़चनों की वजह से अलग से बर्न यूनिट शुरू कर पाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, इन अस्पतालों का यह भी कहना है कि आपात स्थिति में ऐसे केस देखने को लिए उनके पास सीनियर डॉक्टर हैं, लेकिन प्राथमिक उपचार के जरिए अधिकतर केस देखे जा सकते हैं।

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