दिल्ली पुलिस का रिपोर्ट कार्डः अपराधियों पर कसा शिकंजा, घटीं वारदात
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लॉकडाउन के दौरान दर्ज मामलों में दिल्ली पुलिस प्रवासी मजदूरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। इन मामलों में कोर्ट में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। यानी दिल्ली पुलिस कोर्ट में रिपोर्ट देगी कि उसे दर्ज मामले में कोई आरोपी व्यक्ति नहीं मिला। इस तरह कोर्ट में केस खत्म हो जाएगा। पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने सालाना प्रेसवार्ता के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में यह बात कही। पिछले वर्ष अपराध 15.87 फीसदी दर्ज हुए।
दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के खिलाफ दर्ज मामलों में चार्जशीट के दौरान आरोपी को अनट्रेस बताया जाएगा, ताकि उसे किसी तरह की सजा न मिले। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान दो तरह के मामले दर्ज किए गए थे। एक सरकारी आदेश के उल्लंघन यानी आईपीसी की धारा 188 के तहत और दूसरा, दिल्ली पुलिस के एक्ट के तहत। जिन लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया था, उनके लिए पुलिस आयुक्त एक ऑर्डर लाएंगे। इसे उपराज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद लॉकडाउन के दौरान दर्ज सारे नामजद मामले रद्द हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में आरोपी व्यक्ति का नाम भी रिकॉर्ड से हट जाएगा।
इससे पूर्व, सालाना प्रेसवार्ता में एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में आरोपियों को गिरफ्तार करने का ग्राफ 15.43 फीसदी बढ़ा है। इस अवधि में झपटमारी की वारदात में 27.11 फीसदी इजाफा हुआ। वर्ष 2019 में आईपीसी के 316261 मामले दर्ज हुए थे और 2925531 पीसीआर कॉल मिली थीं। वहीं वर्ष 2020 में कुल 266070 मामले दर्ज हुए और 1808384 पीसीआर कॉल मिलीं।
वर्ष 2019 में डकैती के 15, रॉबरी के 1956, झपटमारी के 6266, वाहन चोरी के 46215 और अन्य चोरी के 193504 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2020 में डकैती के नौ, रॉबरी के 1963, झपटमारी के 7965, वाहन चोरी के 35019 व अन्य चोरी के 134455 मामले दर्ज हुए।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि डकैती के केसों में 40 फीसदी, हत्या में 9.40 फीसदी, फिरौती के लिए अपहरण में 26.67 फीसदी, सेंधमारी में 27.33 फीसदी, वाहन चोरी में 24.23 फीसदी, अन्य चोरी में 30.52 फीसदी और अपहरण में 31.17 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
वर्ष 2020 में महिलाओं के प्रति अपराधों में भी कमी आई है। दुष्कर्म के मामले में 21.63 फीसदी, छेड़छाड़ में 25.16 फीसदी और बेइज्जती के मामलों में 12.32 की कमी आई है। केसों को सुलझाने का ग्राफ 5.64 फीसदी बढ़ा है।
वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में पीसीआर कॉल की दर भी घटी है। वर्ष 2019 में 2925531 पीसीआर कॉल मिली थीं तो 2020 में 1808384 कॉल आईं। यह संख्या 38.19 फीसदी कम है।
दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2020 में फिरौती के लिए अपहरण और डकैती के सभी केस सुलझाने का दावा किया है। इस दौरान हत्या के 89.62, हत्या के प्रयास के 95.61, रॉबरी के 92.21, दुष्कर्म के 94.41 फीसदी केसों को सुलझाया गया।
इंटरनेट से ठगी बढ़ी, अपराधी भी पहुंच से दूर
लॉकडाउन के दौरान साइबर क्राइम के मामलों में लगभग दोगुना उछाल आया है। वर्ष 2020 में जनवरी से मार्च के बीच साइबर क्राइम की 2000 शिकायतें आ रही थीं। मार्च में इनकी संख्या अचानक बढ़ने लगी। मई में तो आंकड़ा 4000 हजार से ऊपर चला गया। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल ठगों ने 1.65 लाख लोगों की जमापूंजी हड़प ली, जबकि इन मामलों में केवल 213 लोग ही गिरफ्तार किए जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर क्राइम की जांच में देर लगती है। कई बार अपराधी पीड़ित से हजारों किलोमीटर दूर होता है। जब तक पुलिस उस तक पहुंचती है, तब तक वह अपने छिपने का जुगाड़ कर चुका होता है। ठगों ने सरकारी से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर सुविधाएं और सब्सिडी देने के नाम पर ठगी की। पेमेंट एप, केवाईसी, सिम अपग्रेड कराने, फिशिंग लिंक, कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर और धोखे से अश्लील वीडियो बनाकर भी ठगी की।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नौकरी और कल्याणकारी योजनाओं का झांसा देकर 1.49 लाख से अधिक लोगों को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें महज आठ मामले दर्ज कर 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। फर्जी कॉल सेंटर के 11 मामले दर्ज हुए, जबकि 14600 से अधिक लोगों के साथ ठगी की गई। पुलिस ने इस मामले में 138 लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि पुलिस आयुक्त ज्यादातर मामलों में खुद अपनी पीठ थपथपाते हुए नजर आए।
अचानक आए गुस्से के कारण हुईं 21 फीसदी हत्याएं
रोज परिवार से बिछड़ जाते हैं 14 मासूम
पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव के मुताबिक, राजधानी में रोज 14 मासूम अपने परिवार से बिछुड़ जाते हैं। हर वर्ष दिल्ली में पांच हजार से ज्यादा बच्चे गायब होते हैं। दिल्ली पुलिस ने ऐसे बच्चों को ढूंढने के लिए अगस्त-2020 में विशेष अभियान चलाया था। इसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ढूंढने पर ज्यादा जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि 50 से ज्यादा बच्चों को तलाशने वाले पुलिसकर्मियों को बारी से पहले (आउट ऑफ टर्न) तरक्की देने की घोषणा की गई है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि बारी से पहले तरक्की का दावा तभी बनेगा, जब 50 में से 15 बच्चे 8 साल या उससे कम के हों। समयपुर बादली थाने में तैनात हवलदार सीमा ढाका को 50 बच्चे ढूंढने पर बारी से पहले तरक्की देकर एएसआई बनाया गया है। इसके अलावा, 15 लापता बच्चों को ढूंढने पर असाधारण कार्य पुरस्कार दिया जाता है। इससे सात पुलिसकर्मियों को नवाजा गया है।
यह रहे आंकड़े
. 8 वर्ष तक के 328 बच्चे लापता हुए। इनमें 186 लड़के व 142 लड़कियां थीं। इनमें से 226 को ढूंढ लिया गया।
. 8 से 12 वर्ष उम्र के 385 बच्चे गायब हुए। इनमें 249 लड़के व 136 लड़कियां हैं। इनमें से 308 को ढूंढ लिया गया है।
. 12 से 18 वर्ष की उम्र के 3584 बच्चे गायब हुए। इनमें 737 लड़के व 2847 लड़कियां थीं। इनमें 2723 बच्चों को ढूंढ लिया गया।
. 4052 बच्चों को इस वर्ष तलाश लिया गया है।