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वैज्ञानिकों का दावा : सलाह लिए बगैर एन-440 वैरिएंट का झूठ स्वीकारा, सवालों में दिल्ली सरकार
Sat, 08 May 2021 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 08 May 2021 04:03 AM IST
सार
- आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आने वालों के क्वारंटीन किए जाने का मामला
- न किसी से पूछा, न ली वैज्ञानिक सलाह, डीडीएमए की बैठक में सुना दिया फैसला
- वैज्ञानिकों ने कहा, विज्ञान को समझे बिना नहीं जीत सकेंगे लड़ाई
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- फोटो : pixabay
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विस्तार
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को लेकर दिल्ली सरकार का फैसला एक फिर सवालों के घेरे में है। इस बार वैज्ञानिकों से बगैर सलाह लिए सरकार ने एन-440 वैरिएंट के झूठ पर विश्वास कर लिया और आदेश जारी करते हुए दोनों राज्यों से आने वालों को क्वारंटीन करने के लिए कहा। इस पर वैज्ञानिकों ने काफी आपत्ति जताई है। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसे कोई भी सरकार महामारी की लड़ाई को जीत नहीं सकती है। वैज्ञानिक तथ्यों पर ध्यान न देने से काफी नुकसान हो सकता है।
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दरअसल, एक दिन पहले दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक में कहा गया था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, जो काफी घातक है। इसकी वजह से उच्च स्तर का संक्रमण बढ़ेगा और बीमारी भी गंभीर होगी। इसलिए बैठक में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से दिल्ली आने वालों को 14 दिन के लिए सरकार के क्वारंटीन केंद्र या फिर प्राइवेट केंद्र में रहना होगा। इसके लिए बाकायदा जिला प्रशासनों को जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।
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नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर आईजीआईबी के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि यह खबर पूरी तरह से गलत है। एन440के वैरिएंट को लेकर झूठी जानकारी फैली है, जिस पर सरकार ने भरोसा किया है। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा पहले ही कह चुके हैं कि यह कोई नया वैरिएंट नहीं है। पिछले साल यह आंध्र प्रदेश के कुछ मरीजों में मिला था, लेकिन इस साल फरवरी से अब तक सामने आए सैंपल में इसकी मौजूदगी न के बराबर ही मिली है। इसके अनुसार यह कहा जा सकता है कि अब यह वैरिएंट गायब होने लगा है। ऐसे में सरकार भ्रामक जानकारी पर भरोसा कर नए वैरिएंट का हवाला देकर कैसे फैसला ले सकती है?
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आदेश में नए स्ट्रेन का नाम नहीं
डीडीएमए ने अपने आदेश में कहीं भी नए स्ट्रेन का नाम उजागर नहीं किया है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले एक साल में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यही एकमात्र वैरिएंट मिला है। इससे पहले भारत सरकार के डीबीटी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप भी कह चुकी हैं कि सभी स्ट्रेन वैरिएंट हो सकते हैं, लेकिन हर वैरिएंट वायरस का स्ट्रेन नहीं हो सकता है।
फिलहाल केरल में मिला
सीसीएमबी में जीनोम सिक्वेसिंग देख रहे दिव्य सोपति का कहना है कि एन440के वैरिएंट फिलहाल केरल के 20 फीसदी सैंपल में मिला है। इसके अलावा कहीं और राज्य में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। न तो यह वैरिएंट 15 गुना अधिक जानलेवा है और न ही यह नया है। उन्होंने कहा कि इस वक्त लोगों में पहले से ही काफी खौफ और सदमा है। झूठी खबरों को बढ़ावा देने से काफी नुकसान हो सकता है।
अब तक दिल्ली में ये स्ट्रेन मिले
केंद्र सरकार के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के अनुसार अब तक दिल्ली में यूके, दक्षिण अफ्रीका और डबल म्यूटेशन की पुष्टि हुई है, लेकिन एन440के वैरिएंट का कोई मामला सामने नहीं आया है।
इनके मुताबिक बी.1.1.7 नामक यूके वैरिएंट 482 मरीज दिल्ली में मिल चुके हैं जिनमें से केवल 91 मरीज ऐसे थे जो विदेशों से संक्रमित होकर आए थे या फिर उनके संपर्क में आने के बाद परिजन संक्रमित हुए थ्रे, लेकिन इन लोगों के संपर्क में आने से दिल्ली के काफी लोग भी कोरोना की चपेट में आए और उनमें से 391 सैंपल में यूके वैरिएंट की पुष्टि भी हो गई।
ठीक इसी तरह बी.1.351 नामक दक्षिण अफ्रीका के वैरिएंट से दिल्ली में 23 लोग संक्रमित हुए, जिनमें चार विदेशों से संक्रमित होकर दिल्ली आए थे। इन्हीं चार ने अन्य 19 लोगों को संक्रमित कर दिया जो न कभी विदेश गए थे और न ही उनके परिवार से कोई गया। ठीक इसी तरह डबल म्यूटेशन के दिल्ली में 107 मामले मिले। जिनमें से एक मरीज विदेश से लौटकर आया था, लेकिन बाकी 106 मरीज राजधानी में ही संक्रमित हुए। एल452आर और ई484क्यू नामक वैरिएंट ने मिलकर डबल म्यूटेशन किया था।