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दिल्ली : पिता ने फर्जी दस्तावेज से करवाया दाखिला, बच्चे की मासूमियत से खुली पोल
Fri, 15 Oct 2021 04:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विजय सिंघल, नई दिल्ली
विजय सिंघल, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 15 Oct 2021 04:11 AM IST
सार
नाम बदल कर संस्कृति स्कूल में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में करवाया था दाखिला। बच्चे ने स्कूल में नए नाम से बुलाने पर जताई थी आपत्ति। अदालत ने आरोपी पिता को दी अग्रिम जमानत।
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विस्तार
एक व्यवसायी ने फर्जी दस्तावेज के जरिये अपने बेटे व पिता का नाम परिवर्तन कर चाणक्यपुरी स्थित संस्कृति स्कूल में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला करवा दिया लेकिन बच्चे की मासूमियत से पूरे मामले का खुलासा हो गया। दरअसल बच्चे ने अन्य बच्चों व टीचर द्वारा अपने नए नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसका नाम यह नहीं बल्कि कुछ और है। आखिर संस्कृति स्कूल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। हाईकोर्ट ने बच्चे के पिता को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
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मामले में दिलचस्प बात है कि उक्त बच्चे का पहले नई दिल्ली स्थित डीपीएस में पहली कक्षा में दाखिला करवाया गया था लेकिन संस्कृति स्कूल में दाखिले के बाद बच्चा उक्त स्कूल में नहीं गया जिस कारण स्कूल प्रशासन ने मात्र दो दिन आने व फीस जमा न करने पर उसका नाम स्कूल से हटा दिया। उधर संस्कृति स्कूल में मामले का खुलासा होने के बाद उसके पिता ने डीपीएस में करीब छह माह की फीस अदा कर पुन: दाखिला करवा लिया।
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आरोपी एवं बच्चे का पिता गौरव गोयल मलकागंज बंगला रोड पर रहता है। याची ने कहा कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है जबकि उसका बेटा तो डीपीएस में पढ़ता है और संस्कृति स्कूल में उसका बड़ा बेटा पढ़ता है और उसने चाहा था कि उसका छोटा बेटा भी उसी स्कूल में पढ़े। याची ने कहा कि उसका सपना है कि उसके बच्चे प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ें।
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अदालत में पुलिस के तर्क
उधर चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि स्कूल प्रशासन की शिकायत पर जांच में पाया गया कि गैरकानूनी रूप से दस्तावेज तैयार कर बच्चे का नाम व उसके पिता का नाम कपल निवासी रेलवे कालोनी संजय कैंप चाणक्य पुरी दर्शा कर नर्सरी में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला करवाया गया।
स्कूल प्रशासन के अनुसार कक्षा में जब बच्चे को नए नाम से बुलाया जाने लगा तो बच्चे ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उसका नाम दूसरा है और पिता का नाम भी गलत लिखा गया है।
पुलिस ने कहा कि जांच में पता चला कि बच्चे को स्कूल से शाहदरा निवासी नितिन शर्मा मोटर साइकिल पर लेने आता था। नितिन को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह गौरव गोयल के पास नौकरी करता है। वह बच्चे को स्कूल से मोटर साइकिल पर लेकर कुछ दूर जाता था। वहां से बच्चे को स्कोडा व आई-20 कार से घर छोड़ कर आता था। इसके अलावा गौरव ने धमकी दी थी कि यदि उसने किसी को इस तथ्य की जानकारी दी तो उसे नौकरी से निकाल देगा।
पहले भी की थी दाखिले की कोशिश
पुलिस ने अदालत को बताया कि गौरव ने शैक्षणिक सत्र 2018-19 में अपने बच्चे के असली नाम से नर्सरी में दाखिले के लिए फार्म भरा था लेकिन दाखिला न मिलने पर उसने शैक्षणिक सत्र 2019-20 में फर्जी दस्तावेज से ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला करवा लिया। दो सत्रों में फार्म पर लगी बच्चे की फोटो एक ही है।
डीपीएस में जांच करने पर पता चला कि उनके स्कूल में वर्ष 2018 में इस नाम के किसी बच्चे का दाखिला नहीं हुआ था बल्कि 28 फरवरी 2019 को इस नाम से पहली कक्षा में सामान्य श्रेणी में बच्चे का दाखिला हुआ था। उक्त बच्चा मात्र दो दिन यानि पांच और 15 अप्रैल को ही स्कूल आया और उसके बाद कभी स्कूल में नहीं आया।
स्कूल ने बच्चे के पिता को कई बार नोटिस भेजे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिर छह अगस्त 20 को बच्चे के पिता ने पत्र लिखकर पुन: दाखिले का आग्रह किया व पूरी फीस जमा करवा दी। पुलिस ने कहा कि संस्कृति स्कूल का मामला प्रकाश में आने के बाद ही यह सब हुआ है।
न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद कहा कि फर्जी दस्तावेज बने या नहीं यह मुद्दा ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के बाद ही तय होगा। फिलहाल वे आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान करती हैं। अदालत ने उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर जमानत प्रदान कर दी। अदालत को आरोपी को देश से बाहर न जाने, गवाहों को प्रभावित न करने, जांच में सहयोग करने व जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर देने का निर्देश दिया है।