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कोरोना काल में दानवीरों ने 9 हजार मरीजों को दिया रक्त, प्लाज्मा भी देते हैं स्वास्थ्यकर्मी

Sun, 10 Jan 2021 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 10 Jan 2021 05:37 AM IST
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Delhi news: During the Corona period donors gave blood to 9 thousand patients
blood donation - फोटो : pixabay

कोरोना काल के दौरान राजधानी में कई अस्पताल रक्त की कमी से जूझ रहे थे। संक्रमण के डर के कारण लोग अस्पताल आकर रक्तदान करने से घबरा रहे थे। इसके चलते कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में इन मरीजों की सहायता का बीड़ा एम्स और सफदरजंद अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम ने उठाया। इन लोगों ने बीते 10 माह में 15 रक्तदान शिविर लगाकर तीन हजार यूनिट रक्त एकत्र किया, जो दिल्ली में इलाज करा रहे करीब 9 हजार मरीजों के इलाज में काम आया। 

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एम्स के डॉक्टर विजय गुर्जर ने बताया कि कोरोना काल में अस्पतालों में रक्त की काफी कमी थी। इससे मरीजों के लिए ब्लड की व्यवस्था करने में काफी परेशानी हो रही थी। एम्स और सफदरजंग के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इस समस्या का समाधान करने लिए रक्तदान शिविर लगाए। एक टीम के अंतर्गत सभी लोगों ने काम किया और दिल्ली के कई स्थानों पर शिविर लगाकर रक्त एकत्र किया। यहां एकत्र किया गया बल्ड राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। जिससे मरीजों का इलाज होने में मदद मिली। 
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इस टीम के सदस्य और एम्स के नर्सिंग अधिकारी कनिष्क यादव ने बताया कि शिविर लगाने से पहले लोगों को रक्तदान के महत्व के विषय में जागरूक किया जाता था। इसके लिए वह सोशल मीडिया का सहारा लेते थे और दिल्ली के कई स्थानों पर पोस्टर भी लगाया करते थे। महीने भर पहले से शिविर की तैयारियां शुरू हो जाती थी। उन्होंने बताया कि इस कार्य में एम्स के डॉक्टर अमरींद्र मल्ही, डॉक्टर पवन , डॉक्टर अमित मालवीय और सफदजंग अस्पताल के डॉक्टर मनोज नागर, नर्सिंग अधिकारी राजेंद्र सेहरा, निशात प्रताप शामिल हैं। यह सभी डॉक्टर अपनी ड्यूटी के बाद इस कार्य में लग जाते थे। हर 15 दिन में शिविर के आयोजन के विषय में रूपरेखा तैयार की जाती थी। कड़ी मेहनत के चलते ही प्रति शिविर करीब 200 यूनिट ब्लड एकत्र किया जाता था।  जो थैलेसिमिया से लेकर अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के काम आता था। 
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प्लाज्मा दान भी करते हैं स्वास्थ्य कर्मी
शिविर लगाने वाली टीम के सदस्य और सफदरजंग अस्पताल के नर्सिंग अधिकारी निक्की जांगिड ने बताया कि टीम के सभी सदस्य कोरोना मरीजों की सहायता के लिए प्लाज्मा दान भी कर चुके हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इसमें अस्पतालों के कर्मचारियों को प्लाज्मा के विषय में जागरूक किया गया था। इससे प्ररेणा लेकर अस्पतालों के करीब एक हजार कर्मचारी प्लाज्मा दान कर चुके हैं। स्वास्थ्य कर्मी विश्राम मीणा ने बताया कि वह अबतक करीब चार बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं।


रक्तदान से नहीं है कोई नुकसान
डॉक्टर अमित मालवीय ने कहा कि  एक स्वस्थ व्यक्ति 65 वर्ष की आयु तक रक्तदान कर सकता है, प्रत्येक तीन महीने में एक बार अर्थात वर्ष में चार बार रक्तदान कर सकता है और स्वस्थ रह सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान मानव शरीर को कई लाभ पहुंचाता है। यह दिल के दौरे को रोकता है, रक्तचाप नियंत्रित करता है, इससे रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नीचे जाता है और मोटापा भी कम होता है। संक्षेप में, यह मानव सेवा के साथ स्वाथ्य की सुरक्षा है।

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