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अमर उजाला खास : परिवार नियोजन के मामले में गंभीर नहीं हैं दिल्लीवाले
Thu, 18 Mar 2021 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 18 Mar 2021 04:02 AM IST
सार
- 30 साल से कम आयु में प्रजनन दर घटी
- पुरुषों के साथ महिला नसबंदी में आई कमी
- गर्भनिरोधक तौर तरीके अपनाने में भी दिल्ली वालों की रुचि नहीं
- दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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सांकेतिक चित्र...
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली में परिवार नियोजन से जुड़े आंकड़ें काफी चौंका रहे हैं। पिछले सात वर्षों में दिल्ली में परिवार नियोजन को लेकर लोगों की गंभीरता में लगातार कमी देखने को मिली है। वहीं इस बीच 30 वर्ष से कम आयु में प्रजनन दर घटी है। इसके अलावा 15 से 19 वर्ष के बीच प्रजनन दर अभी भी 3.2 फीसदी है। गर्भनिरोधक से जुड़े तौर तरीकों के बारे में बात करें तो दिल्ली के लोगों में वहां भी गंभीरता कम ही दिखाई दे रही है।
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दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन से जुड़ी जानकारी पर रिपोर्ट तैयार की है जिसे आर्थिक सर्वे में भी शामिल किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार पुरूषों के साथ महिलाओं में भी नसबंदी के प्रति दिलचस्पी कम हुई है। आंकड़ों पर ही गौर करें तो ऐसा लगता है कि गर्भनिरोधक तौर तरीके अपनाने में भी दिल्ली वालों की रूचि नहीं है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013 से लेकर 2019-20 के बीच नसबंदी को लेकर लगातार कमी देखने को मिली है। 2013 में 19181, 2014 में 17458, 2015 में 17383, 2016 में 18869, 2017 में 17004, 2018 में 17531 और 2019-20 में 18392 नसबंदी हुई हैं। वहीं गर्भनिरोधक तौर तरीकों की बात करें तो साल 2013 में दो लाख से भी अधिक गर्भनिरोधक गोलियां दी गई थीं लेकिन सात वर्षों में करीब 20 फीसदी से भी ज्यादा कमी देखने को मिली है।
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वर्ष 2019-20 के दौरान 162,564 गोलियां ही दी गईं। जानकारी के अनुसार दिल्ली में इस समय 41 परिवार नियोजन केंद्र हैं। जहां पर सबसे ज्यादा महिलाएं नसबंदी कराने के लिए पहुंचती हैं। पिछले एक साल में 740 पुरुषों ने नसबंदी कराने के लिए पंजीयन कराया है तो इसी दौरान 17652 महिलाओं ने पंजीयन कराया। इनसब के बीच प्रजनन दर के आंकड़ें बता रहे हैं कि 2013 से 2019-20 के बीच 15 से 30 वर्ष की आयु में प्रजनन दर कम हुई है।
प्रजनन दर घटाने का लक्ष्य
राष्ट्रीय स्तर पर प्रजनन दर को 2.37 से घटाकर 1.7 फीसदी तक लाने के लिए वर्ष 2030 तक लक्ष्य रखा गया है लेकिन दिल्ली में व्अभी यह दर 1.5 है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार नियोजन के प्रति दिल्ली वालों की गंभीरता कम होना चिंता की बात है लेकिन वहीं प्रजनन दर बढ़ने से थोड़ी राहत जरूर मिलती है।
दिल्ली एम्स की प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरजा भाटला का कहना है कि गर्भनिरोधक तौर तरीके और नसबंदी को लेकर दिल्ली में अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा बेहतर कार्य होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस लेकर सरकारों को भी अभियान चलाने चाहिए। बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिहाज से इन मुद्दों पर बात होना बहुत जरूरी है।