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दिल्ली में कोरोना की जांच से महंगा है एंटीबॉडी का पता लगाना
Thu, 18 Feb 2021 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 18 Feb 2021 05:49 AM IST
सार
- कोरोना वायरस की आड़ में एंटीबॉडी जांच पर प्राइवेट सेंटर दे रहे जोर
- एंटीबॉडी जांच डीजीएचएस और इश्योरेंस योजनाओं से भी है बाहर
- सस्ती जांच होने के बाद भी एंटीबॉडी जांच की कीमतें दो गुना अधिक
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एंटीबॉडी परीक्षण
- फोटो : social media
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विस्तार
दिल्ली के स्वरूप नगर निवासी 42 वर्षीय विवेक सचदेवा बताते हैं कि कुछ दिन पहले वह रुटीन ब्लड जांच के लिए एक निजी लैब गए थे जहां उन्हें कोविड एंटीबॉडी जांच के लिए 40 फीसदी का ऑफर मिला। चूंकि उनका उपचार अपोलो अस्पताल में चल रहा है और वहां डॉक्टरों ने 6 फरवरी को कोविड जांच कराकर ही आने के लिए कहा था इसलिए उन्हें लगा कि एंटीबॉडी जांच करा लेना चाहिए। तब तक उन्हें आरटी पीसीआर की जांच के बारे में जानकारी नहीं थी कि इसकी कीमत कितनी है?
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लैब में एंटीबॉडी जांच 950 और 1400 दो अलग अलग कीमतों में की जा रही थी। दोनों जांच में अंतर के बारे में पूछा तो कई तरह की जानकारी दी गई। इसे इम्युनिटी चेकअप नाम से भी बेचा जा रहा है। उन्होंने भी जांच कराई लेकिन रिपोर्ट में एंटीबॉडी नहीं मिलीं। इसे लेकर जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने आरटी पीसीआर जांच कराने की सलाह दी। ठीक ऐसा ही मामला 36 वर्षीय रोहिणी सेक्टर 21 निवासी पंकज वत्स के साथ हुआ। उनके पास डीजीएचएस का कार्ड था लेकिन उन्हें पता चला कि एंटीबॉडी जांच इसके दायरे में नहीं आती है। हालांकि वह जानते थे कि चिकित्सीय तौर पर यह जांच अनिवार्य नहीं है लेकिन उस दौरान लैब में उन्हें तमाम तरह के ऑफर दिए ताकि वह जांच करा लें।
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ऐसे मामले दिल्ली में अक्सर देखने को मिल रहे हैं। यहां कोरोना की जांच से महंगा वायरस के खिलाफ बनने वाले एंटीबॉडी का पता लगाना है। लोगों को राहत देने और कोविड की जांच को बढ़ाने के लिए सरकार ने आरटी पीसीआर जांच की कीमतों पर मूल्य नियंत्रण लागू कर दिया लेकिन एंटीबॉडी जांच इसके दायरे से बाहर है। यही वजह है कि प्राइवेट क्षेत्र भी बड़ा मुनाफा कमाने के लिए एंटीबॉडी जांच के लिए तरह तरह के ऑफर लोगों को दे रहा है। मैसेज, फोन कॉल और ईमेल के जरिए लोगों को 30-40 फीसदी का ऑफर तक दिया जा रहा है। जबकि यह जांच सिर्फ और सिर्फ निगरानी के लिए होती है, उपचार के लिए नहीं।
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जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस की शुरूआत होने के बाद दिल्ली में आरटी पीसीआर जांच की कीमत 2400 रुपये थी लेकिन समय के साथ किट्स का घरेलु उत्पादन बढ़ने से इनकी कीमतों पर भी असर पड़ा। इसके चलते दिल्ली सरकार ने अधिकतम 800 रुपये का शुल्क तय किया। सरकारी क्षेत्र में यह जांच निशुल्क है लेकिन प्राइवेट अस्पताल या लैब में इसके लिए 800 रुपये से अधिक नहीं लिए जा सकते हैं। वहीं एंटीबॉडी जांच के बारे में बात करें तो इसकी कीमत में अधिकतम सीमा नहीं है। कहीं एक हजार तो कहीं 1400 रुपये देकर एंटीबॉडी जांच कराई जा रही है। आरटी पीसीआर की तुलना में करीब दोगुना तक महंगी इस जांच में मुनाफा भी ज्यादा होता है।
गौर करने वाली बात है कि कोरोना की एंटीबॉडी जांच न तो सरकारी स्वास्थ्य योजना (डीजीएचएस) के अंतर्गत आती है और न ही किसी इश्योरेंस कंपनी से मेडिक्लेम मिलता है। यही वजह है कि शरीर में एंटीबॉडी का पता लगाने वाली इस जांच पर ध्यान नहीं है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एंटीबॉडी जांच को लेकर अभी कोई मूल्य नियंत्रण की योजना भी नहीं है।
जबकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि देश में काफी मात्रा में जांच किट्स का उत्पादन हो रहा है। अब एक किट की कीमत करीब 140 से 150 रुपये के आसपास है। ऐसे में जांच की कीमत और भी कम होनी चाहिए। आईसीएमआर और स्पाइस जेट ने मिलकर मोबाइल जांच सुविधा शुरू की है जिसमें 500 रुपये में आरटी पीसीआर जांच हो रही है। दिल्ली में ही कई जगहों पर एंटीबॉडी जांच 500 रुपये में भी हो रही है। कोविड जांच कीमतों को लेकर अधिकार राज्य के पास है।