दिल्ली मेट्रो : पार्किंग को है लावारिस वाहन मालिकों का इंतजार, ये भी है आशंका
कोरोना काल में कई लोगों की नौकरियां छूटने के बाद मूल राज्यों से अब तक नहीं लौटने वालों के साथ साथ इनमें चोरी के कुछ वाहन भी पार्क किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
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कोरोना काल में दिल्ली मेट्रो की पार्किंग में कुछ लोगों मे वाहन तो खड़े किए लेकिन वापस लेने नहीं आए। खास बात यह है कि दिल्ली मेट्रो की 100 से अधिक पार्किंग में छोड़े गए 153 वाहनों में 50 फीसदी से अधिक गुरुग्राम, गाजियाबाद और नोएडा के मेट्रो स्टेशनों के हैं। कोरोना काल में कई लोगों की नौकरियां छूटने के बाद मूल राज्यों से अब तक नहीं लौटने वालों के साथ साथ इनमें चोरी के कुछ वाहन भी पार्क किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली मेट्रो की तरफ से वाहन मालिकों को नोटिस भेजकर वाहनों को जल्द ले जाने को कहा गया है। फिर भी पार्किंग से अगर वाहनों को नहीं ले जाया गया तो इन्हें स्क्रैप कर दिया जाएगा।
पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान मेट्रो सेवाएं छह महीने तक मेट्रो सेवाएं बंद रही थी। बावजूद इसके 2020 में अधिकतर वाहनों की पार्किंग कर दी गई। पार्किंग कर्मचारियों के मुताबिक इनमें से ऐसे भी वाहन हैं जिन्हें गांव से लौटकर दोबारा ले जाने की बात कही गई थी। मगर, अभी भी इन वाहनों को लेने के लिए कोई नहीं पहुंचा। इस साल फरवरी से भी 3-4 वाहन पार्किंग में ही हैं, जिनका दावा करने के लिए कोई नहीं पहुंचा है।
कबाड़ बन चुकी कारें भी हैं पार्किंग में
उद्योग नगर, नांगलोई, मुंडका, घिटोरनी, आजादपुर, पश्चिम विहार, मूलचंद, गोविंदपुरी, उत्तम नगर, आरके आश्रम, मोतीनगर सहित एनसीआर के स्टेशनों की पार्किंग में 20 से अधिक कारें हैं। इंद्रप्रस्थ में ऐसे 13 वाहन पार्किंग में खड़े हैं।
मानसरोवर पार्क, पुल बंगश, छतरपुर सहित दूसरे मेट्रो स्टेशनों पर करीब 85 फीसदी वाहन टू व्हीलर हैं। कुछ पुराने वाहनों में नैनो और सूमो, मारुति 800 है, जिन्हें दिल्ली में चलने की इजाजत नहीं है। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि कुछ लोगों ने कबाड़ बन चुके वाहनों को भी पार्किंग में छोड़ दिया।
एनसीआर के शहरों में वाहनों की पार्किंग
गुरु द्रोणाचार्य-04
सिकंदरपुर-10
एमजी रोड-14
हुडा सिटी सेंटर-32
नोएडा सिटी सेंटर-11
कौशाम्बी-06
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कुल-77
...मेट्रो फेज-4 के शेष कॉरिडोर की राह नहीं है आसान
कोविड महामारी काल में आर्थिक तंगी का असर मेट्रो परियोजनाओं पर भी पड़ने की लगा है। करीब छह महीने तक मेट्रो सेवाएं बंद होने से आर्थिक नुकसान से उबरने से पहले दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन(डीएमआरसी) के लिए फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर की तीन परियोजनाओं पर केंद्र से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
लॉकडाउन के दौरान डीएमआरसी को करीब 2000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। केंद्र सरकार के अलावा हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी डीएमआरसी का करोड़ों का बकाया है। ऐसे में मेट्रो फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर की राह में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
दिल्ली सरकार भी महामारी काल में आर्थिक तंगी से जूझ रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इसका असर डीएमआरसी परियोजनाओं पर भी पड़ेगा। राजस्व में कमी की वजह से दिल्ली सरकार ने फिलहाल मेट्रो फेज-4 के तीनों कॉरिडोर को प्राथमिकता सूची से बाहर कर दिया है।
फेज-4 के तीन कॉरिडोर को नहीं मिली है मंजूरी
दिल्ली मेट्रो के फेज-4 परियोजनाओं के करीब 65 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो निर्माण का कार्य चल रहा है। इनमें आरके आश्रम-जनकपुरी(28.9कि.मी), तुगलकाबाद-एयरोसिटी(23.62 कि.मी)जबकि मौजपुर-मजलिस पार्क(12.55कि.मी)पर निर्माण शामिल है।
....कम लागत के विकल्पों की तलाश
आर्थिक तंगी को देखते हुए नरेला-बवाना कॉरिडोर पर मेट्रो लाइट चलाने का प्रस्ताव है। मेट्रो लाइट परियोजनाओं पर लागत करीब 30 फीसदी कम होने की वजह से आगे भी दूसरी परियोजनाओं को कम लागत की परियोजनाओं में बदलने की दिशा में पहल की जा सकती है।
मेट्रो फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर की राह नहीं है आसान
करीब दो साल से मेट्रो फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर से संबंधित फाइल लंबित है।कीर्ति नगर से बामनौली के बीच एक और कॉरिडोर बनाने की योजना है। इसे कम लागत की परियोजना में परिवर्तित करने के लिए दूसरी संभावनाएं भी तलाशी जा रही है। तीनों परियोजनाओं पर मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू करने से पहले कई वित्तीय तंगी से उबरना होगा। कोविड काल में राजस्व की कमी के कारण फेज-4 के 43.45 किलोमीटर में प्रस्तावित कॉरिडोर की राह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं।
सरकार के राजस्व में कमीजायका लोन से मेट्रो फेज-4 को थोड़ी राहत
पिछले दो वर्ष से राजस्व में आई गिरावट के बाद दिल्ली सरकार को वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार को लक्ष्य से करीब 41 फीसदी कम राजस्व की प्राप्ति हुई। चालू वित्त वर्ष में भी सरकार के राजस्व में 23 फीसदी तक की कमी से फिलहाल मेट्रो फेज-4 परियोजनाओं पर काम शुरू होने की उम्मीदें कम दिख रही हैं।
कम राजस्व प्राप्ति से बढ़ी मेट्रो की राह में चुनौतियां
दिल्ली सरकार को अनुमान से कम राजस्व की प्राप्ति से तीनों शेष कॉरिडोर के लिए फिलहाल वित्तीय सहायता की दिशा में पहल किए जाने की कम उम्मीद हैं।
डीएमआरसी को लॉकडाउन के दौरान अलग अलग मदों में करीब 2000 करोड़ से अधिक का वित्तीय नुकसान हो चुका है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत केंद्र सरकार से करोड़ों का बकाया न मिलने की वजह से मेट्रो फेज-4 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
जायका लोन से फेज-4 में मिलेगी राहत
जापान की एजेंसी जायका ने इसी साल डीएमआरसी को 8150 करोड़ के ऋण को मंजूरी दे दी है। इससे तीन मौजूदा कॉरिडोर पर काम भी चल रहा है। शेष तीन कॉरिडोर पर हरी झंडी मिलने के बाद ही इस परियोजना पर डीएमआरसी की ओर से अगला कदम बढ़ेगा। इसके तहत नरेला-रिठाला-बवाना(22.91 कि.मी), लाजपत नगर से साकेत(7.96 कि.मी) जबकि इंद्रप्रस्थ से इंद्रलोक के बीच (12.58कि.मी) पर मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव है। हाल ही में भारत में जापान के राजदूत ने भी डीएमआरसी को आगे भी वित्तीय सहायता जारी रखने का भरोसा दिया है।