{"_id":"632e35eebf70ad65f36f1412","slug":"delhi-high-court-directed-aiims-to-abort-pregnant-minor","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : हाईकोर्ट ने एम्स को दिया सहमति संबंध से गर्भवती नाबालिग के गर्भपात का निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : हाईकोर्ट ने एम्स को दिया सहमति संबंध से गर्भवती नाबालिग के गर्भपात का निर्देश
Sat, 24 Sep 2022 04:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 24 Sep 2022 04:10 AM IST
सार
उच्च न्यायालय ने सहमति संबंध से गर्भवती एक नाबालिग के गर्भपात कराने के आग्रह को स्वीकार करते हुए केंद्र को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया एम्स, दिल्ली में सरकारी खर्च पर की जाए।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उच्च न्यायालय ने सहमति संबंध से गर्भवती एक नाबालिग के गर्भपात कराने के आग्रह को स्वीकार करते हुए केंद्र को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया एम्स, दिल्ली में सरकारी खर्च पर की जाए।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा मामले में दी इस दलील से पूरी तरह सहमत है कि एमटीपी अधिनियम और पोक्सो अधिनियम के बीच सामंजस्य के संबंध में बहस में प्रवेश करने के बजाय इस समय यह आवश्यक है कि याचिकाकर्ता की बेटी की गर्भावस्था को तुरंत समाप्त कर दिया जाए।
विज्ञापन
रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखा जाना चाहिए
कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार कानून के मुताबिक मामले में आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन पुलिस द्वारा दर्ज की गई किसी भी रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को सुनवाई के लिए 18 जनवरी 2023 तय की है। सरकारी और निजी अस्पतालों ने पहले गर्भावस्था को समाप्त करने से इन्कार कर दिया था क्योंकि किशोरी का परिवार पुलिस को मामले की रिपोर्ट करने के लिए तैयार नहीं था।
विज्ञापन
नाबालिग का कल्याण सर्वोपरि
अदालत ने 16 सितंबर को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से मामले में पेश होने और अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया था। 20 सितंबर को भाटी ने तर्क दिया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट और पोक्सो एक्ट को सामंजस्यपूर्ण रूप से पढ़ा जाना चाहिए और नाबालिग लड़की का कल्याण सर्वोपरि है। 9 सितंबर को जब मां नाबालिग को डॉक्टर के पास ले गई तो पता चला कि वह करीब 17 हफ्ते और 5 दिन की गर्भवती है।