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दिल्ली: हाईकोर्ट ने दी 24 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति, जन्म के बाद बच्चे के जीवन की संभावना थी बेहद कम
Sat, 09 Oct 2021 07:02 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 09 Oct 2021 07:02 PM IST
सार
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रूण एनेनसेफेली नामक बीमारी से पीड़ित था। हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर के अपने आदेश में कहा कि जब ये प्रत्यक्ष है कि एनेनसेफेली बीमारी से पीड़ित शिशु के जीवन की संभावना बेहद कम है और यदि जीवित भी रहा तो जीवन बेहद कठिनाईपूर्ण होगा।
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला को उसके 24 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सीय तरीके से समाप्त करने की अनुमति दी है। यह भ्रूण एनेनसेफेली नामक बीमारी से पीड़ित था। डॉक्टरों के अनुसार जन्म के बाद इसके जीवित रहने की संभावना बेहद कम थी। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने महिला की याचिका पर सुनवाई के बाद गर्भ समाप्त करने की अनुमति प्रदान कर दी।
उन्होंने कहा कि अगर जन्म के बाद शिशु जीवित रहता है तो उसका जीवन बेहद कठिनाईपूर्ण होगा। उन्होंने इसके मद्देनजर लेडी हार्डिंग अस्पताल में गर्भ को चिकित्सीय तरीके से समाप्त करने का निर्देश दिया।
मामले में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रूण एनेनसेफेली नामक बीमारी से पीड़ित था। हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर के अपने आदेश में कहा कि जब ये प्रत्यक्ष है कि एनेनसेफेली बीमारी से पीड़ित शिशु के जीवन की संभावना बेहद कम है और यदि जीवित भी रहा तो जीवन बेहद कठिनाईपूर्ण होगा। ऐसे में इस गर्भ को समाप्त करने की अनुमति याची को मिलनी चाहिए ताकि इसे तत्काल समाप्त किया जा सके क्योंकि पहले ही भ्रूण 24 सप्ताह का हो चुका है।
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अदालत ने इस मामले में तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर महिला की जांच करने के लिए लेडी हार्डिंग अस्पताल की प्रशंसा की। भ्रूण को ये बीमारी होने की बात सितंबर के अंत में पता चली थी।
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उन्होंने कहा कि अगर जन्म के बाद शिशु जीवित रहता है तो उसका जीवन बेहद कठिनाईपूर्ण होगा। उन्होंने इसके मद्देनजर लेडी हार्डिंग अस्पताल में गर्भ को चिकित्सीय तरीके से समाप्त करने का निर्देश दिया।
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मामले में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रूण एनेनसेफेली नामक बीमारी से पीड़ित था। हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर के अपने आदेश में कहा कि जब ये प्रत्यक्ष है कि एनेनसेफेली बीमारी से पीड़ित शिशु के जीवन की संभावना बेहद कम है और यदि जीवित भी रहा तो जीवन बेहद कठिनाईपूर्ण होगा। ऐसे में इस गर्भ को समाप्त करने की अनुमति याची को मिलनी चाहिए ताकि इसे तत्काल समाप्त किया जा सके क्योंकि पहले ही भ्रूण 24 सप्ताह का हो चुका है।
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अदालत ने इस मामले में तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर महिला की जांच करने के लिए लेडी हार्डिंग अस्पताल की प्रशंसा की। भ्रूण को ये बीमारी होने की बात सितंबर के अंत में पता चली थी।