Delhi Election 2020: चौंका सकते हैं दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे
- प्रचार भले न किया हो लेकिन लड़ रही है कांग्रेस
- मतदाताओं की लंबी कतार खिलाएगी गुल
- उम्मीद के मुताबिक नहीं चढ़ पाया हिंदुत्व का बुखार
- आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं है दिल्ली की राह
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विस्तार
सुमन के मुताबिक केजरीवाल की पार्टी ने बेवकूफ बनाया है। इसके उलट मनीषा का कहना है कि भाजपा और इसकी सरकार हिंदू-मुसलमान के सिवा कुछ नहीं कर पा रही है। बड़े-बड़े मुद्दों पर मोदी सरकार चुप है। स्नेहलता का कहना है कि दिल्ली में शीला सरकार के बाद काम नहीं हुआ।
स्नेहलता पेशे से शिक्षक हैं। उनके परिवार ने पिछली बार 2015 में भाजपा को वोट दिया था। 2013 में केजरीवाल को और 2008 और इससे पहले के दो चुनाव में कांग्रेस को वोट दिया था। कुछ इसी तरह के मतदान में दिल्ली का मतदाता वोट डालने बूथ तक आया है। भाजपा और आप के पास कार्यकर्ता, बूथ एजेंट सब हैं, कांग्रेस पार्टी के पास इसका अभाव दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इसके बाद भी दिल्ली में तमाम सीटों पर लड़ रही है। यह आम आदमी पार्टी के लिए बुरी तो भाजपा के लिए अच्छी खबर है।
नहीं चढ़ा हिंदुत्व का बुखार
करीब 35 पोलिंग बूथ पर जाने के बाद भाजपा और आप के बीच में ही मुकाबला साफ दिखाई दिया। गांधीनगर, कृष्णानगर जैसी कुछ सीटों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता सक्रियता से मिले, लेकिन मुख्य मुकाबला दो दलों के बीच ही दिखा। हां, उम्मीद के मुताबिक लोगों में हिंदुत्व का बुखार नहीं दिखाई दिया। लोग केवल शाहीनबाग को ही मुद्दा बना देना अच्छा नहीं मान रहे हैं।
शारदा इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक कर चुके अनिल कुमार के अनुसार यह केवल वोट लेने के लिए मुद्दा बनाया गया। कांग्रेस और आप ने अपने हिसाब से रंग दिया, तो भाजपा वोट का ध्रुवीकरण करने में लग गई। मनोज राठी का कहना है यह प्रयोग लोकतंत्र के लिए घातक है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रयास को ठीक नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस की भी शाहीनबाग की कोशिश अच्छी बात नहीं है।
इससे उलट मतदाताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार लोकप्रियता बनी हुई है। राहुल गांधी की छवि पहले से काफी कमजोर हुई है। प्रियंका में लोगों को उम्मीद दिखाई पड़ रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर लोगों की राय बहुत अच्छी नहीं है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी जनता के बीच एक नेता जैसी इमेज नहीं बना पाए हैं। सबसे चौंकाने वाली खबर है कि कामकाज के मामले में लोग मनीष सिसोदिया को केजरीवाल के मुकाबले ज्यादा अच्छा मान रहे हैं।
कॉलोनियों में उत्साह
दिल्ली में अपार्टमेंट और कोठियों में रहने वाले लोग बूथ तक वोट डालने कम आए। कॉलोनियों के लोगों में मतदान का उत्साह दिखाई दिया। हर जगह, हर कालोनी के बूथ पर लगातार मतदाताओं की लाइन लगी रही। प्रतिक्रिया में मिला जुला रेस्पांस मिला। अपार्टमेंट, कोठियों वाले बूथ पर ज्यादातर उम्रदराज वाले लोग वोट डालने का कर्तव्य निभाते नजर आए। युवाओं ने मतदान में कम उत्साह दिखाया।
आप को नुकसान
भाजपा ने फिर भी अच्छा प्रदर्शन किया है। 15 दिन के भीतर पार्टी आप के साथ कड़े चुनावी मुकाबले में लौटती दिखाई दे रही है। ऐसा अनुमान है कि आम आदमी पार्टी को बड़ी चोट लग सकती है। कांग्रेस का खता खुल सकता है। नतीजे भाजपा का सम्मान बनाए रख सकते हैं।