ऐसे तैयार होता है केजरीवाल का रंगमंच, जहां वे कभी मास्टर तो कभी स्टूडेंट का करते हैं 'अभिनय'
- आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक सभाओं में देखने को मिलता है उनका ये खास अंदाज
- अपनी जनसभाओं में दिल्ली के वोटरों से करते हैं सीधा संवाद,
- लोगों को मंच पर बुलाकर उनसे समस्या और उसका निदान भी जनता को सुनवाते हैं
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चाचा जी, भाई साहब, अंकल जी, मंच से अचानक केजरीवाल ऐसा कुछ बोलने लगते हैं। आप ऊपर आ जाएं। आइए, आइए शर्माओ मत, आ जाओ। सामने बैठे इन सब लोगों को अपनी समस्या बताओ। उसके बाद अरविंद केजरीवाल मंच पर आए उस शख्स के हाथ में झट से माइक थमा देते हैं। साथ ही वे यह कहना भी नहीं भूलते, ये खुश हैं लगता है जी, इनका पानी का बिल हजारों में नहीं आया। चलो, आप सभी को बता दो कि सस्ती बिजली, फ्री पानी और महिलाओं के लिए निशुल्क बस यात्रा कैसी लग रही है।
परिवार में सब खुश तो हैं। यह तो रही मास्टर की भूमिका। इसके बाद वे स्टूडेंट बनकर कहते हैं, देखिये जी, आप सब बड़े हैं, गलती किसी से भी हो सकती है।अगर कुछ हो तो मुझे माफ कर देना। बाकी मैंने आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। केजरीवाल के चुनावी रंगमंच यह सब कुछ देखने को मिलता है। इस रंगमंच पर वे कभी मास्टर तो कभी स्टूडेंट का अभिनय करते हैं। उनके मंच पर आने से पहले आप कार्यकर्ताओं की तरफ से खास तैयारी की जाती है।
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीतिक सभाओं में लोगों के साथ सीधा संवाद कर रहे हैं। उनके भाषण में कई नए प्रयोग देखने को मिलते हैं। केजरीवाल का यह अंदाज लोगों को भी पसंद आ रहा है। जनसभा संबोधित करने के लिए जब केजरीवाल मंच पर पहुंचते हैं, तो अचानक उनका कोई वालेंटियर उन्हें एक पर्ची थमा देता है। केजरीवाल उसे पढ़ते हैं और बोलने लगते हैं, आ जाओ भाई साहब आ जाओ। वह आदमी मंच पर पहुंचता है। आप संयोजक पहले उसका नाम पूछते हैं और फिर कहते हैं सुनाओ जी।
वह आदमी बहुत संक्षेप में अपनी कहानी सुनाता है। पहले पानी का बिल ही हजारों में आ रहा था, लेकिन पांच साल से वह जीरो है। बिजली का बिल भी इतना आता है कि उसे भरने के लिए सोचना नहीं पड़ता। केजरीवाल मास्टरी अंदाज में बोल उठते हैं कि अब इन लोगों को स्कूलों के बारे में तो बता दो। आपके बच्चों की पढ़ाई अब कैसी चल रही है। वे इसी तरह अपने भाषण के दौरान कई लोगों से संवाद करते हैं।
पिछले दिनों उन्होंने एक व्यक्ति से पूछा कि आप जिस पार्टी को वोट देते हैं, उसका नाम बताओ। उस व्यक्ति ने संकुचित भाव से एक राष्ट्रीय पार्टी का नाम ले दिया। केजरीवाल खुश हो गए और बोले, इस बार कुछ सोचा है। वह व्यक्ति हाथ जोड़कर बोलता है कि अबकी बार तो झाड़ू पर ही बटन दबेगा। उनका यह जवाब सुनकर सामने बैठे लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते। जब कहीं पर केजरीवाल से बड़ी आयु का कोई व्यक्ति मंच पर आता है, तो वे तुरंत स्टूडेंट के रोल में आ जाते हैं। झुक कर आशीर्वाद लेते हैं। परिवार में सब अच्छे है, यह सब पूछते हैं।
कई बार आप संयोजक उन्हें 'सर' कह कर भी बुलाते हैं। अपनी गलतियां मानते हुए कहते हैं देखो जी, आप मेरे पिता की आयु के हैं। मेरे बड़े हैं आप। मुझसे गलती हुई तो माफ करना। अगले पांच साल जो मिलेंगे, उनमें सारी कमी दूर कर दूंगा। इसके बाद वह व्यक्ति या महिला केजरीवाल के सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद देते हैं।
केजरीवाल बोलते हैं, धोखा हो गया जी धोखा...
इसके बाद केजरीवाल एक बार फिर सीधे लोगों से जुड़ जाते हैं। मंच से खड़े होकर वे कुछ लोगों को आगे बुलाते हैं। वे लोग कहते हैं, धोखा हो गया जी धोखा। केजरीवाल भी बोल उठते हैं, क्या हो गया जी, धोखा हो गया जी। भाजपा ने तो कहा था कि महंगाई कम होगी, ये तो उल्टा हो गया। ऐसा कोई काम बताओ जो भाजपा ने अच्छा कर दिया हो। उन लोगों के साथ आप नेता सीधा संवाद करते हुए कहते हैं कि मैंने प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी को सुना है। वे विकास की कोई बात नहीं करते। केवल बंटवारे की बात कहते हैं। दिल्ली के स्कूल, कालेज और सड़क बनाने संबंधी कोई घोषणा नहीं करते। उन्हें तो जी केवल शाहीन बाग नजर आता है। इसके अलावा उनके पास कुछ है भी तो नहीं।
यूं होती है रंगमंच की तैयारी
आप संयोजक के मंच पर पहुंचने से पहले वहां देशभक्ति गीतों के जरिए जनता के मुद्दों को उठाया जाता है। किसी कलाकार को बुलाकर सांप्रदायिक दंगों को लेकर कांग्रेस-भाजपा पर कटाक्ष होता है। खास बात है कि वहां पर दिल्ली पुलिस रहती है, लेकिन मंच और जनसभा स्थल का प्रबंधन आप वालेंटियर ही संभालते हैं। कौन व्यक्ति मंच पर रहेगा और कौन नीचे, ये सब वालेंटियर तय करते हैं। इस व्यवस्था में महिलाओं और युवाओं को शामिल किया जाता है।
आप वालेंटियर टोपी पहने कार्यकर्ताओं की जांच-पड़ताल भी करते हैं। मंच पर केवल चुनिंदा लोगों को ही बैठाया जाता है। मंच पर सभी वक्ताओं के लिए बोलने का एक नियम बना रखा है। वे आप के स्टार प्रचारक केजरीवाल का नाम ही ज्यादातर लेते रहेंगे। दिल्ली से जुड़े मुद्दों को ही अधिक तरजीह दी जाती है। जनसभा स्थल के आसपास केवल वही पोस्टर लगेंगे, जिनका डिजाइन पार्टी ने तैयार किया है। कोई भी आप नेता या कार्यकर्ता अपनी तरफ से कोई पोस्टर बैनर नहीं लगाएगा।
आप संयोजक के मंच पर पहुंचते ही सभी लोग खड़े हो जाते हैं। इसके बाद लगे रहो केजरीवाल, अच्छे बीते पांच साल, जैसा कोई गीत सुनाया जाता है। जनसभा में आने के लिए किसी भी व्यक्ति को वाहन की सुविधा नहीं दी जाती। वायरलेस सेट से लैस आप वालेंटियर भीड़ के बीच मौजूद रहते हैं। इसके अलावा आप की एक आईटी टीम वहां रहती है।
खुफिया कैमरों की मदद से हर व्यक्ति पर नजर रखकर यह पता लगाया जाता है कि वह किसी दूसरी पार्टी के बहकावे में आकर कोई हरकत करने की तैयारी में तो नहीं है। सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है, इस बाबत केजरीवाल को अवगत कराने के लिए उनके साथ दो सहयोगी चलते हैं।