दिल्ली : डीटीसी का सर्वर ठप, बस पास के लिए भटक रहे यात्री, सप्ताह भर में हो पाएंगे सामान्य हालात
सर्वर डाउन होने से उनका दैनिक व मासिक पास नहीं बन पा रहा है। ऑनलाइन भी पास नहीं मिल रहे हैं।
विस्तार
डीटीसी बस में पास से सफर करने वालों की इन दिनों मुसीबत बढ़ी हुई है। सर्वर डाउन होने से उनका दैनिक व मासिक पास नहीं बन पा रहा है। ऑनलाइन भी पास नहीं मिल रहे हैं। नतीजतन लोगों को एक डिपो से दूसरे डिपो का चक्कर लगाना पड़ रहा है। डीटीसी के किसी भी बस डिपो में पास बनाने के लिए यात्रियों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। अलग-अलग बस डिपो में सर्वर डाउन होने के नोटिस चस्पा किए गए हैं।
डीटीसी के सिंधिया हाउस कार्यालय में बृहस्पतिवार बड़ी संख्या में बस पास बनाने के लिए मशक्कत करते दिखे। यहां इनको न तो कोई जानकारी देने के लिए अधिकारी मौजूद है, न ही इनकी समस्या का हल करने के लिए है। डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ दिनों से तकनीकी खामी आई है। इसे दुरुस्त किया जा रहा है। एक हफ्ते के अंदर चीजें सामान्य हो जाएंगी।
- डीटीसी और क्लस्टर बसों की संख्या करीब 8 हजार है। इसमें 800 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। बसों में प्रतिदिन 40 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। कुल में करीब 35% महिलाएं यात्रा करती हैं। बता दें महिलाओं के लिए बस सेवा निशुल्क है। ऐसे में रोज 25 लाख से अधिक लोग रुपये देकर टिकट खरीदते हैं। डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रोजाना 15 से 20 हजार लोगों का पास बनता है, जिसमें दो हजार के करीब दैनिक पास जनरेट होते हैं।
लोगों ने कहा...
वह रोजाना बस से ही सफर करते हैं, लेकिन पास की तीन दिन पहले ही तिथि समाप्त हो गई है। इतनी कमाई भी नहीं है, जितना रोजाना बस में सफर करने के लिए रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। डिपो के अधिकारियों से भी बात की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
-करोल बाग से सिंधिया हाउस पहुंचे दीपक
वह बीते 4 दिन से बस पास बनाने के लिए भटक रहे हैं। यहां सुबह 11 बजे आ गए थे, लेकिन तीन बजे उन्हें बताया कि यहां बस पास नहीं बनेगा।
-सिंधिया हाउस में संगम विहार से पहुंचे रविंद्र
एक तरफ तो सिस्टम को ऑनलाइन किए जाने की बात की जा रही है। दूसरी तरफ सर्वर न होने से पूरा पास सिस्टम बैठ गया है। इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
-उत्तम नगर टर्मिनल में कॉलेज के छात्र आशुतोष मिश्रा
चार दिन से रोजाना सुबह सात बजे पास बनवाने के लिए लाइन में लग जाते है लेकिन, चार घंटे लाइन में लगने के बाद कार्यालय जाने में देरी हो रही है।
-नजफगढ़ टर्मिनल में नानकहेड़ी गांव से आए बुजुर्ग नीरज