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दिल्ली: डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, फिर भी नहीं पहुंचे अस्पताल, ओपीडी प्रभावित

Fri, 10 Dec 2021 11:14 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 10 Dec 2021 11:14 PM IST
सार

गुरुवार को पीएमओ से आश्वासन मिलने के बाद फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने हड़ताल एक सप्ताह तक स्थगित करने की घोषणा की थी लेकिन अलग अलग अस्पतालों के संगठनों ने इससे असहमति जताई और काउंसलिंग की तारीख घोषित होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया।

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Delhi: Doctors' strike ends, still not reach hospital, OPD affected
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण खाली हुए वार्ड - फोटो : amar ujala

विस्तार

नीट पीजी काउंसलिंग में देरी को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। शुक्रवार को सफदरजंग अस्पताल छोड़ बाकी सभी जगहों पर ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं। वहीं इन अस्पतालों में ऑपरेशन भी शुरू नहीं हो सके। यहां केवल आपातकालीन सेवाओं में ही मरीजों को इलाज मिल रहा था।

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जानकारी के अनुसार गुरुवार को पीएमओ से आश्वासन मिलने के बाद फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने हड़ताल एक सप्ताह तक स्थगित करने की घोषणा करते हुए सभी रेजिडेंट डॉक्टरों से वापस काम पर आने की अपील की थी लेकिन अलग अलग अस्पतालों के संगठनों ने इस फैसले पर सहमति नहीं जताई और काउंसलिंग की तारीख घोषित होने तक विरोध प्रदर्शन ऐसे ही जारी रखने का निर्णय लिया।
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इसके चलते नई दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, लोकनायक और जीटीबी जैसे बड़े अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन इत्यादि से जुड़ी सेवाओं में शुक्रवार को शामिल नहीं हुए। हालांकि आपातकालीन चिकित्सा को लेकर सभी अस्पतालों में सेवा शुरू कर दी गई है और यहां रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी भी दे रहे हैं। बहरहाल डॉक्टरों की हड़ताल के चलते पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय से राजधानी में मरीजों का उपचार काफी मुश्किल हो गया है। अब तक करीब पांच हजार से अधिक ऑपरेशन टल चुके हैं वहीं सफदरजंग अस्पताल में एक महिला की मौत तक हो चुकी है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि नीट पीजी काउंसलिंग को लेकर बार बार आश्वासन दिए जा रहे हैं लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए काउंसलिंग का समय निर्धारित होने तक उनका प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा। वहीं फोर्डा के अध्यक्ष डॉ. मनीष का कहना है कि सरकार ने एक सप्ताह के लिए समय मांगा था। इसलिए हड़ताल को सात दिन के लिए स्थगित किया गया है। अगर इस बीच कांउसलिंग की तारीख घोषित नहीं होती है तो उसके बाद सभी अस्पताल पूरी तरह से बंद हो सकते हैं। कोई भी रेजिडेंट डॉक्टर कोरोना वार्ड सहित किसी भी स्वास्थ्य सेवा में उपस्थित नहीं रहेगा।

कहीं नर्स तो कहीं वरिष्ठ डॉक्टर संभाल रहे कमान

रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का असर लगभग सभी अस्पतालों में है। चूंकि ओपीडी इत्यादि जगहों पर पूरा कार्यभार इन्हीं डॉक्टरों पर रहता है, ऐसे में हड़ताल की वजह से कहीं नर्स मरीजों को देख रही हैं तो कहीं-कहीं वरिष्ठ डॉक्टर कुछ मरीजों को संभाल रहे हैं। लोकनायक अस्पताल की एक नर्स ने बताया कि ज्यादातर मरीजों को फॉलोअप के लिए रखा जा रहा है। करीब 60 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिनकी दवाएं आगे बढ़ाया जा सकता है। इसलिए उन्हें हड़ताल खत्म होने तक दवाएं लेने और बाद में आकर नियमित जांच इत्यादि कराने की सलाह दे रहे हैं।

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