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दिल्ली: सिगरेट चोरी के आरोपी की जेल में हो गई थी मौत, परिजनों ने की न्यायिक जांच की मांग

Wed, 23 Feb 2022 09:54 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 23 Feb 2022 09:54 PM IST
सार

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बुधवार को जन हस्तक्षेप के संयोजक डॉ. विकास वाजपेयी और मृतक के पिता मोहम्मद याकूब एवं अन्य परिजनों ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि जेल नंबर-पांच में बंद जिशान का स्वास्थ्य खराब होने के मामले में जेल प्रशासन एवं दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के डाक्टरों के अलग-अलग बयान हैं।

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Delhi: Cigarette theft accused had died in jail family members demand judicial inquiry
तिहाड़ जेल - फोटो : amar ujala

विस्तार

सिगरेट चोरी के आरोप में तिहाड़ जेल बंद रहने के दौरान जिशान नामक युवक की गत 15 फरवरी को संदिग्ध हालत में मौत होने के मामले की जन हस्तक्षेप संगठन के पदाधिकारियों व मृतक के परिजनों ने न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने जेल नंबर-पांच के अधीक्षक को तत्काल निलंबित करने और अन्य कर्मचारियों का तबादला करने का आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप करने की भी मांग की है।

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बुधवार को जन हस्तक्षेप के संयोजक डॉ. विकास वाजपेयी और मृतक के पिता मोहम्मद याकूब एवं अन्य परिजनों ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि जेल नंबर-पांच में बंद जिशान का स्वास्थ्य खराब होने के मामले में जेल प्रशासन एवं दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के डाक्टरों के अलग-अलग बयान हैं। इस कारण उन्हें अंदेशा है कि जेल में जिशान की हत्या की गई है। उन्होंने मांग की कि स्वतंत्र बोर्ड से जिशान के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट की जांच कराई जाए। इसके अलावा उसकी मौत होने के कारणों की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

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जमानत होने के बाद परिजन नहीं जुटा पाए थे राशि

इस मौके पर डॉ. विकास उपाध्याय ने कहा कि वह इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष लेकर जाएंगे। इसके अलावा पीड़ित परिवार गरीब होने के कारण आयोग से उसकी मदद की भी गुहार लगाई जाएगी। दरअसल आर्थिक तंगी के कारण जिशान के परिजन उसकी जमानत के लिए वकील नहीं कर सके थे। इसके अलावा दो बार जमानत रद्द होने के बाद जब तीसरे प्रयास में उसकी जमानत होने जाने पर वह जमानत राशि की भी व्यवस्था नहीं कर सके थे। इस कारण वह जेल में ही बंद था। उन्होंने कहा कि जमानत राशि की व्यवस्था हो जाती तो जिशान की जेल में मौत नहीं होती। इस मामले में उन्होंने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाया।

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