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Heart Attack Deaths : इलाज में देरी आधे से ज्यादा हार्ट अटैक से हुईं मौतों का कारण, एम्स का अध्ययन
Sat, 03 Jun 2023 07:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 03 Jun 2023 07:14 AM IST
सार
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक अध्ययन में यह पता चला है कि आधे से ज्यादा हार्ट अटैक से हुईं मौत इलाज में देरी होने की वजह से हुईं। समय पर इलाज के जरिए इन लोगों को मरने से बचाया जा सकता था।
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एम्स दिल्ली
विस्तार
समय पर इलाज न मिलने की वजह से मरीजों की जान का जोखिम बढ़ता है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक अध्ययन में यह पता चला है कि आधे से ज्यादा हार्ट अटैक से हुईं मौत इलाज में देरी होने की वजह से हुईं। समय पर इलाज के जरिए इन लोगों को मरने से बचाया जा सकता था।
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मेडिकल जर्नल द लैंसेट में अध्ययन में कहा गया है कि हार्ट अटैक से होने वाली आधे से अधिक मौतें इसलिए होती हैं, क्योंकि लोगों को उन संकेतों और लक्षणों के बारे में पता नहीं होता है, जिन पर गोल्डन आवर के दौरान ध्यान देने की आवश्यकता होती है। एम्स दिल्ली के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि कार्डियक और स्ट्रोक आपात स्थिति वाले रोगियों का एक छोटा हिस्सा ही स्वास्थ्य सुविधाओं तक जल्दी पहुंचता है। एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आनंद कृष्णन ने बताया कि अध्ययन तीन विभागों कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और कम्युनिटी मेडिसिन ने मिलकर किया।
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बल्लभगढ़ ब्लॉक स्थित एम्स के ही केंद्र पर पंजीकृत मरीजों को इसमें शामिल किया गया। इस दौरान ब्रेन अटैक या हार्ट अटैक से जो मरे उनका सोशल ऑडिट किया। उन्होंने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य ये पता लगाना था कि क्या समय से मरीज अस्पताल पहुंचे? इलाज में क्या दिक्कतें आईं या देरी की वजह क्या रही? डॉ. आनंद ने बताया कि अध्ययन में हमने देखा कि करीब 10 फीसदी लोग ही एक घंटे से पहले अस्पताल पहुंचे। एक घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है, चाहे वह हार्ट अटैक हो या स्ट्रोक। मरीज को जितनी जल्दी इलाज मिलेगा, परिणाम उतना बेहतर होगा।
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उन्होंने बताया कि पहले एक घंटे में मुश्किल से 10 प्रतिशत लोग अस्पताल पहुंचे। वहीं, 30-40 फीसदी लोगों ने तो अपनी वजह से देरी नहीं की लेकिन 55 फीसदी ने अपनी तरफ से देरी की। इन्हें हार्ट अटैक को समझने में ही काफी समय लग गया। डॉक्टरों के अनुसार, यह चिंताजनक बात है कि लोग समझ नहीं पाए। कुछ लोगों ने तकलीफ होने पर अस्पताल जाने के बारे में सोचा भी तो गाड़ी, पैसे की परेशानी आई, तो इसकी वजह से 20-30 % लोग नहीं जा पाए। जाना चाहते थे पर साधन या अस्पताल जाना मुमकिन नहीं हो पाया। लोगों को अस्पताल पहुंचने में वित्तीय परेशानी, ज्योग्राफिकल या फिजिकल एक्सेस का इश्यू भी रहा। मुश्किल से 10 फीसदी ऐसे थे, जिनको अस्पताल पहुंचने के बाद देरी हुई।