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निर्भया मामला-- तीन बार पहले टली फांसी, अब चौथे डेथ वारंट पर देश की नजर
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नई दिल्ली। निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए पहले जारी किए गए तीन डेथ वारंट पर कानूनी विकल्पों के तहत रोक लग चुकी है और अब चौथे डेथ वारंट पर भी रोक की आशंका पैदा हो गई है। दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए पहला डेथ वारंट 7 जनवरी को जारी किया गया था और तब से लेकर अब तक देशभर के लोगों को दोषियों की फांसी का इंतजार है।
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उल्लेखनीय है कि 16-17 दिसंबर 2012 की रात फिथिजियोरेपी की 23 वर्षीय छात्रा से दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस घटना के दौरान पीड़िता को गंभीर हालत में चलती बस से फेंक दिया गया था। इस घटना के बाद उपचार के दौरान करीब 15 दिन बाद छात्रा की सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी।
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इस नृशंस घटना के बाद में मृतका को देश में निर्भया का नाम दिया गया था। इस मामले में छठे आरोपी राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद कथित रूप से तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। वह दोषी मुकेश रामसिंह का सगा भाई था। इसके अलावा पांचवें नाबालिग आरोपी को सुधार गृह में तीन साल रखने के बाद 2015 में छोड़ दिया गया था।
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