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गाजीपुर बॉर्डर पर लगाया गया कोल्हू, गर्मी से बचने के लिए किए गए इंतजाम
Mon, 22 Feb 2021 05:53 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 22 Feb 2021 05:53 PM IST
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कोल्हू चलाते टिकैत
- फोटो : सोशल मीडिया
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गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन में रविवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने पुराने कोल्हू को चलाया। टिकैत ने कोल्हू में गन्ने लगाए और गन्ने का रस निकालकर आंदोलनकारियों को पिलाया। राकेश टिकैत ने कहा कि धीरे-धीरे गर्मी का मौसम आने लगा है, आंदोलन में डटे किसानों को गन्ने का जूस पिलाने के लिए यह कोल्हू लगाया गया है। इसके साथ ही यह कोल्हू इस बात का भी प्रतीक है कि सख्ती के बिना कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर लगाया गया यह कोल्हू ऐतिहासिक है।
सबसे पहले 1995 में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने इसी कोल्हू को लाल किले पर डब्लूटीओ के खिलाफ आंदोलन के दौरान चलाया था। उसके बाद से जब भी गर्मियों के दिनो में कोई किसान आंदोलन होता है तो किसानों की सेवा के लिए यह कोल्हू लगाया जाता है। आंदोलन के विषय में टिकैत ने कहा कि जब तक सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, किसान दिल्ली की सीमाओं से अपने घर जाने वाला नहीं है। सरकार को लगता है कि किसान गर्मी से डरकर भाग जाएगा, ऐसा नहीं है। जो किसान सर्दी से नहीं डरा, वह गर्मी से भी नहीं डरने वाला।
खेतों में भी काम प्रभावित ना हो, इसके लिए रणनीति तैयार कर ली है। किसान नंबर- बारी से आंदोलन स्थल पर आते रहेंगे और फिर जाते रहेंगे। इसके अलावा यह भी तय किया गया है कि जो किसान आंदोलन में रहेगा, गांव वाले उसके खेत का, उसके काम का पूरा ध्यान रखेंगे।
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गर्मी से बचने की तैयारी में जुटे किसान
मौसम के करवट बदलने के साथ ही किसानों ने गर्मी से बचाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। धूप से बचने के लिए चटाईयां लाई गई है। सभी टेंट को बड़ा भी किया जा रहा है। किसानों का कहना है बड़े टेंट में कई किसान एक साथ आ सकेंगे। जहां पर एसी, कूलर और पंखे की भी व्यवस्था की जाएगी। गाजीपुर आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि आंदोलन स्थल स्थित लंगरों में फ्रिज की व्यवस्था करने के साथ टेंट में गर्मी से बचने के लिए इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं।
रोहतक से पहुंची महिलाओं ने कहा, कानून वापसी तक नहीं हटेंगी
हरियाणा के रोहतक जिले के रिठाल गांव से रविवार को ग़ाजीपुर बॉर्डर पर दो दर्जन से अधिक महिलाएं पहुंची। महिलाओं ने कहा कि जब तक नए कृषि कानून वापस नहीं होंगे, वह पीछे हटने वाली नहीं महिलाओं का कहना था कि वह रोज अपने गांव से यहां आएंगे और आंदोलन कर रहे किसानों के लिए दूध, दही और मठ्ठा भी लेकर आएंगी।
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सबसे पहले 1995 में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने इसी कोल्हू को लाल किले पर डब्लूटीओ के खिलाफ आंदोलन के दौरान चलाया था। उसके बाद से जब भी गर्मियों के दिनो में कोई किसान आंदोलन होता है तो किसानों की सेवा के लिए यह कोल्हू लगाया जाता है। आंदोलन के विषय में टिकैत ने कहा कि जब तक सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, किसान दिल्ली की सीमाओं से अपने घर जाने वाला नहीं है। सरकार को लगता है कि किसान गर्मी से डरकर भाग जाएगा, ऐसा नहीं है। जो किसान सर्दी से नहीं डरा, वह गर्मी से भी नहीं डरने वाला।
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खेतों में भी काम प्रभावित ना हो, इसके लिए रणनीति तैयार कर ली है। किसान नंबर- बारी से आंदोलन स्थल पर आते रहेंगे और फिर जाते रहेंगे। इसके अलावा यह भी तय किया गया है कि जो किसान आंदोलन में रहेगा, गांव वाले उसके खेत का, उसके काम का पूरा ध्यान रखेंगे।
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गर्मी से बचने की तैयारी में जुटे किसान
मौसम के करवट बदलने के साथ ही किसानों ने गर्मी से बचाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। धूप से बचने के लिए चटाईयां लाई गई है। सभी टेंट को बड़ा भी किया जा रहा है। किसानों का कहना है बड़े टेंट में कई किसान एक साथ आ सकेंगे। जहां पर एसी, कूलर और पंखे की भी व्यवस्था की जाएगी। गाजीपुर आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि आंदोलन स्थल स्थित लंगरों में फ्रिज की व्यवस्था करने के साथ टेंट में गर्मी से बचने के लिए इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं।
रोहतक से पहुंची महिलाओं ने कहा, कानून वापसी तक नहीं हटेंगी
हरियाणा के रोहतक जिले के रिठाल गांव से रविवार को ग़ाजीपुर बॉर्डर पर दो दर्जन से अधिक महिलाएं पहुंची। महिलाओं ने कहा कि जब तक नए कृषि कानून वापस नहीं होंगे, वह पीछे हटने वाली नहीं महिलाओं का कहना था कि वह रोज अपने गांव से यहां आएंगे और आंदोलन कर रहे किसानों के लिए दूध, दही और मठ्ठा भी लेकर आएंगी।