गोरखधंधा : हल्दीराम-अमूल की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर ठगते थे, पकड़े गए
- ग्रुरुग्राम में डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के सीईओ समेत चार गिरफ्तार
- फर्जी वेबसाइट के जरिये देशभर में 500 से ज्यादा लोगों को बना चुके हैं निशाना
विस्तार
हल्दीराम, अमूल और पतंजलि जैसे नामी ब्रांड की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर देशभर के 500 से ज्यादा लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस संबंध में मुख्य साजिशकर्ता विकास मिस्त्री (24), निजी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के सीईओ विनय विक्रम सिंह (37), विनोद कुमार (27) और संतोष कुमार (32) को गिरफ्तार किया है। विनय विक्रम फर्जी वेबसाइट बनाकर आरोपियों को देता था। इसकी मदद से वे नामी ब्रांड के आउटलेट और स्टोर की फ्रेंचाइजी दिलवाने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम हड़प लेते थे। पुलिस ने उनके 17 बैंक खातों का पता लगाकर दस्तावेज बरामद किए हैं।
साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त अनेश रॉय ने बताया कि दिल्ली निवासी रिशिका गर्ग (बदला नाम) राजधानी में हल्दीराम का आउटलेट खोलना चाहती थीं। ऑनलाइन सर्च करने के दौरान उन्होंने एक वेबसाइट देखी। इस पर दावा किया गया था कि वे हल्दीराम की फ्रेंचाइजी और डीलरशिप दिलवा देंगे। रिशिका ने वेबसाइट पर दिए गए नंबर से संपर्क किया। उनसे फ्रेंचाइजी लेने के लिए अलग-अलग मदों (एप्लीकेशन फार्म, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, सिक्योरिटी डिपाजिट, ब्रांडनेम यूज, हार्डवेयर एडवांस, साइट इंस्पेक्शन फी) के लिए पैसे मांगे गए। उन्होंने जाल में फंसकर आरोपियों के खातों में 11.74 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने अपने नाम आशीष कुमार और रवि कुमार बताए। इसके बाद भी आरोपियों ने 1.60 लाख रुपये और मांगे तो रिशिका को शक हुआ। जांच करने पर उन्हें ठगी का पता चला।
रिशिका की शिकायत पर छानबीन के बाद साइबर सेल ने मामला दर्ज कर लिया। जांच में पता चला कि हल्दीराम, अमूल, पतंजलि और अन्य नामी ब्रांड की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर कई फर्जी वेबसाइट चल रही हैं। इनमें कुछ haldiramsfranchise.in, haldiram-franchise.com, haldiramdeal.com आदि थीं। टेक्निकल सर्विलांस से छानबीन के दौरान कई बैंक खातों, फर्जी सिम और 36 मोबाइल के इस्तेमाल का पता चला। इसके बाद पुलिस ने बिहार के नालंदा, हरियाणा के फरीदाबाद, पंजाब के लधियाना और दिल्ली के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। 27 अगस्त की रात टीम ने बिहार के नालंदा से विकास मिस्त्री व इसके जीजा संतोष, संतोष के भाई विनोद को गिरफ्तार किया। इसके बाद गिरोह को टेक्निकल सपोर्ट देने वाले विनय विक्रम सिंह को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने गुनाह कबूल किया है।
दो साल से कर रहे थे वारदात
सरगना विकास मिस्त्री ने बताया कि वह करीब दो साल से ठगी कर रहा था। फरीदाबाद में रहने वाला और गुरुग्राम में अपनी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी चलाने वाला विनय विक्रम सिंह फर्जी वेबसाइट बनाकर देता था। इस पर आरोपियों का एक मोबाइल नंबर भी दे दिया जाता था। वेबसाइट के प्रचार के लिए गूगल पर विज्ञापन भी दिए जाते थे। लोग झांसे में आकर इनसे संपर्क करते थे तो आरोपी विश्वास जीतकर पीड़ितों से अलग-अलग मदों में मोटी रकम एँठ लिया करते थे।
देश के 16 राज्यों में ठगे 1.10 करोड़
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने पिछले कुछ समय में देश के 16 राज्यों के 500 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस नेे 126 लोगों से 1.10 करोड़ रुपये ठगने की पुष्टि की है। इनके 17 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इनके पास से भारी मात्रा में दस्तावेज व अन्य सामान भी बरामद हुए हैं। जांच में पता चला है कि टेक्निकल सपोर्ट देने वाला विनय विक्रम सिंह वेबसाइट के की-वर्ड ऐसे डालता था, जिससे सर्च करने पर वह सबसे पहले दिखाई देती थी।
विनय एमबीए, एक आरोपी बीसीए तो सरगना ग्रेजुएट
जांच के दौरान पता चला कि गिरोह को टेक्निकल सपोर्ट देने वाला विनय विक्रम सिंह एमबीए है। वह गुरुग्राम में खुद की निजी कंपनी चलाता है। मुख्य आरोपी विकास मिस्त्री ग्रेजुएट है। विकास को सहयोग देने वाला विनोद बीसीए है। विकास ने बताया कि संतोष कुमार उसका जीजा है। विनोद संतोष का भाई है।
बीमा पॉलिसी पर लाभ दिलाने का झांसा देकर सेना के अधिकारियों से ठगी
आर्थिक अपराध शाखा ने सेना के अधिकारियों से बीमा पॉलिसी में लाभ दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीमा पॉलिसी पर बोनस देने का झांसा देते थे। गैंग ने सेना के 54 अधिकारियों को शिकार बनाने की कोशिश की, जिसमें 13 उनके झांसे में आ गए। आरोपियों ने इनसे 1.15 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों पर महाराष्ट्र, हैदराबाद और चंडीगढ़ में भी इसी तरह के फर्जीवाड़ा के मामले दर्ज हैं।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर के सिंह बताया कि कुछ जालसाज सेना के अधिकारियों और पेंशनधारियों को फोन कर उन्हें आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड में लाभ देने का वादा किया। आरोपियों ने उन्हें उनके पॉलिसी पर तीन चार लाख रुपये देने की बात कहकर बैंक खातों में तीस से चालीस हजार रुपये जमा करने के लिए कहा। आरोपियों ने आर्मी सर्विस कोर के कर्नल जीएम खान से एक करोड़ दो लाख 24 हजार की ठगी कर ली। इसी तरह आरोपियों ने 12 और अधिकारियों से ठगी को अंजाम दिया। वर्ष 2019 में इस बाबत आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दी गई। पुलिस ने शिकायत पर जांच शुरू की।
निरीक्षक जेएस मिश्रा के नेतृत्तव में पुलिस ने 50 से अधिक बैंक खातों की जांच की। साथ ही आरोपियों के फोन नंबर की पड़ताल की। जिस पते पर फोन नंबर लिया गया था सारे फर्जी निकले। बैंक खातों की जांच में पता चला कि आरोपियों ने फर्म के नाम से किराए के मकान के पते पर बैंक खाता खोला था। मकान मालिक से भी आरोपियों का सुराग नहीं मिला। आरोपी एटीएम के जरिए तुरंत रुपये निकाल लेते थे। इस दौरान पता चला कि एक आरोपी प्रभात कुमार सेल्फ चेक से पैसे निकाल रहा है। तकनीकी जांच करते हुए पुलिस ने प्रभात को गिरफ्तार किया। उसके निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपी रूपेश कुमार, राम नरेश और राम सागर को दिल्ली, फरीदाबाद और कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। रूपेश और प्रभात रिश्ते में साले बहनोई हैं।
पहले कॉल सेंटर चलाता था मुख्य आरोपी
जांच में पता चला कि फरीदाबाद का रहने वाला रूपेश गैंग का सरगना है। वह पहले दोस्त संजय राय के साथ कॉल सेंटर चलाता था। संजय राय की मौत हो चुकी है। रूपेश को कॉल सेंटर में काम करने के दौरान बीमा के बारे में अच्छी जानकारी हो गई थी। आरोपी 2 फीसदी कमीशन पर बैंक खाता किराए पर लेता था। इससे पहले वह फर्जीवाड़ा में रायबरेली, फरीदाबाद और अलीगढ़ में गिरफ्तार हो चुका है। प्रभात कुमार मोतिहारी, बिहार का रहने वाला है।
वह 12वीं पास है और रायगढ़ की एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर था। बाद में, उसने अपने जीजा रूपेश से किसी अन्य नौकरी दिलाने के लिए कहा। रूपेश ने उसे फर्जीवाड़े के धंधे से जोड़ लिया। वह रूपेश के निर्देश पर बैंक से चेक के जरिए रुपये निकालता था। राम नरेश और राम सागर सागवार उन्नाव यूपी के रहने वाले हैं। दोनों ने फर्जीवाड़ा के लिए दिल्ली एनसीआर के अलावे गुवाहाटी के अलग अलग बैंकों में पचास से ज्यादा खाते खोले थे। रामनरेश रायबरेली में मोबाइल चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया था। जेल में उसकी रूपेश से मुलाकात हुई थी और वह इस धंधे से जुड़ गया।
पश्चिम विहार में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, मालिक समेत 14 गिरफ्तार
बाहरी जिले की साइबर सेल ने पश्चिम विहार में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने सेंटर के मालिक समेत 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 8 महिला टेली कॉलर शामिल है। आरोपी नामी कंपनी के फोन को सस्ते दाम पर देने का झांसा देकर ठगी करते थे।
जिला पुलिस उपायुक्त परविंदर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार कॉल सेंटर के मालिक की पहचान बहादुरगढ़ स्थित बापरोड़ा पाना गांव निवासी अजीत है। गिरफ्तार अन्य लोगों की पहचान फुरकान, प्रभादित, यशपाल उमेश, नितिन, संजना, लता, काजल, प्रिया, नैना, पूजा, कीर्ति और नीलम के रूप में हुई है। जांच में पता चला कि दो महीना पहले ही कॉल सेंटर को खोला गया था। कॉल सेंटर जिस कमरे में चल रहा था उसका किराया पचास हजार रुपये था।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि साइबर सेल को पश्चिम विहार में कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली थी। निरीक्षक हरिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उक्त सेंटर पर छापा मारा। उस समय वहां काम कर रही टेलीकॉलर लोगों ने बात कर रही थी। पुलिस ने यहां से दो सीपीयू, एक लेपटाप, नौ मोबाइल फोन, एक मानीटर, एक सिम कार्ड सर्वर के साथ 32 सिम कार्ड, एक फोन, 20 रजिस्टर, राउटर, एक बार कोर्ड स्केनर और एक प्रिंटर जब्त किया।
जांच में पता चला कि सेंटर का मालिक अजीत पहले कॉल सेंटर में काम करता था। दो माह पहले उसने खुद कॉल सेंटर खोला और ठगी करने लगा। सेंटर से दिल्ली के बाहर रहने वाले लोगों को फोन किया जाता था। लोगों से कहा जाता था कि जिस मोबाइल की कीमत 20 हजार रुपये हैं, उसे पांच हजार में दिया जाएगा।
इनके झांसे में आने वाले का पैसे ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा जाता था। पैसे आने के बाद अजीत पैकेट में साबुन व अन्य चीज रखकर भेज देता था। जांच में पता चला कि अजीत ने फर्जी पते पर डाकघर में फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाया था। कोई अगर नकद में भुगतान करता था तो पैसे उसके खाते में चले जाते थे। अब तक चार पांच लाख रुपये की ठगी की बात सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।