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दिल्ली : खाते में बचे थे 63 रुपये, 37 रुपये डाले, 100 होने पर कर दिया अकाउंट खाली
Wed, 20 Oct 2021 05:49 AM IST
शाहरुख खान
शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 20 Oct 2021 05:49 AM IST
सार
एनआरआई महिला के खाते से 1.35 करोड़ रुपये निकालने का मामला। तीन माह तक चली कसरत के बाद खाते से निकाल ली एक-एक पाई...
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Cyber Crime
- फोटो : Social Media
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विस्तार
एनआरआई कनिका गिरधर के खाते को खाली करने के लिए आरोपियों ने करीब तीन माह तक कसरत की। इसके बाद आरोपियों की मेहनत रंग लाई और उन्होंने धीरे-धीरे कनिका का खाता खाली करना शुरू कर दिया। यहां तक जब पीड़िता के खाते में महज 63 रुपये ही बचे तो आरोपियों ने उसको भी नहीं छोड़ा। चूंकि एटीएम से 100 रुपये से कम नहीं निकलते थे, लिहाजा आरोपियों ने कनिका के खाते में 37 रुपये जमा करवाए।
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जब रकम 100 रुपये हो गई तो उसको भी एटीएम की मदद से निकाल लिया गया। इस तरह आरोपियों ने कनिका के खाते से पाई-पाई निकाल ली। यह सब तक बैंक कर्मचारी सुमित पांडेय की मदद से ही संभाव हो पाया। उसकी ही जानकारी पर गैंग सरगना शैलेंद्र प्रताप सिंह ने ठगी की पूरी योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।
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सुमित ओल्ड राजेंद्र नगर आईसीआईसीआई बैंक में काम करता था। वहां कनिका ने अपने खाते में एफडी करवाई हुई थी। चूंकि कनिका के खाते में ज्यादा हलचल नहीं होती थी, इसलिए सुमित को उसमें ठगी गुंजाइश लगी। शैलेंद्र प्रताप सिंह कमिशन पर लोगों के खाते बैंक में खुलवाता था। सुमित ने खाते ही जानकारी शैलेंद्र को दी।
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खाते से जुड़े कनिका के मोबाइल नंबर का पता किया गया तो वह 90 दिन तक बंद रहने की वजह से किसी दूसरे को ट्रांसफर कर दिया गया था। सबसे पहले आरोपियों ने उस नंबर को कंपनी से किसी तरह प्राप्त कर लिया। इसके बाद शैलेंद्र ने नीलम नामक एक महिला को बैंक में कनिका बनाकर पेश किया। बैंक से दूसरा एटीएम, चेकबुक निकलवाकर एफडी को तुड़वा दिया गया। इसके साथ-साथ शैलेंद्र ने फरीदाबाद में एक फर्जी कंपनी का गठन किया। वहां 10 मजदूरों को भर्ती करकर उनके बैंक खाते खुलवा दिए।
बाद में ऑन लाइन ट्रांजेक्शन और चेक की मदद से रकम को धीरे-धीरे इन मजदूरों के खातों में ट्रांसफर कर लिया गया। बैंक में कनिका का भाई बनकर गए आदर्श जायसवाल व जगदंगा प्रसाद ने धीरे-धीरे इन मजदूरों के खाते से एटीएम के जरिये निकालना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे कनिका का पूरा खाता खाली कर आरोपियों ने रकम अपने कब्जे में ले ली।
इसकी मदद से शैलेंद्र ने दिल्ली के शास्त्री नगर में 41.53 लाख का एक प्लॉट खरीदा जिसकी कीमत अब 90 लाख है। पुलिस ने प्लॉट, ठगी की रकम से खरीदी गई एक महंगी कार, बुलेट बाइक, 27 लाख कैश, दो महंगे आईफोन व अन्य सामान बरामद किया है। बैंक को जब सुमित पर शक हुआ तो उन्होंने उसे बैंक से निकाल दिया था।
कौन हैं पकड़े गए आरोपी...
मूलरूप से लालकुंआ गाजियाबाद का रहने वाला सुमित पांडेय बीकॉम पास है। वह बैंक में काम करता था। पुलिस ने 14 अक्तूबर को आरोपी को गिरफ्तार किया था। वहीं गैंग सरगना शैलेंद्र प्रताप सिंह मूलरूप से दिल्ली का ही रहने वाला है। उसने दिल्ली विश्वविवद्यालय से एमकॉम किया हुआ है। इसने ही पूरा षड्यंत्र रचा था। सोहना, हरियाणा की रहने वाली नीलम एमएड है। इसने शैलेंद्र के कहने पर कनिका की भूमिका अदा की थी।
वहीं मूलरूप से मऊ का रहने वाला जगदंबा प्रसाद पांडेय संस्कृत से ग्रेजुएट है। उसने मजदूरों का इंतजाम करने के लिए उनके खाते से रकम निकाली थी। वहीं जहांगंज, आजमगढ़ यूपी का रहने वाला आदर्श जायसवाल ने कनिका के भाई की भूमिका अदा की। उसने भी मजदूरों के खाते से रकम निकाली। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।