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दिल्ली दंगा: जेएनयू छात्रा देवांगना कलीता की जमानत याचिका खारिज

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:26 AM IST
court refuses to grant bail to Devangana Kalita
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नई दिल्ली। अदालत ने पिछले साल फरवरी में उत्तर -पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्रा एवं पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता की जमानत याचिका खारिज कर दी। कलीता के खिलाफ सख्त आतंक रोधी कानून गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज है।

कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने बृहस्पतिवार को दिए फैसले में कहा कि कलीता पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्ट्या सही प्रतीत होते हैं। कलीता को दंगों की पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर साजिश के मामले में वीडियो क्लिप न होना सामान्य तौर पर बहुत महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि इस तरह की साजिश गुप्त रूप से रची जाती है और इस तरह की साजिश की वीडियो क्लिप न होना, संदेह करने की जगह बिलकुल स्पष्ट है।

अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 से शुरू हुई पूरी कथित साजिश, जब सड़कों को जानबूझकर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में असुविधा और व्यवधान पैदा करने के लिए सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप हिंसा हुई थी। अदालत ने कहा फरवरी 2020 के दंगों को ‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा के दायरे में लाया जाएगा। संविधान के अनुसार देश के सभी नागरिकों को विरोध करने का अधिकार और स्वतंत्रता है, जिसमें किसी भी कानून का विरोध करने का अधिकार भी शामिल है, लेकिन जहां एक षड्यंत्र हुआ है।
कलीता की ओर से पेश वकील अदित एस पुजारी ने कहा कि आरोपी हिंदू है, ऐसे में वह अपने ही समुदाय के खिलाफ मुसलमानों को भड़काकर हिंसा और दंगे क्यों कराएगी। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि कलीता ने जहांगीरपुरी से महिला प्रदर्शनकारी जुटाने के लिए अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश की जिन्होंने हिंसा की।
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) समर्थकों और इसका विरोध करने वालों के बीच पिछले साल फरवरी में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 अन्य घायल हुए थे। पिंजरा तोड़ का गठन 2015 में हुआ था। इस संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य बालिका छात्रावासों और पेइंग गेस्ट आवासों में छात्राओं के लिए पाबंदियां कम कराना है।

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