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दिल्ली दंगा: आईबी अधिकारी के हत्यारोपी को जमानत नहीं
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नई दिल्ली। अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी की हत्या के मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी नाजिम पर गंभीर आरोप हैं।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि आरोपी नाजिम को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन ने सांप्रदायिक आधार पर भड़काया था। जिसके कारण उसने दूसरे समुदाय पर हमला करने का आरोप लगाया था। अदालत ने कहा रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है जो स्पष्ट रूप से आरोपी को एक उपद्रवी भीड़ का हिस्सा बनने की पहचान करती है जो आगजनी, लूटपाट, सार्वजनिक और निजी संपत्ति में तोड़फोड़ करने में लिप्त थी। उन्होंने कहा कि आरोपी ने सांप्रदायिक नारे लगाते हुए दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर हमला किया।
अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर प्रकृति का आरोप है और यदि उसे जमानत दी गई तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह गवाहों को धमका सकता है। अदालत ने कहा कि सभी तथ्य व आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखने के बाद वे महसूस करते हैं कि वह वर्तमान में जमानत पाने का हकदार नहीं है।
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आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा का शव दंगों के बाद लापता होने के एक दिन बाद 26 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में उनके घर के पास एक नाले में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक अंकित शर्मा के शरीर यानि सिर, पेट, चेहरे,, पीठ पर तेजदार हथियार के 51 घाव मिले थे।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि मृतक के शरीर पर मिले छह निशान आरोपी से बरामद हथियार से किए गए थे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी भी चल रही है और जमानत देने से प्रभावित होगी।
वहीं आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल नाजिम को फर्जी मामले में फंसाया गया है क्योंकि उसे इलाके का बदचरित्र घोषित किया हुआ है और सभी गवाह बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के समय उनका मुवक्किल व मामले में आरोपी बनाया गया उनका भाई कासिम दिल्ली में ही नहीं थे बल्कि वे यूपी के संभल में थे। दोनों को पुलिस ने वहीं से गिरफ्तार किया था।
उन्होंने कहा कि चाकू की बरामदगी भी उनके मुवक्किल से नहीं हुई बल्कि दिखाई गई है। इसके अलावा चाकू पर मृतक के खून के निशान भी नहीं मिल रहे। दिल्ली पुलिस ने पिछले वर्ष जून में दायर आरोप पत्र में दंगों के लिए गहरे षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा था कि शर्मा की हत्या का षड्यंत्र ताहिर हुसैन के नेतृत्व में रचा गया था।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि आरोपी नाजिम को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन ने सांप्रदायिक आधार पर भड़काया था। जिसके कारण उसने दूसरे समुदाय पर हमला करने का आरोप लगाया था। अदालत ने कहा रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है जो स्पष्ट रूप से आरोपी को एक उपद्रवी भीड़ का हिस्सा बनने की पहचान करती है जो आगजनी, लूटपाट, सार्वजनिक और निजी संपत्ति में तोड़फोड़ करने में लिप्त थी। उन्होंने कहा कि आरोपी ने सांप्रदायिक नारे लगाते हुए दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर हमला किया।
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अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर प्रकृति का आरोप है और यदि उसे जमानत दी गई तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह गवाहों को धमका सकता है। अदालत ने कहा कि सभी तथ्य व आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखने के बाद वे महसूस करते हैं कि वह वर्तमान में जमानत पाने का हकदार नहीं है।
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आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा का शव दंगों के बाद लापता होने के एक दिन बाद 26 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में उनके घर के पास एक नाले में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक अंकित शर्मा के शरीर यानि सिर, पेट, चेहरे,, पीठ पर तेजदार हथियार के 51 घाव मिले थे।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि मृतक के शरीर पर मिले छह निशान आरोपी से बरामद हथियार से किए गए थे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी भी चल रही है और जमानत देने से प्रभावित होगी।
वहीं आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल नाजिम को फर्जी मामले में फंसाया गया है क्योंकि उसे इलाके का बदचरित्र घोषित किया हुआ है और सभी गवाह बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के समय उनका मुवक्किल व मामले में आरोपी बनाया गया उनका भाई कासिम दिल्ली में ही नहीं थे बल्कि वे यूपी के संभल में थे। दोनों को पुलिस ने वहीं से गिरफ्तार किया था।
उन्होंने कहा कि चाकू की बरामदगी भी उनके मुवक्किल से नहीं हुई बल्कि दिखाई गई है। इसके अलावा चाकू पर मृतक के खून के निशान भी नहीं मिल रहे। दिल्ली पुलिस ने पिछले वर्ष जून में दायर आरोप पत्र में दंगों के लिए गहरे षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा था कि शर्मा की हत्या का षड्यंत्र ताहिर हुसैन के नेतृत्व में रचा गया था।