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दिल्ली: अदालत ने पेयजल में दूषित जल के मिलावट संबंधी याचिका पर अधिकारियों से विचार करने को कहा
Tue, 13 Jul 2021 03:12 PM IST
शाहरुख खान
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 13 Jul 2021 03:12 PM IST
सार
अदालत दिल्ली निवासी अजय गौतम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्तमान और साथ ही बढ़ती आबादी और पीने के पानी की मांग को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में जल आपूर्ति स्टेशनों और बूस्टर पंपों का नए सिरे से मूल्यांकन कराने का अनुरोध किया गया है।
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को राष्ट्रीय राजधानी में जलापूर्ति स्टेशनों के नए सिरे से मूल्यांकन के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने के लिए कहा है। याचिका में दावा किया गया है कि दूषित और सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने अधिकारियों से कहा कि वे लागू कानून, नियमों, विनियमों और सरकार की नीति के अनुसार आवेदन पर फैसला करें।
अदालत दिल्ली निवासी अजय गौतम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्तमान और साथ ही बढ़ती आबादी और पीने के पानी की मांग को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में जल आपूर्ति स्टेशनों और बूस्टर पंपों का नए सिरे से मूल्यांकन कराने का अनुरोध किया गया है।
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याचिका में जल आपूर्ति स्टेशनों को आधुनिक तकनीक से उन्नत बनाने और समयबद्ध अवधि के भीतर पीने के पानी में दूषित पानी और सीवेज के पानी के मिश्रण को रोकने के सुझाव देने और तकनीक विकसित करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करने का अनुरोध किया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने अधिकारियों से कहा कि वे लागू कानून, नियमों, विनियमों और सरकार की नीति के अनुसार आवेदन पर फैसला करें।
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अदालत दिल्ली निवासी अजय गौतम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्तमान और साथ ही बढ़ती आबादी और पीने के पानी की मांग को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में जल आपूर्ति स्टेशनों और बूस्टर पंपों का नए सिरे से मूल्यांकन कराने का अनुरोध किया गया है।
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याचिका में जल आपूर्ति स्टेशनों को आधुनिक तकनीक से उन्नत बनाने और समयबद्ध अवधि के भीतर पीने के पानी में दूषित पानी और सीवेज के पानी के मिश्रण को रोकने के सुझाव देने और तकनीक विकसित करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करने का अनुरोध किया गया है।