फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   coronavirus delhi brother says First had to wander for hospital admission Looking for dead body now

शर्मनाक: पहले अस्पताल में दाखिले के लिए भटके, अब तलाश रहे शव, 15 अप्रैल को कोरोना से हुई थी दीपिका की मौत

Sun, 16 May 2021 08:24 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 16 May 2021 08:24 AM IST
सार

मृतक के भाई ने बताया कि पिछले महीने 12 अप्रैल को मेरी बहन की तबीयत अचानक खराब हुई। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। 

विज्ञापन
coronavirus delhi brother says First had to wander for hospital admission Looking for dead body now
लोकनायक अस्पताल - फोटो : social media

विस्तार

लोकनायक अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक भाई अपनी बहन के शव को एक महीने से तलाश रहा है, लेकिन अभी तक उसे शव नहीं मिला है। उसने पुलिस से भी गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। 
विज्ञापन


मृतक के भाई ने बताया कि पिछले महीने 12 अप्रैल को मेरी बहन की तबीयत अचानक खराब हुई। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। 15 अप्रैल को अस्पताल में कोविड जांच की गई, जिसमें कोरोना की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने कोविड अस्पताल जाने को कहा। बहन को एंबुलेंस में लेकर अस्पताल में दाखिला कराने के लिए निकला। 
विज्ञापन


दिनभर कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं भी आईसीयू बेड नहीं मिला, देर रात जानकारी मिली कि लोकनायक अस्पताल में बेड खाली है। रात करीब 11 बजे जैसे ही अस्पताल पहुंचने वाले थे। बहन एकदम बेहोश हो गई। जांच में उसे मृत घोषित कर दिया गया। वह समय दिल दहलाने वाला था। दिनभर दरबदर भटकने के बाद रात में इलाज मिलने से पहले ही  बहन दम तोड़ चुकी थी। किसी तरह खुद हो संभाला।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोकनायक अस्पताल प्रशासन ने कहा कि दो दिन बाद आकर शव ले जाना। माता-पिता और हम दोनों भाई भी कोरोना से संक्रमित हो गए थे। तबीयत ठीक न होने के कारण दो दिन बाद अस्पताल नहीं जा सके। 7 मई को स्वास्थ्य ठीक हुआ और बहन का शव लेने के लिए अस्पताल पहुंचा। 
 

यहां पर्याप्त दस्तावेज दिखाने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र देकर शव ले जाने के लिए कहा गया। जब मोर्चरी में पहुंचा तो कई शवों के बीच मुझे अपनी बहन के शव की पहचान करने को कहा गया, मोर्चरी में चारों और शव के ढेर लगे हुए थे। सभी शवों की पहचान की, लेकिन उसमें मेरी बहन दीपिका का शव था ही नहीं। 

जब यह बात अस्पताल प्रशासन को बताई तो उन्होंने कहा कि दो दिन का समय लगेगा वह अन्य जगहों पर शव की तलाश करेंगे। जब दो दिन बाद अस्पताल गया, तब भी शव नहीं मिला। इस मामले में अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी से लेकर विभागाध्यक्ष से भी बात की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 

अस्पताल का कहना था कि हो सकता है मेरी बहन का शव कोई और ले गया हो। मुझे ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं थी। पहले तो बहन को अस्पताल में दाखिल कराने के लिए भटकता रहा और अब उसकी मौत के एक माह बाद भी उसका शव नहीं मिल रहा है। हर प्रकार से कोशिश करने के बाद भी मायूसी ही हाथ लगी है।

थाने में भी दी है तहरीर
जब अस्पताल की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई तो इस मामले में 10 मई को आईपी स्टेट थाने में शिकायत की। पुलिस ने शिकायत तो लिख ली, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। थाने के वरिष्ठ अधिकारियों से विनती की है कि वह इस मामले में ठोस कार्रवाई करें, लेकिन वह मुझे ही समझाने लगे। बहन की मौत को एक महीना हो गया है, लेकिन अब तक उसका शव नहीं मिल सका है। इस मामले में न तो अस्पताल ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस ने। मेरे माता-पिता अपनी बेटी को उसके आखिरी समय में नहीं देख पाए। 
(मृतक दीपिका के भाई सिद्धार्थ कुमार ने जैसा अमर उजाला संवाददाता अभिषेक पांचाल को बताया)
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed