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कोरोना महामारी: जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई किसी मरीज की मौत, पुलिस ने कोर्ट में पेश की रिपोर्ट
Tue, 03 Aug 2021 07:55 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Aug 2021 07:55 PM IST
सार
कोरोना महामारी में जयपुर गोल्डन अस्पताल में 21 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते नहीं हुई थी। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
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जयपुर गोल्डन अस्पताल
- फोटो : एएनआई
विस्तार
राजधानी के अस्पतालों में कोविड की दूसरी लहर के दौरान जयपुर गोल्डन अस्पताल में 21 मरीजों की मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। जहां अस्पताल प्रशासन ने अप्रैल माह में हाईकोर्ट में बताया था कि ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की मौत हुई थी वहीं दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई थी।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विवेक बेनीवाल के समक्ष पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने पेश रिपोर्ट में कहा कि चूंकि आरोप डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ हैं, इसलिए दिल्ली मेडिकल काउंसिल से किसी भी तरह की मेडिकल लापरवाही के संबंध में राय मांगी गई है।
उन्होंने अदालत को बताया कि सभी मृतकों की मौत की जांच करने पर पता चला कि ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। उन्होंने यह तर्क अस्पताल के खिलाफ लापरवाही बरतने पर प्राथमिकी दर्ज करने के मुद्दे पर दायर याचिका पर पेश रिपोर्ट में दिया है।
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हालांकि अस्पताल ने कहा ईनोक्स ने 22 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे ऑक्सीजन 3.8 मीट्रिक टन की आपूर्ति की। 23 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे के निर्धारित समय पर आईनॉक्स द्वारा कोई रिफिल नहीं किया गया था, इसके परिणामस्वरूप संकट की स्थिति उत्पन्न हुई।
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मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विवेक बेनीवाल के समक्ष पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने पेश रिपोर्ट में कहा कि चूंकि आरोप डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ हैं, इसलिए दिल्ली मेडिकल काउंसिल से किसी भी तरह की मेडिकल लापरवाही के संबंध में राय मांगी गई है।
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उन्होंने अदालत को बताया कि सभी मृतकों की मौत की जांच करने पर पता चला कि ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। उन्होंने यह तर्क अस्पताल के खिलाफ लापरवाही बरतने पर प्राथमिकी दर्ज करने के मुद्दे पर दायर याचिका पर पेश रिपोर्ट में दिया है।
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हालांकि अस्पताल ने कहा ईनोक्स ने 22 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे ऑक्सीजन 3.8 मीट्रिक टन की आपूर्ति की। 23 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे के निर्धारित समय पर आईनॉक्स द्वारा कोई रिफिल नहीं किया गया था, इसके परिणामस्वरूप संकट की स्थिति उत्पन्न हुई।
अदालत के समक्ष पुलिस द्वारा दायर रिपोर्ट पर अस्पताल ने कहा है कि अपर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति और मरीजों की मौतों के बीच एक कड़ी थी क्योंकि अलर्ट के बावजूद उन्हें 30 घंटे तक ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की गई। 23-24 अप्रैल की मध्य रात को अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के कारण 21 मरीजों की मौत हो गई थी।
अस्पताल प्रबंधन ने अदालत को बताया कि घटना से पहले और बाद में प्रतिदिन औसत मृत्यु दर क्रमश केवल दो और तीन थी, जो 7-8 घंटे के अंतराल में बढ़कर 21 हो गई। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कम आपूर्ति से ही मौत हुई है। अस्पताल ने कहा कि उन्होंने दोपहर में ही ऑक्सीजन की कमी के संबंध में फोन कर दिया था लेकिन रात तक ऑक्सीजन का स्तर कम होता गया व तरल ऑक्सीजन लगभग समाप्त हो गई।
उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडरों के माध्यम से आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया और उनके अस्पताल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि पूरी नियमित आपूर्ति सिलेंडरों के रूप में की गई।
अस्पताल ने जांच के दौरान कहा यह स्थिति अभूतपूर्व थी और ऑक्सीजन की कमी से हुई एक गंभीर आपात स्थिति थी। अस्पताल ने कहा मरीजों की मौत की शुरुआती जांच के बाद प्रथम दृष्टया उस पल में यह सामने आया कि चार मामलों में 23 अप्रैल को 9.45 बजे के आसपास ऑक्सीजन प्रेशर की एक बूंद थी, जो एक असामान्य घटना है।
अस्पताल प्रबंधन ने अदालत को बताया कि घटना से पहले और बाद में प्रतिदिन औसत मृत्यु दर क्रमश केवल दो और तीन थी, जो 7-8 घंटे के अंतराल में बढ़कर 21 हो गई। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कम आपूर्ति से ही मौत हुई है। अस्पताल ने कहा कि उन्होंने दोपहर में ही ऑक्सीजन की कमी के संबंध में फोन कर दिया था लेकिन रात तक ऑक्सीजन का स्तर कम होता गया व तरल ऑक्सीजन लगभग समाप्त हो गई।
उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडरों के माध्यम से आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया और उनके अस्पताल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि पूरी नियमित आपूर्ति सिलेंडरों के रूप में की गई।
अस्पताल ने जांच के दौरान कहा यह स्थिति अभूतपूर्व थी और ऑक्सीजन की कमी से हुई एक गंभीर आपात स्थिति थी। अस्पताल ने कहा मरीजों की मौत की शुरुआती जांच के बाद प्रथम दृष्टया उस पल में यह सामने आया कि चार मामलों में 23 अप्रैल को 9.45 बजे के आसपास ऑक्सीजन प्रेशर की एक बूंद थी, जो एक असामान्य घटना है।
मृतकों के परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की न ही प्रबंधकों व डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। उन्होंने तर्क रखा कि जब ऑक्सीजन की कमी थी तो अस्पताल को मरीजों को छुट्टी दे देनी चाहिए थी।
दिल्ली सरकार की विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऑक्सीजन की कमी के रूप में मौत के कारण का पता नहीं लगाया जा सकता।
दिल्ली सरकार की विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऑक्सीजन की कमी के रूप में मौत के कारण का पता नहीं लगाया जा सकता।