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उपहार साक्ष्य नष्ट करने का मामला : दोषी को भतीजी की सगाई में शामिल होने के लिए पैरोल
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नई दिल्ली। उपहार अग्निकांड मामले से जुड़े साक्ष्य नष्ट करने के दोषी अदालत के बर्खास्त कर्मी दिनेश चंद शर्मा को अदालत ने भतीजी की सगाई में शामिल होने के लिए दो दिन की पैरोल प्रदान की है। अदालत ने दोषी की सजा दो दिन के लिए निलंबित करते हुए उसे 22 नवंबर को शाम पांच बजे जेल में समर्पण करने का निर्देश दिया है।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने दोषी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि जमा करने का निर्देश देते हुए दिल्ली से बाहर न जाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने उसे अपना मोबाइल फोन खुला रखने का भी निर्देश दिया है। दोषी ने एक सप्ताह के लिए सजा निलंबित करने का आग्रह किया था।
अदालत ने कहा दोषी की भतीजी की सगाई 21 नवंबर को है और समारोह एक दिन का है। ऐसे में सात दिन की अपेक्षा दो दिन के लिए सजा निलंबित करते हैं। दोषी के अधिवक्ता ने तर्क रखा था कि भतीजी के पिता व दादा नहीं हैं और घर में समारोह की देखभाल के लिए कोई पुरुष सदस्य नहीं है। ऐसे में उसकी सजा एक सप्ताह के लिए निलंबित कर जमानत प्रदान की जाए।
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दोषी की अर्जी पर सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने समारोह की पुष्टि की और अभियोजन पक्ष ने भी आपत्ति नहीं जताई।
वहीं दूसरी तरफ सुशील अंसल व पीपी बत्रा के वकीलों ने निचली अदालत द्वारा उनके मुवक्किलों को सात वर्ष की सुनाई सजा को गलत बताते हुए अपील के निपटारे तक इसे निलंबित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों का मामले से लेनादेना नहीं है और बिना आधार के ही अदालत ने उनके मुवक्किलों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने अदालत की फाइल से दस्तावेज गायब करवाने के लिए कोई षड्यंत्र नहीं रचा और न ही उनकी कोई भूमिका रही है।
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पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने दोषी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि जमा करने का निर्देश देते हुए दिल्ली से बाहर न जाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने उसे अपना मोबाइल फोन खुला रखने का भी निर्देश दिया है। दोषी ने एक सप्ताह के लिए सजा निलंबित करने का आग्रह किया था।
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अदालत ने कहा दोषी की भतीजी की सगाई 21 नवंबर को है और समारोह एक दिन का है। ऐसे में सात दिन की अपेक्षा दो दिन के लिए सजा निलंबित करते हैं। दोषी के अधिवक्ता ने तर्क रखा था कि भतीजी के पिता व दादा नहीं हैं और घर में समारोह की देखभाल के लिए कोई पुरुष सदस्य नहीं है। ऐसे में उसकी सजा एक सप्ताह के लिए निलंबित कर जमानत प्रदान की जाए।
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दोषी की अर्जी पर सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने समारोह की पुष्टि की और अभियोजन पक्ष ने भी आपत्ति नहीं जताई।
वहीं दूसरी तरफ सुशील अंसल व पीपी बत्रा के वकीलों ने निचली अदालत द्वारा उनके मुवक्किलों को सात वर्ष की सुनाई सजा को गलत बताते हुए अपील के निपटारे तक इसे निलंबित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों का मामले से लेनादेना नहीं है और बिना आधार के ही अदालत ने उनके मुवक्किलों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने अदालत की फाइल से दस्तावेज गायब करवाने के लिए कोई षड्यंत्र नहीं रचा और न ही उनकी कोई भूमिका रही है।